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झंकार में नवोदित लेखकों ने पेश की रचनाएं
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झांसी। आजादी का अमृत महोत्सव एवं चौरी-चौरा शताब्दी के मौके पर राजकीय संग्रहालय सभागार में द झांसी राइटर्स द्वारा नवोदित लेखकों का सम्मेलन झंकार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नवोदित लेखकों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रविंद्र शुक्ल ने कहा कि अक्षर कभी समाप्त नहीं होता है। वह ब्राह्मांड में सदैव अजर अमर रहता है। जब अक्षर की युति ठीक होती है तो यह मंत्र बन जाता है और गलत संयोग से यह अशुभ फल प्रदान करता है। इसलिए हमें बड़ी ही सावधानी से कविता करनी चाहिए। अध्यक्षता करते हुए राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि राम चरित मानस से बेहतर दिशा निर्देशन जीवन में हमें कहीं नही मिल सकता है। बुंदेलखंड वह भूमि है जो देश ही नहीं विश्व का नेतृत्व करती है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मुन्ना तिवारी ने कविता क्यूं और कैसे लिखना चाहिए इसके बारे में बताया। वहीं क िअर्जुन सिंह चांद ने नवोदित लेखकों को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति व हिंदी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि मैथिलीशरण मुदगिल, एसके दुबे, चंद्रकांत निर्मल ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर आलोक अज्ञानी, आशुतोष चौबे, दीपेंद्र, हेमंत, मृगेंद्र अग्रवाल, पारुल गुप्ता, प्रतीक्षा गुप्ता, रुचिका श्रीवास्तव, आदि मौजूद रहे। संचालन महेश पटैरिया ने व आभार आलोक पचौरी ने व्यक्त किया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रविंद्र शुक्ल ने कहा कि अक्षर कभी समाप्त नहीं होता है। वह ब्राह्मांड में सदैव अजर अमर रहता है। जब अक्षर की युति ठीक होती है तो यह मंत्र बन जाता है और गलत संयोग से यह अशुभ फल प्रदान करता है। इसलिए हमें बड़ी ही सावधानी से कविता करनी चाहिए। अध्यक्षता करते हुए राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि राम चरित मानस से बेहतर दिशा निर्देशन जीवन में हमें कहीं नही मिल सकता है। बुंदेलखंड वह भूमि है जो देश ही नहीं विश्व का नेतृत्व करती है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मुन्ना तिवारी ने कविता क्यूं और कैसे लिखना चाहिए इसके बारे में बताया। वहीं क िअर्जुन सिंह चांद ने नवोदित लेखकों को शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति व हिंदी को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि मैथिलीशरण मुदगिल, एसके दुबे, चंद्रकांत निर्मल ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर आलोक अज्ञानी, आशुतोष चौबे, दीपेंद्र, हेमंत, मृगेंद्र अग्रवाल, पारुल गुप्ता, प्रतीक्षा गुप्ता, रुचिका श्रीवास्तव, आदि मौजूद रहे। संचालन महेश पटैरिया ने व आभार आलोक पचौरी ने व्यक्त किया।
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