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बुंदेलखंड में उन्नत भारत अभियान को उतारने का होगा प्रयास: प्रो. राजेंद्र
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2016 12:49 AM IST
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bhart abhiyan, jhansi news
- फोटो : amar ujala
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में उन्नत भारत अभियान की कार्यशाला में मुख्य अतिथि सलाहकार उन्नत भारत अभियान, आईआईटी दिल्ली प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि बुंदेलखंड के गांव की छोटी-छोटी समस्याओं का उनके संसाधन के आधार पर निदान संभव हो सकेगा। उन्नत भारत अभियान को बुंदेलखंड की जमीं पर उतारने का पूरा प्रयास किया जाएगा।
मुख्य अतिथि बोले कि बीयू कृषि विज्ञान संस्थान एक नोडल सेंटर के रूप में स्थापित होकर कार्य करेगा। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों के जीवकोपार्जन का मुख्य साधन कृषि तथा पशुपालन है। किसानों को उन्नत तकनीकी सिखाकर उनके जीविकोपार्जन के साधनों को वैज्ञानिक ढंग से विकसित करने से 72 प्रतिशत लोग समृद्ध हो जाएंगे। गांव के विकास की कड़ी में विश्वविद्यालय ने पांच गांवों को गोद लिया है।
इनको कृषि विज्ञान संस्थान प्रक्षेत्र प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करेगा। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. केआर मौर्य ने कहा कि संस्थान ने पांच गांवों को कृषि विकास के लिए गोद लिया है। कार्यक्रम संयोजक श्याम बिहारी ने उन्नत भारत कार्यक्रम की पृष्ठ भूमि बताई।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. हरिप्रसाद ने बुंदेलखंड की समस्या, संसाधन व उनके उपयोग के बारे में बताया। एक दिवसीय कार्यशाला में 15 गांव के प्रधान प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया। संचालन डॉ. जेके बबेले ने किया। इस दौरान अनुराग शर्मा भी मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि बोले कि बीयू कृषि विज्ञान संस्थान एक नोडल सेंटर के रूप में स्थापित होकर कार्य करेगा। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों के जीवकोपार्जन का मुख्य साधन कृषि तथा पशुपालन है। किसानों को उन्नत तकनीकी सिखाकर उनके जीविकोपार्जन के साधनों को वैज्ञानिक ढंग से विकसित करने से 72 प्रतिशत लोग समृद्ध हो जाएंगे। गांव के विकास की कड़ी में विश्वविद्यालय ने पांच गांवों को गोद लिया है।
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इनको कृषि विज्ञान संस्थान प्रक्षेत्र प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल करेगा। कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. केआर मौर्य ने कहा कि संस्थान ने पांच गांवों को कृषि विकास के लिए गोद लिया है। कार्यक्रम संयोजक श्याम बिहारी ने उन्नत भारत कार्यक्रम की पृष्ठ भूमि बताई।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. हरिप्रसाद ने बुंदेलखंड की समस्या, संसाधन व उनके उपयोग के बारे में बताया। एक दिवसीय कार्यशाला में 15 गांव के प्रधान प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया। संचालन डॉ. जेके बबेले ने किया। इस दौरान अनुराग शर्मा भी मौजूद रहे।