{"_id":"2bea80f0e9921b2c00de77d764ac8eb6","slug":"illegal-possession-of-two-thousand-acres-of-municipal-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" नगर निगम की दो हजार एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम की दो हजार एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे
ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। यदि अवैध कब्जा हुआ तो अफसर नपेंगे। अधिकारी सरकारी और आम लोगों की जमीनों को प्राथमिकता से कब्जा मुक्त कराएं। यह आदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश की सत्ता संभालते ही दिया था। आम लोगों की जमीनें कब्जा मुक्त कराना तो दूर, अफसर सरकारी जमीन तक को कब्जा मुक्त कराने के लिए गंभीर नहीं हैं। स्थिति यह है कि नगर निगम की करीब दो हजार एकड़ जमीन पर किसानों ने अवैध कब्जा किया हुआ है।
झांसी नगर निगम के क्षेत्र का विस्तार कर इसमें 15 गांवों को जोड़ा गया था। नगर क्षेत्र की परिधि में आते ही सभी गांवों की ग्राम सभा की जमीन पर भी नगर निगम का मालिकाना हक हो गया था। जमीनों के दस्तावेज तो नगर निगम को सौंप दिए गए, लेकिन उनपर कब्जा अभी भी वहां के किसानों का ही है।
जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए संपत्ति विभाग की टीम कई बार मौके पर गई, लेकिन किसान उनके नक्शे को स्वीकार नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में नगर निगम ने तहसील प्रशासन से नायब तहसीलदार व लेखपाल की मांग की, वहीं विवाद की स्थिति से बचने के लिए पुलिस बल की भी मांग की जाती है।
विज्ञापन
लेकिन, तय तिथि पर न तो तहसील की टीम आती है और न ही पुलिस बल उपलब्ध हो पाता है। परिणाम स्वरूप नगर निगम के हिस्से की जमीन मुक्त नहीं हो पा रही है।
30 दिसंबर 2015 को नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी व एसएसपी को पत्र भेजकर करारी, सिमरधा आदि क्षेत्रों में 64 आजारी नंबरों को कब्जा मुक्त कराकर चिह्नांकित करके नगर निगम के कब्जे में लेने के लिए छह से नौ जनवरी तक अभियान चलाने की जानकारी दी थी। उन्होंने मजिस्ट्रेट की तैनाती करने और पुलिस बल मुहैया कराने की मांग की। लेकिन, न मजिस्ट्रेट तैनात किया गया और न ही पुलिस बल मिला इस कारण नगर निगम की जमीन मुक्त नहीं हो सकी।
नगर निगम की दो हजार एकड़ जमीन काश्तकारों में फंसी है। तहसील प्रशासन जमीन मुक्त कराने में सहयोग नहीं कर रहा है, इस कारण हम जमीन मुक्त नहीं करा पा रहे हैं।
पुष्पराज गौतम, संपत्ति कर अधिकारी, नगर निगम, झांसी।
विज्ञापन
झांसी नगर निगम के क्षेत्र का विस्तार कर इसमें 15 गांवों को जोड़ा गया था। नगर क्षेत्र की परिधि में आते ही सभी गांवों की ग्राम सभा की जमीन पर भी नगर निगम का मालिकाना हक हो गया था। जमीनों के दस्तावेज तो नगर निगम को सौंप दिए गए, लेकिन उनपर कब्जा अभी भी वहां के किसानों का ही है।
विज्ञापन
जमीन को अपने कब्जे में लेने के लिए संपत्ति विभाग की टीम कई बार मौके पर गई, लेकिन किसान उनके नक्शे को स्वीकार नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में नगर निगम ने तहसील प्रशासन से नायब तहसीलदार व लेखपाल की मांग की, वहीं विवाद की स्थिति से बचने के लिए पुलिस बल की भी मांग की जाती है।
विज्ञापन
लेकिन, तय तिथि पर न तो तहसील की टीम आती है और न ही पुलिस बल उपलब्ध हो पाता है। परिणाम स्वरूप नगर निगम के हिस्से की जमीन मुक्त नहीं हो पा रही है।
30 दिसंबर 2015 को नगर आयुक्त ने जिलाधिकारी व एसएसपी को पत्र भेजकर करारी, सिमरधा आदि क्षेत्रों में 64 आजारी नंबरों को कब्जा मुक्त कराकर चिह्नांकित करके नगर निगम के कब्जे में लेने के लिए छह से नौ जनवरी तक अभियान चलाने की जानकारी दी थी। उन्होंने मजिस्ट्रेट की तैनाती करने और पुलिस बल मुहैया कराने की मांग की। लेकिन, न मजिस्ट्रेट तैनात किया गया और न ही पुलिस बल मिला इस कारण नगर निगम की जमीन मुक्त नहीं हो सकी।
नगर निगम की दो हजार एकड़ जमीन काश्तकारों में फंसी है। तहसील प्रशासन जमीन मुक्त कराने में सहयोग नहीं कर रहा है, इस कारण हम जमीन मुक्त नहीं करा पा रहे हैं।
पुष्पराज गौतम, संपत्ति कर अधिकारी, नगर निगम, झांसी।