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इस बार भी नवरात्र में नहीं लगेगा पंचकुइयां मेला
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झांसी। नवरात्र में पंचकुइयां पर लगने वाले मेले की परंपरा तीन सौ साल में तीसरी बार टूटने जा रही है। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से इस बार भी चैत्र नवरात्र में यहां मेले का आयोजन नहीं होगा।
महानगर के पंचकुइयां क्षेत्र में शीतला माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां को जल अर्पित करने पहुंचते हैं। सूर्योदय से पहले ही यहां भक्तों का जमावड़ा लग जाता है और देर रात तक भीड़ जमा रहती है। मंदिर के इर्दगिर्द मेला भी लगता है। जिसमें घर - गृहस्थी के सामानों से लेकर सौंदर्य प्रसाधन, खिलौने, खानपान, पूजन सामग्री आदि की सैकड़ों दुकानें लगती हैं। साथ ही बच्चों के कई झूले में मेले में होते हैं। पंचकुइयां का मेला मराठा शासनकाल से लगातार लगता आ रहा था। पहली बार ये परंपरा कोरोना की वजह से पिछले साल चैत्र नवरात्र में टूटी थी। इसके बाद शारदीय नवरात्र में भी यहां मेला नहीं लग पाया था। 13 अप्रैल से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्र में भी इस बार मेले का आयोजन नहीं होने जा रहा है।
इतिहासकार मुकुंद मेहरोत्रा के अनुसार पंचकुइयां मेला मराठा शासन काल से लगातार लगता आ रहा है। ये तीन सौ साल पुरानी परंपरा है। पहले इसका स्वरूप बहुत छोटा होता था। कोरोना की वजह से तीन सौ साल में तीसरी बार ये परंपरा टूटने जा रही है।
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नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल ने बताया कि कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मेले का आयोजन संभव नहीं है। हालांकि, अब तक किसी ने स्वीकृति मांगी नहीं है। मांगे जाने पर भी कोविड नियमों के चलते स्वीकृति दी नहीं जाएगी।
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महानगर के पंचकुइयां क्षेत्र में शीतला माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां को जल अर्पित करने पहुंचते हैं। सूर्योदय से पहले ही यहां भक्तों का जमावड़ा लग जाता है और देर रात तक भीड़ जमा रहती है। मंदिर के इर्दगिर्द मेला भी लगता है। जिसमें घर - गृहस्थी के सामानों से लेकर सौंदर्य प्रसाधन, खिलौने, खानपान, पूजन सामग्री आदि की सैकड़ों दुकानें लगती हैं। साथ ही बच्चों के कई झूले में मेले में होते हैं। पंचकुइयां का मेला मराठा शासनकाल से लगातार लगता आ रहा था। पहली बार ये परंपरा कोरोना की वजह से पिछले साल चैत्र नवरात्र में टूटी थी। इसके बाद शारदीय नवरात्र में भी यहां मेला नहीं लग पाया था। 13 अप्रैल से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्र में भी इस बार मेले का आयोजन नहीं होने जा रहा है।
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इतिहासकार मुकुंद मेहरोत्रा के अनुसार पंचकुइयां मेला मराठा शासन काल से लगातार लगता आ रहा है। ये तीन सौ साल पुरानी परंपरा है। पहले इसका स्वरूप बहुत छोटा होता था। कोरोना की वजह से तीन सौ साल में तीसरी बार ये परंपरा टूटने जा रही है।
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नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल ने बताया कि कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मेले का आयोजन संभव नहीं है। हालांकि, अब तक किसी ने स्वीकृति मांगी नहीं है। मांगे जाने पर भी कोविड नियमों के चलते स्वीकृति दी नहीं जाएगी।