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Jhansi News: गिरोह बनाकर अपराध करने पर पांच को चार-चार साल की जेल
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गिरोह बनाकर आपराधिक क्रियाकलापों में लिप्त होने का आरोप सिद्ध होने पर विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) आनंद प्रकाश-तृतीय की अदालत ने पांच अभियुक्तों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा सभी पर अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने 15 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक सूर्यप्रकाश पाठक ने बताया कि सीपरी बाजार थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि वह अपनी टीम के साथ 25 जून 2009 को गश्त कर रहे थे। इसी बीच जानकारी मिली थी कि चांद दरवाजा बाहर निवासी सोनू, चंदा होटल के पीछे निवासी गंगा, शिवाजी नगर निवासी दीपक, चांद दरवाजा बाहर निवासी गोलू उर्फ कुलदीप व अंदर अलीगोल खिड़की निवासी शनि बरार गिरोह बनाकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। गैंग का सरगना सोनू है। इस पर पांचों के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में गिरोहबंद अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना के बाद पुलिस की ओर से आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद पांचों अभियुक्तों को चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्तों को चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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झांसी। गिरोह बनाकर आपराधिक क्रियाकलापों में लिप्त होने का आरोप सिद्ध होने पर विशेष न्यायाधीश (गिरोहबंद अधिनियम) आनंद प्रकाश-तृतीय की अदालत ने पांच अभियुक्तों को चार-चार साल के कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा सभी पर अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने 15 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक सूर्यप्रकाश पाठक ने बताया कि सीपरी बाजार थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष रामचंद्र मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि वह अपनी टीम के साथ 25 जून 2009 को गश्त कर रहे थे। इसी बीच जानकारी मिली थी कि चांद दरवाजा बाहर निवासी सोनू, चंदा होटल के पीछे निवासी गंगा, शिवाजी नगर निवासी दीपक, चांद दरवाजा बाहर निवासी गोलू उर्फ कुलदीप व अंदर अलीगोल खिड़की निवासी शनि बरार गिरोह बनाकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। गैंग का सरगना सोनू है। इस पर पांचों के खिलाफ सीपरी बाजार थाने में गिरोहबंद अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना के बाद पुलिस की ओर से आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। न्यायालय ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद पांचों अभियुक्तों को चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 20-20 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्तों को चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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