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फीकल स्लज प्लांट बना दिखावा, अब भी नालों में बह रही गंदगी

Sun, 13 Sep 2020 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 12:48 AM IST
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Feakal slaj plant in mahanagar
Feakal slaj plant in mahanagar
झांसी। महानगर में नगर निगम ने सेप्टिक टैंकों को साफ करने और मल के निस्तारण के लिए बनाया फीकल स्लज प्लांट महज दिखावा बनकर रह गया है। आलम यह है कि प्लांट के नाम पर हर महीने नगर निगम करीब तीन लाख रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन फिर भी मल नालों और मैदानों में बहा दिया जाता है। प्लांट में मल निस्तारण के लिए न तो कोई उपकरण है और न ही यहां कोई अन्य व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, प्लांट में बने सीमेंट के टैंकों के जरिए मल निस्तारित किया जाता है। जिससे बनने वाली खाद भी निगम के लिए उपयोग की नहीं है। पार्षदों ने फीकल स्लज के नाम पर हो रहे गोलमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।
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नगर निगम ने करीब तीन साल पहले बिजौली में दो करोड़ रुपये की लागत से फीकल स्लज निस्तारण प्लांट तैयार कराया था। नगर निगम की मंशा थी कि प्लांट के जरिए सेप्टिक टैंक से निकलने वाले मल को निस्तारित कर खाद बनाई जाएगी। जिसे निगम इस्तेमाल करेेगा। इसके लिए नगर निगम ने एक प्राइवेट कंपनी को जिम्मा सौंपा। साथ ही, दो सक्शन मशीनें भी खरीदी गईं। मशीनें जब टैंक साफ करने के लिए जाती हैं तो प्रति ट्रिप के हिसाब से 1500 रुपये वसूल किए जाते हैं। साथ ही, हर माह नगर निगम प्लांट संचालन के लिए कंपनी को दो लाख रुपये का भुगतान करता है। लेकिन प्लांट न तो जनता और न ही निगम के लिए उपयोगी साबित हो रहा है।
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आलम यह है कि प्लांट से निकलने वाले मल को नाले में बहा दिया जाता है। वहीं, प्लांट में कोई मशीन ही नहीं लगी है। इसे लेकर पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पार्षद विकास खत्री का कहना है कि पहले तो एक बार में लोगों के यहां टैंक की सफाई के लिए मशीन पहुंचती नहीं हैं। दूसरा टैंकों की सफाई ठीक से नहीं हो पाती। पार्षद महेश गौतम का कहना है कि फीकल स्लज के नाम पर बड़ा गोलमाल किया जा रहा है। प्लांट में बनने वाली खाद का उपयोग नहीं होता। साथ ही, टैंकों की सफाई से होने वाली आय भी नगर निगम को नहीं मिलती। उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच की मांग की है।
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छह किलो लीटर फीकल स्लज होता है निस्तारित
प्लांट की संचालन क्षमता छह किलो लीटर प्रतिदिन है। जबकि महानगर से प्रतिदिन करीब आठ किलो फीकल स्लज निकलता है। ऐसे में कई बार फीकल स्लज को नालों और मैदानों में बहा दिया जाता है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विनीत कुमार का कहना है कि फीकल स्लज निस्तारण के लिए नया प्लांट बनाया जा रहा है। जिसकी क्षमता 12 किलो लीटर प्रतिदिन होगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
20 साल के लिए अनुबंध, डीजल भी निगम का
नगर निगम ने प्लांट के लिए संचालन के लिए इंदौर की कंपनी से 20 साल के लिए अनुबंध किया है। निगम को सक्शन मशीन से होने वाली आय का कोई हिस्सा नहीं मिलता। मशीनों के संचालन के लिए निगम डीजल भी देता है। साथ ही, प्लांट के बिजली का बिल भी निगम ही देता है।

फाइल से गायब हुए दस्तावेज
बताया जाता है कि फीकल स्लज प्लांट के निर्माण के लिए नगर निगम ने निविदा आमंत्रित की थी। पार्षदों ने जब प्लांट की फाइल देखी, तो फाइल में निविदा प्रकाशन के दूसरे आमंत्रण का विज्ञापन मिला। जबकि पहले प्रकाशन का दस्तावेज गायब है।
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