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बहुत काम आ रही बच्चों की बचत

Sun, 20 Nov 2016 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 20 Nov 2016 12:48 AM IST
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 Having a lot of work saving children
sikka, jhansi news - फोटो : demo
नोटबंदी केे बाद बच्चों की गुल्लक बड़ों के बहुत काम आ रही है। गुल्लक तोड़कर निकले छुट्टे पैसों से घर गृहस्थी चल रही है। यह अलग बात है कि अपनी छोटी- छोटी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए अपने जेब खर्च काटकर बच्चों ने जो पैसे गुल्लक में डाले, वे अब उनके नहीं रहे। इसके बावजूद वे खुश है। उनका कहना है कि बचत तो गाढ़े वक्त के लिए ही होती है। ख्वाहिशें पूरी करने के लिए तो जिंदगी बाकी है। 
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मैं तो खुश हूं 
सुभाष गंज निवासी चंद्रप्रकाश मिश्रा की पुत्री अनुष्का मिश्रा पांचवीं क्लास की छात्रा हैं। वह पिछले तीन साल से पॉकेट मनी व रिश्तेदारों से मिलने वाले रुपयों को गुल्लक में जोड़ रही थी। नोटबंदी के बाद जब उसने घर में छुट्टे पैसों को लेकर घर में परेशानी देखी तो खुद ही गुल्लक को तोड़कर उसमें निकले तीस हजार रुपये मम्मी को थमा दिए। उसका कहना है कि वह पैसे जोड़कर एक अच्छी ड्रेस व मम्मी को महंगा मोबाइल दिलाना चाहती थी। मगर उससे बड़ी तो आज की जरूरत है।
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भरने से पहले ही तोड़नी पड़ी 
वैद्यराज मुहल्ला घासमंडी निवासी राजेंद्र जैन की पुत्री भव्या जैन सेकेंड क्लास की स्टूडेंट है। वह पिछले ढाई साल से गुल्लक में पैसे जोड़ रही थी। नौ नवंबर के बाद से उसकी मम्मी खुल्ले पैसों को लेकर बेहद परेशान हो रही थी। इस कारण उसने गुल्लक तोड़ दी और उसमें निकले 1,850 रुपये मम्मी को दे दिए। उसका कहना है कि परेशानी दूर हो गई। इस बात की खुशी है। वैसे वह गुल्लक भरने पर ही उसे तोड़ती।  
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साइकिल के पैसे गृहस्थी में 
सिविल लाइन निवासी मुकेश कुमार की बेटी रौनक की नौंवी कक्षा की छात्रा हैं। वह साइकिल खरीदने के लिए पिछले डेढ़ साल से पैसे गुल्लक में इकट्ठा कर रही थी। उसे उम्मीद थी कि अगले साल तक वह साइकिल के लिए पैसे जरूर इकट्ठा कर लेगी। नोटबंदी के बाद खुल्ले पैसों को लेकर हो रही परेशानी के चलते उसने अपनी मम्मी के कहने पर तोड़ दी और पांच हजार रुपये घर खर्च को दे दिए।



स्कूटी के लिए जोड़ रहे थे रुपये
बाबूलाल कारखाने के पास रहने वाले दीपक वार्ष्णेय का पुत्र श्रेष्ठ वार्ष्णेय पांचवीं का छात्र हैं। वह पिछले दो साल से इस उम्मीद से गुल्लक में रुपये इकट्ठे कर रहा थे कि बड़े होने पर वह अपने पैसे से स्कूटी खरीद लेगा। नोटबंदी के बाद से छुट्टे पैसों को लेकर मम्मी आवश्यक खरीदारी को लेकर परेशान हो रही थीं। उसने गुल्लक तोड़कर उसमेें निकले 2700 रुपये मम्मी को दे दिए। स्कूटी तो फिर आ जाएगी। 
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