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यूपी में मां काली का दरबार: इंदिरा गांधी भी आईं थीं झांसी के इस मंदिर में, मन्नत पूरी होने पर दोबारा टेका माथा

Wed, 14 Oct 2026 01:47 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 14 Oct 2026 01:47 PM IST
सार

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वर्ष 1979 में झांसी के काली मंदिर में आई थीं। इस मंदिर में नवरात्र में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। 16 अक्तूबर को फूल बंगला सजेगा। विशेष पूजा-अर्चना के साथ 19 को विशाल भंडारा होगा। मंदिर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कराने की मांग की गई है।

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Indira Gandhi Visited Jhansi's Kali Temple in 1979, Returned in 1983 After Her Wish Came True
Indira Gandhi - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

झांसी के लक्ष्मी गेट बाहर स्थित प्राचीन काली मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां मां काली के दरबार में पूरी होती है। 
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मंदिर के प्रधान पुजारी अजय त्रिवेदी के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती तक यहां दर्शन-पूजन के लिए आ चुकी हैं। नवरात्र में मंदिर में विशेष अनुष्ठान, अभिषेक और आरती के साथ कई धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।
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प्रधान पुजारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वर्ष 1979 में मंदिर आई थीं और मन्नत मांगी थी। मुराद पूरी होने पर वह वर्ष 1983 में दोबारा मंदिर पहुंचीं और यज्ञ कराया था। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी सांसद रहते हुए यहां यज्ञ करवा चुकी हैं। इनके अलावा भी कई नामचीन हस्तियां मां काली के दर्शन करने आती रही हैं।
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गुड़हल का फूल और बिल्व पत्र चढ़ाने की मान्यता
मंदिर में मां काली को गुड़हल का फूल और बिल्व पत्र अर्पित करने की परंपरा है। प्रधान पुजारी ने बताया कि नवरात्र के नौ दिनों में मां के 16 अभिषेक किए जाते हैं। सुबह चार बजे अभिषेक, सात बजे आरती और शाम साढ़े सात बजे आरती होती है।

16 अक्तूबर को मंदिर में फूल बंगला सजाया जाएगा और मां को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। 17 अक्तूबर को रात 8:30 बजे महाआरती होगी। वहीं, 18 अक्तूबर को रात दस बजे से अगले दिन तड़के तीन बजे तक विशेष निशा पूजा आयोजित की जाएगी। 19 अक्तूबर को विशाल भंडारे का आयोजन होगा।

मन्नत पूरी होने पर कराते हैं भंडारा
मंदिर में नवरात्र के दौरान भंडारे भी शुरू हो गए हैं। प्रधान पुजारी के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर स्वेच्छा से भंडारा कराते हैं। मंगलवार से इसकी शुरुआत हो गई है। नवरात्र में अब लगभग प्रतिदिन भंडारे आयोजित किए जाएंगे।

सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर सुरक्षा की चिंता
नवरात्र में बढ़ती भीड़ के बीच मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। प्रधान पुजारी अजय त्रिवेदी ने बताया कि मंदिर परिसर में महाकाली के अलावा महादेव, महालक्ष्मी, मां सरस्वती, सिंहवाहिनी दुर्गा और मां पीतांबरा के भी मंदिर हैं। आम दिनों के साथ नवरात्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि मंदिर कमेटी को भीड़ नियंत्रित करने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए महिला और पुरुष कार्यकर्ताओं को तैनात करना पड़ता है। नवरात्र शुरू होने से पहले प्रशासनिक अधिकारियों से मंदिर के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक अपेक्षित सहयोग नहीं मिला है।

रात में मंदिर से लक्ष्मी गेट तक जाम की स्थिति बन जाती है। उन्होंने सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर विशेष रूप से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है।
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