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गरियागांव की 25 हजार आबादी हैंडपंप के भरोसे
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झांसी। वार्ड नंबर 15 गरियागांव महानगर का हिस्सा होने के बाद भी पानी की समस्या से जूझ रहा है। यहां पर पाइपलाइन तो डाल दी गई है, लेकिन टंकी का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। इस कारण नलों की सुविधा नहीं है। इसलिए एकमात्र सहारा हैंडपंप ही हैं। गर्मियों में हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला गया है, जिससे लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
गरियागांव की आबादी लगभग 25 हजार है। प्रेमनगर से जुड़े क्षेत्र में ज्यादा विकास नहीं हो सका है। भूमिगत जल के लिहाज से यह क्षेत्र ड्राई है। यहां पर बोरिंग सफल नहीं है, यही कारण है कि चुनिंदा हैंडपंप लगे हैं। एक स्थान पर तो तीन हैंडपंप आसपास लगे हैं, लेकिन इनमें से पानी केवल एक हैंडपंप से मिलता है। पानी के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। पेयजल महायोजना के अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। पाइपलाइन पूरे क्षेत्र में डाली जा चुकी है। पाइप लाइन से कनेक्शन भी हो गए हैं, लेकिन बिना टंकी के निर्माण के पानी की सप्लाई संभव नहीं है। क्षेत्र में पानी के टैंकर नहीं आते हैं। जो आते हैं, उनसे पूरे क्षेत्र की आपूर्ति संभव नहीं है। इस कारण यहां के लोग हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर हैं।
सड़क जर्जर, शौचालय में ताला
गरियागांव में सड़कें भी जर्जर हैं। पहले सड़कों पर एपेक्स लगाया गया, लेकिन पानी की पाइप लाइन डाले जाने के कारण एपेक्स उखड़ गए, इस कारण सड़कें ऊबड़- खाबड़ हो गई हैं। यहां दो साल पहले स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने शौचालय में ताला पड़ा रहता है। लोग बताते हैं कि कई बार नगर निगम से शौचालय शुरू करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन निगम पानी की कमी बताकर इसे शुरू नहीं कर रहा है।
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पानी का एकमात्र सहारा हैंडपंप ही हैं। यहां कुएं हैं, लेकिन अब उनका उपयोग बंद हो गया है। घरों में बोरिंग है, लेकिन जलस्तर नीचे चले जाने के कारण बोरिंग से पानी नहीं आता है। गर्मियों में पानी की दिक्कत होती है।
- लोकेश
पहूंज नदी यहां से तीन किलोमीटर दूर है। बरसात के बाद यहां के हैंडपंपों में खूब पानी आता है, लेकिन गर्मियों में भारी दिक्कत होती है। यही कारण है कि हैंडपंप पर पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठी होती है।
- गोलू
सुबह से ही हैंडपंप की खटर- पटर शुरू हो जाती है। टंकी बनने का इंतजार किया जा रहा है। टंकी बन जाने से यहां के लोगों को पानी की सुविधा हो जाएगी। टंकी का इंतजार करते- करते बहुत समय बीत गया है।
- डालचंद्र अहिरवार
यहां पार्क तो बन गया है, लेकिन अभी पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। जब तक पानी की सुविधा शुरू नहीं होगी, तब तक क्षेत्र का विकास नहीं होता है। कोई बाहरी व्यक्ति यहां रहने से हिचकिचाता हैै।
- अनुज
न तो पानी की सुविधा है और न शौचालय की। दो साल से शौचालय बंद पड़ा है। अधिकारी कहते हैं खुले में शौच मत जाओ, लेकिन शौचालय बंद है तो बताओ कि शौच के लिए कहां जाएं। टंकी का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए
- विमला
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गरियागांव की आबादी लगभग 25 हजार है। प्रेमनगर से जुड़े क्षेत्र में ज्यादा विकास नहीं हो सका है। भूमिगत जल के लिहाज से यह क्षेत्र ड्राई है। यहां पर बोरिंग सफल नहीं है, यही कारण है कि चुनिंदा हैंडपंप लगे हैं। एक स्थान पर तो तीन हैंडपंप आसपास लगे हैं, लेकिन इनमें से पानी केवल एक हैंडपंप से मिलता है। पानी के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। पेयजल महायोजना के अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण किया जा रहा है। पाइपलाइन पूरे क्षेत्र में डाली जा चुकी है। पाइप लाइन से कनेक्शन भी हो गए हैं, लेकिन बिना टंकी के निर्माण के पानी की सप्लाई संभव नहीं है। क्षेत्र में पानी के टैंकर नहीं आते हैं। जो आते हैं, उनसे पूरे क्षेत्र की आपूर्ति संभव नहीं है। इस कारण यहां के लोग हैंडपंप से पानी भरने को मजबूर हैं।
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सड़क जर्जर, शौचालय में ताला
गरियागांव में सड़कें भी जर्जर हैं। पहले सड़कों पर एपेक्स लगाया गया, लेकिन पानी की पाइप लाइन डाले जाने के कारण एपेक्स उखड़ गए, इस कारण सड़कें ऊबड़- खाबड़ हो गई हैं। यहां दो साल पहले स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने शौचालय में ताला पड़ा रहता है। लोग बताते हैं कि कई बार नगर निगम से शौचालय शुरू करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन निगम पानी की कमी बताकर इसे शुरू नहीं कर रहा है।
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पानी का एकमात्र सहारा हैंडपंप ही हैं। यहां कुएं हैं, लेकिन अब उनका उपयोग बंद हो गया है। घरों में बोरिंग है, लेकिन जलस्तर नीचे चले जाने के कारण बोरिंग से पानी नहीं आता है। गर्मियों में पानी की दिक्कत होती है।
- लोकेश
पहूंज नदी यहां से तीन किलोमीटर दूर है। बरसात के बाद यहां के हैंडपंपों में खूब पानी आता है, लेकिन गर्मियों में भारी दिक्कत होती है। यही कारण है कि हैंडपंप पर पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठी होती है।
- गोलू
सुबह से ही हैंडपंप की खटर- पटर शुरू हो जाती है। टंकी बनने का इंतजार किया जा रहा है। टंकी बन जाने से यहां के लोगों को पानी की सुविधा हो जाएगी। टंकी का इंतजार करते- करते बहुत समय बीत गया है।
- डालचंद्र अहिरवार
यहां पार्क तो बन गया है, लेकिन अभी पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। जब तक पानी की सुविधा शुरू नहीं होगी, तब तक क्षेत्र का विकास नहीं होता है। कोई बाहरी व्यक्ति यहां रहने से हिचकिचाता हैै।
- अनुज
न तो पानी की सुविधा है और न शौचालय की। दो साल से शौचालय बंद पड़ा है। अधिकारी कहते हैं खुले में शौच मत जाओ, लेकिन शौचालय बंद है तो बताओ कि शौच के लिए कहां जाएं। टंकी का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए
- विमला