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कैसे खेलें, कहां खेलें, स्कूलों में तो मैदान ही नहीं हैं

Thu, 26 Aug 2021 01:47 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 01:47 AM IST
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How to play, where to play, there are no grounds in schools
झांसी। शहर की खेल प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में पिछड़ रही हैं, कहीं स्कूलों के पास खेल के मैदान नहीं हैं तो कहीं बच्चे तंगहाली से गुजर रहे हैं। ऐसे में खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। शहर के अधिकांश स्कूलों में स्थिति ऐसी ही है। स्कूलों का कहना है कि मैदान न होने से बच्चों को गेम्स एक्टिविटी के लिए दूसरे स्कूल के मैदान या फिर शहर में मैदानों में जाना पड़ता है। इससे खर्च काफी बढ़ता है जबकि स्कूल में गेम्स की फीस के नाम पर कक्षा 9 से 12 तक सिर्फ पांच रुपये महीना ही लिया जाता है। ऐसे में बच्चों के लिए खेल के सभी संसाधन जुटाना मुश्किल होता है। प्रतिभाएं भी आगे नहीं निकल पा रही हैं।
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फोटो-खेल का मैदान व प्रधानाचार्य
बच्चे अच्छा खेल रहे हैं पर संसाधन नहीं हैं
झांसी। शहर में आशिक चौराहा स्थित राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन हायर सेकें ड्री स्कूल की स्थापना 1949 में पूर्व सांसद एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित कृष्णचंद शर्मा ने की थी। स्कूल के प्रधानाचार्य आनंद कुमार बताते हैं कि स्कूल में खेल का कोई भी मैदान नहीं है। बच्चों की प्रतिभा और उनकी रुचि को देखते हुए परिसर के छोटे से मैदान में ही बास्केट बॉल, बैडमिंटन, कबड्डी, फुटबॉल और जिमनास्टिक सिखाई जाती है। स्कूल में खेल शिक्षक हैं लेकिन संसाधन बहुत सीमित होने से प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिल पाता है जबकि कई बच्चे जिला स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं। स्कूल के छात्र रह चुके अनूप राय, कैलाश नारायण, विनय सेन अच्छा खेल चुके हैं। छात्र आसिफ ने हॉकी में बेहतर प्रदर्शन किया वह अब पुणे में प्रैक्टिस कर रहा है।
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स्कूल का फोटो, प्रधानाचार्य का फोटो
नहीं है अपना खेल का मैदान, दूसरों के मैदान में खिला रहे खेल
झांसी। शहर में बाहर खंडेराव गेट स्थित पंडित कृष्णचंद शर्मा कन्या इंटर कॉलेज लगभग 80-90 साल पुराना विद्यालय है। वर्ष 1961 में इसे हाईस्कूल की मान्यता मिली थी, आज स्कूल की कई छात्राएं जिमनास्टिक, हॉकी, कबड्डी और खो-खो में जिला स्तर पर कई प्रतियोगिताएं जीत चुकी हैं, लेकिन विद्यालय में खेल का कोई मैदान न होने से प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। विद्यालय की कई प्रतिभाशाली छात्राएं आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। प्रधानाचार्य अर्चना गौतम ने बताया कि विद्यालय में खेल शिक्षिका हैं, कई छात्राएं बहुत अच्छा खेल रही हैं, लेकिन मैदान न होने की वजह से उन्हें स्कूल से बाहर शहर के दूसरों मैदानों या किसी और विद्यालय ले जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पढ़ने वाली अधिकांश छात्राएं काफी गरीब परिवार से हैं, ऐसे में उन्हें खेल की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए वह स्वयं और बाकी शिक्षिकाएं मदद करती हैं।
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बोले बच्चे-दोनों के फोटो
राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन हायर सेकें ड्री स्कूल में कक्षा 9 के छात्र लक्ष्य शर्मा स्कूल में कम संसाधनों के बीच भी खेल में अच्छा प्रदर्शन करते हैं लेकिन तंगहाली के चलते परिवार में तमाम मुश्किलें हैं। लक्ष्य ने बताया कि उसके पापा रत्नेश कुमार मजदूरी करते हैं। उसकी चार बहनें भी हैं। मां ममता और पापा जैसे-तैसे सभी बच्चों को पढ़ा रहे हैं। स्कूल में भी खेल का मैदान नहीं हैं। बंगला घाट में रहने वाले लक्ष्य ने बताया कि संसाधनों की कमी से स्कूल के कई और बच्चे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन हायर में ही कक्षा 9 के छात्र तुषार खटीक ने बताया कि उसके पापा मंगल खटीक बाजार में फलों का ठेला लगाते हैं। मां अर्चना बच्चों को पढ़ा लिखाकर आगे बढ़ाना चाहती हैं। उसे एथलीट में काफी रुचि है। स्कूल में होने वाले वार्षिकोत्सव में भी वह हिस्सा लेता है, लेकिन आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी के चलते उसे कोई दिशा नहीं मिल रही है। पापा किसी तरह तीनों भाइयों की पढ़ाई करा रहे हैं। खटिकाना में रहने वाले तुषार ने बताया कि अच्छे साधन मिले तो बच्चे अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

पंडित कृष्णचंद शर्मा कन्या इंटर कॉलेज की मेधावी छात्रा मेघा लिटौरिया बताती हैं कि वह जिमनास्टिक में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। उसके पापा चंद्रभान लिटौरिया दिल्ली में गार्ड का काम करते हैं। मां सरोज भी काम करती हैं। दो भाई और तीन बहनों की पढ़ाई और खर्च मुश्किल से चल पाता है। स्कूल में कक्षा 9 की छात्रा मेघा का कहना है कि उसे अच्छी डाइट और अच्छा कोच मिल जाए तो वह काफी आगे बढ़ सकती है। स्कूल से जो मदद मिलती है वह काफी नहीं होती। तंगी की वजह से मंजिल काफी मुश्किल लगती है।
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