{"_id":"603010bf8ebc3ee8ee599729","slug":"its-not-has-manthan-whatts-do-jhansi-news-jhs1889851155","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसा तो नहीं था मंथन, ये क्या कर डाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसा तो नहीं था मंथन, ये क्या कर डाला
विज्ञापन
झांसी। शुक्रवार को जब घटना की जानकारी बुंदेलखंड महाविद्यालय की एनसीसी की शिक्षिका को हुई तो उनके मुंह से पहले शब्द यही निकले कि ‘ऐसा तो नहीं था मंथन, ये क्या कर डाला’। केवल एनसीसी शिक्षिका ही नहीं, बल्कि कॉलेज के अन्य शिक्षकों व छात्रों की भी पहली प्रतिक्रिया कुछ ऐसी ही आई। जिसने भी घटना के बारे में सुना अवाक रह गया।
इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने बाद 2014 में मंथन सिंह सेंगर ने बीए में प्रवेश लिया था। प्रवेश के साथ ही उसने एनसीसी ज्वाइन कर ली थी। शुरुआत में ही वो एक अनुशासित कैडेट के रूप में उभरकर सामने आया था। यही वजह थी कि पहले ही वर्ष में उसे अपनी टीम का सीनियर बना दिया गया था। लेकिन, पहली साल के बाद वो कुछ पारिवारिक समस्याओं में उलझ गया था। उसके पिता बीमार रहने लगे थे, जिसके बाद उसकी सक्रियता कम हो गई थी। इसके बाद टीम की सेकंड सीनियर एक छात्रा को मंथन की जगह तैनात कर दिया गया था। स्वच्छ भारत अभियान में मंथन ने कृतिका और हुकुमेंद्र के साथ बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित की थी। इसके अलावा लॉकडाउन के दरम्यान भी वो नियमित रूप से अन्य एनसीसी कैडेट के साथ ड्यूटी करता रहा था। मंथन ने मर्डर कर सकता है, पहले तो किसी को इस पर विश्वास ही नहीं हुआ।
बृहस्पतिवार को ‘सी’ सर्टिफिकेट लेने आई थी कृतिका
झांसी। कृतिका ने एनसीसी का ‘बी’ सर्टिफिकेट हासिल कर लिया था। उसका ‘सी’ सर्टिफिकेट भी आ गया था। लेकिन, वो कॉलेज से ये ले नहीं पाई थी। बृहस्पतिवार को कृतिका अपना सर्टिफिकेट लेने कॉलेज पहुंची थी। लेकिन, उसे मिल नहीं पाया था। कॉलेज स्टाफ ने एक - दो दिन आने की बात कही थी।
विज्ञापन
कॉलेज के लिपिक का भतीजा है हुकुमेंद्र
झांसी। घटना में घायल छात्र हुकुमेंद्र बुंदेलखंड महाविद्यालय में तैनात लिपिक संजय गुर्जर का भतीजा है। संजय गुर्जर छह माह पहले तक परिवार के साथ कॉलेज के छात्रावास में रहता था। साथ में हुकुमेंद्र भी रहता था। छह महीने पहले संजय हंसारी में अपने मकान में शिफ्ट हो गया था। जबकि, हुकुमेंद्र कॉलेज हॉस्टल में ही रह रहा था।
विज्ञापन
इंटरमीडिएट की परीक्षा पास करने बाद 2014 में मंथन सिंह सेंगर ने बीए में प्रवेश लिया था। प्रवेश के साथ ही उसने एनसीसी ज्वाइन कर ली थी। शुरुआत में ही वो एक अनुशासित कैडेट के रूप में उभरकर सामने आया था। यही वजह थी कि पहले ही वर्ष में उसे अपनी टीम का सीनियर बना दिया गया था। लेकिन, पहली साल के बाद वो कुछ पारिवारिक समस्याओं में उलझ गया था। उसके पिता बीमार रहने लगे थे, जिसके बाद उसकी सक्रियता कम हो गई थी। इसके बाद टीम की सेकंड सीनियर एक छात्रा को मंथन की जगह तैनात कर दिया गया था। स्वच्छ भारत अभियान में मंथन ने कृतिका और हुकुमेंद्र के साथ बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित की थी। इसके अलावा लॉकडाउन के दरम्यान भी वो नियमित रूप से अन्य एनसीसी कैडेट के साथ ड्यूटी करता रहा था। मंथन ने मर्डर कर सकता है, पहले तो किसी को इस पर विश्वास ही नहीं हुआ।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को ‘सी’ सर्टिफिकेट लेने आई थी कृतिका
झांसी। कृतिका ने एनसीसी का ‘बी’ सर्टिफिकेट हासिल कर लिया था। उसका ‘सी’ सर्टिफिकेट भी आ गया था। लेकिन, वो कॉलेज से ये ले नहीं पाई थी। बृहस्पतिवार को कृतिका अपना सर्टिफिकेट लेने कॉलेज पहुंची थी। लेकिन, उसे मिल नहीं पाया था। कॉलेज स्टाफ ने एक - दो दिन आने की बात कही थी।
विज्ञापन
कॉलेज के लिपिक का भतीजा है हुकुमेंद्र
झांसी। घटना में घायल छात्र हुकुमेंद्र बुंदेलखंड महाविद्यालय में तैनात लिपिक संजय गुर्जर का भतीजा है। संजय गुर्जर छह माह पहले तक परिवार के साथ कॉलेज के छात्रावास में रहता था। साथ में हुकुमेंद्र भी रहता था। छह महीने पहले संजय हंसारी में अपने मकान में शिफ्ट हो गया था। जबकि, हुकुमेंद्र कॉलेज हॉस्टल में ही रह रहा था।