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Jhansi News: किले में विराजमान हैं चतुर्भुजी गणेश जी, यहां रानी करतीं थीं पूजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। झांसी का ऐतिहासिक किला 400 वर्ष से अधिक पुराना है। इस किले के उत्तरी दरवाजे पर गणेश मंदिर स्थित है। जिसमें चतुर्भुजी गणेश जी विराजमान हैं। इस मंदिर को तत्कालीन मराठा शासकों ने बनवाया था। जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई रोज पूजा करतीं थीं। यह मंदिर झांसीवासियों के लिए आस्था का केंद्र है।
इतिहासकार मुकुंद मेहरोत्रा ने बताया कि 1842 में राजा गंगाधर राव और महारानी लक्ष्मीबाई की शादी के बाद मराठा शासकों द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर के पीछे से रानी महल जाने के लिए गुप्त रास्ता भी है। जिससे रानी रोज इस मंदिर में गणेश जी की पूजा करने आया करतीं थीं। इसी रास्ते से आते-जाते भगवान गणेश जी के दर्शन करतीं थीं। यहां विराजमान चतुर्भुजी गणेश जी की मूर्ति को किले और शहर के निवासियों का रक्षक माना जाता है।
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झांसी। झांसी का ऐतिहासिक किला 400 वर्ष से अधिक पुराना है। इस किले के उत्तरी दरवाजे पर गणेश मंदिर स्थित है। जिसमें चतुर्भुजी गणेश जी विराजमान हैं। इस मंदिर को तत्कालीन मराठा शासकों ने बनवाया था। जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई रोज पूजा करतीं थीं। यह मंदिर झांसीवासियों के लिए आस्था का केंद्र है।
इतिहासकार मुकुंद मेहरोत्रा ने बताया कि 1842 में राजा गंगाधर राव और महारानी लक्ष्मीबाई की शादी के बाद मराठा शासकों द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया। इस मंदिर के पीछे से रानी महल जाने के लिए गुप्त रास्ता भी है। जिससे रानी रोज इस मंदिर में गणेश जी की पूजा करने आया करतीं थीं। इसी रास्ते से आते-जाते भगवान गणेश जी के दर्शन करतीं थीं। यहां विराजमान चतुर्भुजी गणेश जी की मूर्ति को किले और शहर के निवासियों का रक्षक माना जाता है।
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