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Jhansi News: जानलेवा हमले का दोष सिद्ध होने पर पति और देवर को दस-दस साल की कैद

Sat, 10 May 2025 01:41 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 01:41 AM IST
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Husband and brother-in-law sentenced to 10 years imprisonment each after being found guilty of murderous attack

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संवाद न्यूज एजेंसी



झांसी। पत्नी पर जानलेवा हमले का दोषी करार देते हुए अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार यादव की कोर्ट ने पति समेत देवर को 10-10 साल के कठोर कारावास समेत एक-एक लाख रुपये के जुर्माना की सजा सुनाई है जबकि महिला की ननद को संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेज सिंह गौर के मुताबिक वीरांगना नगर निवासी सोनिया घई की ओर से 15 दिसंबर 2021 को नवाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सोनिया की सास ने मृत्यु से पहले पैतृक संपत्ति पति मुकेश घई उर्फ बंटी और देवर राकेश घई के नाम कर दी थी लेकिन, दोनों नशे के आदी थे। वसीयतनामे में सास ने शर्त रखी कि बहू सोनिया की सहमति के बिना संपत्ति नहीं बेची जा सकेगी। वर्ष 2016 में सास की मौत के बाद से पति मुकेश, देवर राकेश और चंडीगढ़ निवासी ननद ममता ने सोनिया से मारपीट शुरू कर दी। 15 दिसंबर को पति मुकेश और राकेश मकान बेचने का दबाव बनाने लगे लेकिन, सोनिया ने इन्कार कर दिया। इससे नाराज होकर दोनों ने उस पर जान लेवा हमला कर दिया। उसे कैंची मारकर लहूलुहान कर दिया। नाजुक हाल में उसे अस्पताल ले जाया गया। सोनिया की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर लिया। उसने आरोपियों के खिलाफ बयान दर्ज कराया।
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सोनिया की मौत के बाद उसके माता-पिता ने मुकदमे में पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत गवाह एवं सुबूत को विश्वसनीय मानते हुए कोर्ट ने पति मुकेश एवं देवर राकेश को जानलेवा हमले का दोषी करार देते हुए दस-दस साल की कैद समेत एक-एक लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। अन्य धाराओं में भी दोनों को दोषी ठहराया।
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इनसेट



न्यायाधीश बोले - विवेचक को विवेचना का ज्ञान नहीं, अकेडमी भेजें

न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद विवेचक पर टिप्पणी करते हुए एसएसपी को आदेश जारी किया। न्यायालय ने विवेचक तत्कालीन विश्वविद्यालय चौकी प्रभारी अनुराग अवस्थी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन्हें विवेचना का ज्ञान नहीं है। प्रथम विवेचना अधिकारी अनुराग अवस्थी ने मुकदमे से संबंधित घटनास्थल से बरामद लोहे की रॉड, कैंची और मौके पर बनाया गया वीडियो पेश किया। विवेचक ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत सिर्फ प्रमाणपत्र ही दिया। इससे यह साबित होता है कि इनको विवेचना का विधिक ज्ञान नहीं है। इसलिए इन्हें प्रशिक्षण अकादमी भेजा जाए। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अगर इनका तबादला गैर जनपद हो चुका है तो डीजीजी को पत्र लिखकर आदेश से अवगत कराएं। गौरतलब है कि तत्कालीन विवेचनाधिकारी उपनिरीक्षक अनुराग अवस्थी प्रमोशन पाकर निरीक्षक बन चुके हैं और वह वर्तमान में जिला ललितपुर के तालबेहट कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक के पद पर तैनात हैं।
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