{"_id":"58f50f7d4f1c1b0b524706b6","slug":"free-medicines-not-available-in-medical-college","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रही मुफ्त दवाएं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल कॉलेज में नहीं मिल रही मुफ्त दवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Apr 2017 12:24 AM IST
विज्ञापन
medical college jhansi
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में छह महीने से दवाओं का टोटा बना हुआ है, जिससे मरीजों को अस्पताल से मुफ्त दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उन्हें मजबूरी में बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। प्रदेश में नई सरकार के आने के बाद भी अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
मेडिकल कालेज में केवल झांसी के ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं। खासतौर पर यहां गंभीर रोग से पीड़ित मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के इलाज का यह बड़ा सहारा है। यहां प्रतिदिन औसतन चौदह सौ मरीज पहुंचते हैं, जिनमें से लगभग सवा सौ मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है। बावजूद, यह अनदेखी का शिकार है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां सभी मरीजों को सभी दवाएं और जांच नि:शुल्क कराने के लिए एक साल में लगभग दस करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले साल महज डेढ़ करोड़ रुपये ही शासन ने दिए थे, जो अक्तूबर माह में ही खत्म हो गए थे। इसके बाद से मरीजों को यहां नि:शुल्क दवा नहीं मिल पा रही हैं। जैसे-तैसे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ही जरूरी दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए जाते हैं, बाकी मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ती है। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन एक माह बाद भी हालात नहीं बदले हैं। इंसेट
एक सप्ताह की दवाएं लीं उधार
दवाओं के लिए शासन से लगातार बजट की डिमांड की जा रही है। बावजूद, यह जारी नहीं हो पाया है। 19 अप्रैल को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की बैठक होने जा रही है, जिसमें दवाओं के लिए बजट की मांग की जाएगी। दवाओं के लिए पिछले साल दिया गया बजट अक्तूबर में ही खत्म हो गया है। इमरजेंसी के लिए केवल एक सप्ताह की दवाएं ही हैं। यह भी उधार ली गईं हैं।
विज्ञापन
- डा. एनएस सेंगर, प्राचार्य मेडिकल कालेज
शासन के संज्ञान में लाएंगे समस्या
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में है। मेडिकल कालेज में दवाओं की कमी का मामला शासन के संज्ञान में लाया जाएगा। दवाओं के लिए बजट की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके अलावा आने वाले दिनों में मेडिकल कालेज की अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार के लिए काम किया जाएगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
- रवि शर्मा, विधायक
भारी पड़ जाता है खर्च
भले ही मेडिकल कालेज सरकारी है, लेकिन यहां इलाज महंगा पड़ जाता है। शुगर की बीमारी है, अक्सर दिखाने आना पड़ता है। डाक्टर तो फ्री देख लेते हैं, लेकिन दवाइयों का लंबा-चौड़ा पर्चा थमा दिया जाता है, जो बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं। पंद्रह दिन की दवा पर सात-आठ सौ रुपये खर्च हो जाते हैं। दवाओं की भी फ्री व्यवस्था की जानी चाहिए।
- अब्दुल वशीर, सब्जी विक्रेता
उधार लेकर करा रहे इलाज
गांव का एक व्यक्ति दुर्घटना में घायल हो गया था, जो पिछले तेरह दिन से मेडिकल कालेज में भर्ती है। यहां इलाज तो उसका फ्री किया जा रहा है, लेकिन आपरेशन का सामान और दवाओं पर खूब पैसा पैसा खर्च हो रहा है। अब तक बीस हजार रुपये से अधिक का खर्च आ चुका है। उधार लेकर इलाज कराया जा रहा है। गरीबों को मेडिकल का ही सहारा है, लेकिन यहां भी इलाज सस्ता नहीं है।
- परमानंद, राज मिस्त्री
विज्ञापन
मेडिकल कालेज में केवल झांसी के ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों के मरीज भी इलाज के लिए आते हैं। खासतौर पर यहां गंभीर रोग से पीड़ित मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के इलाज का यह बड़ा सहारा है। यहां प्रतिदिन औसतन चौदह सौ मरीज पहुंचते हैं, जिनमें से लगभग सवा सौ मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया जाता है। बावजूद, यह अनदेखी का शिकार है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यहां सभी मरीजों को सभी दवाएं और जांच नि:शुल्क कराने के लिए एक साल में लगभग दस करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है, लेकिन पिछले साल महज डेढ़ करोड़ रुपये ही शासन ने दिए थे, जो अक्तूबर माह में ही खत्म हो गए थे। इसके बाद से मरीजों को यहां नि:शुल्क दवा नहीं मिल पा रही हैं। जैसे-तैसे इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ही जरूरी दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए जाते हैं, बाकी मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ती है। प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन एक माह बाद भी हालात नहीं बदले हैं। इंसेट
विज्ञापन
एक सप्ताह की दवाएं लीं उधार
दवाओं के लिए शासन से लगातार बजट की डिमांड की जा रही है। बावजूद, यह जारी नहीं हो पाया है। 19 अप्रैल को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की बैठक होने जा रही है, जिसमें दवाओं के लिए बजट की मांग की जाएगी। दवाओं के लिए पिछले साल दिया गया बजट अक्तूबर में ही खत्म हो गया है। इमरजेंसी के लिए केवल एक सप्ताह की दवाएं ही हैं। यह भी उधार ली गईं हैं।
विज्ञापन
- डा. एनएस सेंगर, प्राचार्य मेडिकल कालेज
शासन के संज्ञान में लाएंगे समस्या
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में है। मेडिकल कालेज में दवाओं की कमी का मामला शासन के संज्ञान में लाया जाएगा। दवाओं के लिए बजट की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके अलावा आने वाले दिनों में मेडिकल कालेज की अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार के लिए काम किया जाएगा। बुंदेलखंड क्षेत्र के मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी।
- रवि शर्मा, विधायक
भारी पड़ जाता है खर्च
भले ही मेडिकल कालेज सरकारी है, लेकिन यहां इलाज महंगा पड़ जाता है। शुगर की बीमारी है, अक्सर दिखाने आना पड़ता है। डाक्टर तो फ्री देख लेते हैं, लेकिन दवाइयों का लंबा-चौड़ा पर्चा थमा दिया जाता है, जो बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती हैं। पंद्रह दिन की दवा पर सात-आठ सौ रुपये खर्च हो जाते हैं। दवाओं की भी फ्री व्यवस्था की जानी चाहिए।
- अब्दुल वशीर, सब्जी विक्रेता
उधार लेकर करा रहे इलाज
गांव का एक व्यक्ति दुर्घटना में घायल हो गया था, जो पिछले तेरह दिन से मेडिकल कालेज में भर्ती है। यहां इलाज तो उसका फ्री किया जा रहा है, लेकिन आपरेशन का सामान और दवाओं पर खूब पैसा पैसा खर्च हो रहा है। अब तक बीस हजार रुपये से अधिक का खर्च आ चुका है। उधार लेकर इलाज कराया जा रहा है। गरीबों को मेडिकल का ही सहारा है, लेकिन यहां भी इलाज सस्ता नहीं है।
- परमानंद, राज मिस्त्री