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सीआरएस पोर्टल में सेंध: हैकरों ने झांसी से बनाए 8 राज्यों के 2415 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, अफसरों में मची खलबली
Sat, 22 Nov 2025 07:19 AM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
Published by: दीपक महाजन
Updated Sat, 22 Nov 2025 07:19 AM IST
सार
शातिर साइबर हैकर्स ने सीआरएस पोर्टल में सेंध लगाते हुए बड़ागांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत सचिव संजय गोस्वामी की आईडी हैक कर ली। कुछ घंटे बाद अफसरों को इसकी भनक लगी। तब तक जालसाजों ने सचिव की आईडी से 2,415 जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से निर्गत कर लिए थे।
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साइबर क्राइम।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
शातिर साइबर हैकर्स ने सीआरएस पोर्टल में सेंध लगाते हुए बड़ागांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत सचिव संजय गोस्वामी की आईडी हैक कर ली। कुछ घंटे बाद अफसरों को इसकी भनक लगी। तब तक जालसाजों ने सचिव की आईडी से 2,415 जन्म प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से निर्गत कर लिए थे। यह मामला सामने आने के बाद डीपीआरओ कार्यालय से लेकर मुख्य रजिस्ट्रार कार्यालय तक खलबली मच गई। मुख्य रजिस्ट्रार ने ये सभी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र निरस्त करने के निर्देश दिए। वहीं, साइबर पुलिस सीआरएस पोर्टल में सेंध लगाने वालों को तलाशने में जुटी है।
आईडी हैक होने के कई घंटे तक नहीं लग सकी भनक
ऑनलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण का पूरा ब्योरा सीआरएस पोर्टल (नागरिक पंजीकरण प्रणाली) पर दर्ज होता है। ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत सचिव इनकी फीडिंग करते हैं। हर ग्राम पंचायत के लिए आईडी अलग होती है। 9 सितंबर को बड़ागांव ब्लॉक के सचिव संजय गोस्वामी की दिगारा, वनगुवां एवं कोलवा ग्राम पंचायत की आईडी में सेंध लगाकर जालसाजों ने उसे हैक लिया। अब यह मामला सामने आया है। उस दौरान कई घंटे तक सचिव को इसकी भनक तक नहीं लग सकी।
जांच में फर्जी प्रमाण पत्र का पता चला
सचिव संजय गोस्वामी का कहना है कि सुबह करीब 10:14 बजे मोबाइल पर फोन करके एक अंजान व्यक्ति ने आईडी हैक होने की बात बताई। यह सुनते ही उन्होंने अपनी आईडी चेक की। उसमें उनकी मेल आईडी की जगह दूसरी आईडी दिख रही थी। यह देखते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत डीपीआरओ को सूचना दी। उसके बाद लॉग आउट कर दिया गया। तब तक इन तीनों ग्राम पंचायतों से कुल 2415 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी कर लिए गए थे। आईडी हैक होने से अफसरों के हाथ पांव फूल गए। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को भी इसकी सूचना दी गई। आला अफसरों के जांच कराने पर उस दौरान जारी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र की सीरीज का पता चला।
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चंद मिनटों में जारी किए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
साइबर जालसाजों ने आईडी हैक करके झांसी से ही यूपी समेत आठ राज्यों के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र बना डाले। इसके पहले रायबरेली, उन्नाव, अलीगढ़ में भी सीआरएस पोर्टल में सेंधमारी करके फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इसके यहां उजागर होने पर झांसी से भी फर्जीवाड़े के तार जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। अभी तक की जांच में यह सामने आया कि इस दौरान यूपी समेत बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, छत्तीसगढ़ के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए। उत्तर प्रदेश में अधिकांश जन्म प्रमाणपत्र गांव के लिए जारी हुए। ये प्रमाणपत्र आईडी हैक होने के चंद घंटों में ही जारी कर दिए गए। इसकी भनक भी सचिव संजय गोस्वामी को नहीं लगी।
छानबीन में जुटा प्रशासन
डीपीआरओ कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक आईडी की छानबीन करने पर मालूम चला कि सुबह किसी अज्ञात स्रोत के सहारे सचिव की आईडी हैक हुई। उसके बाद तीन ग्राम पंचायतों के साथ अलग-अलग राज्यों के लिए हजारों फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। यूपी में जो जन्म प्रमाणपत्र बने, उनमें से कई झांसी समेत मध्य प्रदेश के आसपास के गांव के हैं। ऐसे में अब जिनके प्रमाणपत्र बने हैं, उन तक संपर्क करके भी जांच कराई जा रही है। पुलिस मोबाइल नंबरों के सहारे हैकरों के कंप्यूटरों आईपी एड्रेस का पता लगाने की कोशिश कर रही है। फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का कई विभागों में नौकरी समेत शैक्षिक दस्तावेजों में भी इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। झांसी से बने जन्म प्रमाणपत्र कितने साल पुराने बनाए गए, अभी इसका पता नहीं चल सका है।
इनका यह है कहना
इस मामले में डीपीआरओ डा. बाल गोविंद श्रीवास्तव का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव की आईडी साइबर हैकर्स ने हैक कर ली थी। यह कैसे हुआ, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। इसकी छानबीन कराई जा रही है। पुलिस को भी सूचना दी गई है। पुलिस भी मामले की छानबीन कर रही है।
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि जनपद में पहली बार आईडी हैक कर सीआरएस पोर्टल से फर्जी ढंग से जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का मामला सामने आया है। मामला सामने आने के बाद सभी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए।
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आईडी हैक होने के कई घंटे तक नहीं लग सकी भनक
ऑनलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण का पूरा ब्योरा सीआरएस पोर्टल (नागरिक पंजीकरण प्रणाली) पर दर्ज होता है। ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत सचिव इनकी फीडिंग करते हैं। हर ग्राम पंचायत के लिए आईडी अलग होती है। 9 सितंबर को बड़ागांव ब्लॉक के सचिव संजय गोस्वामी की दिगारा, वनगुवां एवं कोलवा ग्राम पंचायत की आईडी में सेंध लगाकर जालसाजों ने उसे हैक लिया। अब यह मामला सामने आया है। उस दौरान कई घंटे तक सचिव को इसकी भनक तक नहीं लग सकी।
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जांच में फर्जी प्रमाण पत्र का पता चला
सचिव संजय गोस्वामी का कहना है कि सुबह करीब 10:14 बजे मोबाइल पर फोन करके एक अंजान व्यक्ति ने आईडी हैक होने की बात बताई। यह सुनते ही उन्होंने अपनी आईडी चेक की। उसमें उनकी मेल आईडी की जगह दूसरी आईडी दिख रही थी। यह देखते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत डीपीआरओ को सूचना दी। उसके बाद लॉग आउट कर दिया गया। तब तक इन तीनों ग्राम पंचायतों से कुल 2415 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी कर लिए गए थे। आईडी हैक होने से अफसरों के हाथ पांव फूल गए। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) को भी इसकी सूचना दी गई। आला अफसरों के जांच कराने पर उस दौरान जारी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र की सीरीज का पता चला।
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चंद मिनटों में जारी किए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र
साइबर जालसाजों ने आईडी हैक करके झांसी से ही यूपी समेत आठ राज्यों के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र बना डाले। इसके पहले रायबरेली, उन्नाव, अलीगढ़ में भी सीआरएस पोर्टल में सेंधमारी करके फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। इसके यहां उजागर होने पर झांसी से भी फर्जीवाड़े के तार जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। अभी तक की जांच में यह सामने आया कि इस दौरान यूपी समेत बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, झारखंड, छत्तीसगढ़ के लोगों के जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए। उत्तर प्रदेश में अधिकांश जन्म प्रमाणपत्र गांव के लिए जारी हुए। ये प्रमाणपत्र आईडी हैक होने के चंद घंटों में ही जारी कर दिए गए। इसकी भनक भी सचिव संजय गोस्वामी को नहीं लगी।
छानबीन में जुटा प्रशासन
डीपीआरओ कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक आईडी की छानबीन करने पर मालूम चला कि सुबह किसी अज्ञात स्रोत के सहारे सचिव की आईडी हैक हुई। उसके बाद तीन ग्राम पंचायतों के साथ अलग-अलग राज्यों के लिए हजारों फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। यूपी में जो जन्म प्रमाणपत्र बने, उनमें से कई झांसी समेत मध्य प्रदेश के आसपास के गांव के हैं। ऐसे में अब जिनके प्रमाणपत्र बने हैं, उन तक संपर्क करके भी जांच कराई जा रही है। पुलिस मोबाइल नंबरों के सहारे हैकरों के कंप्यूटरों आईपी एड्रेस का पता लगाने की कोशिश कर रही है। फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का कई विभागों में नौकरी समेत शैक्षिक दस्तावेजों में भी इस्तेमाल किए जाने की आशंका है। झांसी से बने जन्म प्रमाणपत्र कितने साल पुराने बनाए गए, अभी इसका पता नहीं चल सका है।
इनका यह है कहना
इस मामले में डीपीआरओ डा. बाल गोविंद श्रीवास्तव का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव की आईडी साइबर हैकर्स ने हैक कर ली थी। यह कैसे हुआ, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। इसकी छानबीन कराई जा रही है। पुलिस को भी सूचना दी गई है। पुलिस भी मामले की छानबीन कर रही है।
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि जनपद में पहली बार आईडी हैक कर सीआरएस पोर्टल से फर्जी ढंग से जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का मामला सामने आया है। मामला सामने आने के बाद सभी फर्जी जन्म प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए।