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किसानों के लिए मुश्किल हुई एमएसपी की डगर

Fri, 26 Mar 2021 12:37 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Mar 2021 12:37 AM IST
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Farmer MSP route dangerous
झांसी। एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होनी है लेकिन, नई गेहूं खरीद नीति में कई बदलावों के चलते किसानों की एमएसपी तक की डगर मुश्किल दिखती है। किसानों को ओटीपी से रजिस्ट्रेशन, केंद्र में अंगूठे के निशान लगाने समेत बुवाई का रकबा भी एडीएम से सत्यापित होगा। इसके बाद ही वह सरकारी केंद्रों में गेहूं बेच सकेंगे। प्रकिया के जटिल होने इस बार किसानों की संख्या में कमी आने की आशंका जताई जा रही है।
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नए कृषि कानून लागू होने के बाद से किसान एमएसपी(न्यूनतम समर्थन मूल्य) खत्म कर दिए जाने की आशंका जता रहे हालांकि सरकार इससे इंकार कर रही है लेकिन, नई क्रय नीति में जो प्रावधान किए गए उसके मुताबिक सरकारी केेंद्रों पर गेहूं बेच पाना आसान नहीं दिखता। पिछली बार तक किसानों को सिर्फ ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता था लेकिन, अब किसानों को दो चरणों में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रजिस्ट्रेशन के बाद खरीद केंद्र पर ओटीपी के इस्तेमाल से गेहूं बिक सकेगा। क्रय केंद्रों में पहली बार ई-पॉप (प्वांइट ऑफ परचेज) मशीनों का भी इस्तेमाल होगा। इन मशीनों पर अंगूठे का निशान मैच कराना होगा। अमूमन सामान्य किसानों के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल होता है। सबसे बड़ा पेच बुवाई के रकबे का एडीएम से सत्यापन कराने का नया प्रावधान है। इस नए प्रावधान ने अफसरों को भी उलझा दिया है। बुंदेलखंड में अमूमन जोत बड़ी होती है। ऐसे में अधिकांश किसान इस दायरे में आ रहे। इससे न सिर्फ किसान परेशान होंगे बल्कि सत्यापन का बोझ भी कई गुना अधिक बढ़ जाएगा। इन सारी जटिलताओं को देखते हुए ही अबकी कम किसानों के क्रय केंद्रों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही। बता दें पिछली बार झांसी जनपद में 13228 किसानों ने कुल 73793 मैट्रिक टन गेहूं सरकारी केंद्रों में बेचा था लेकिन, इस बार इसमें कमी आने की आशंका जताई जा रही। अभी पूरे झांसी मंडल में ही सिर्फ 4919 किसानों ने ही पंजीकरण कराया है। खरीद प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी भी दबी जुबान में मानते हैं कि खरीद प्रक्रिया जटिल कर दी गई है। इसका प्रभाव खरीद पर पड़ सकता है।
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72 घंटे के भीतर करना होगा भुगतान
नई क्रय नीति में इस बार भी खरीद के 72 घंटे के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य किया है। प्रावधानों के मुताबिक खरीद एजेंसियों को अधिकतम 72 घंटे में किसानों को आरटीजीएस माध्यम से भुगतान करना होगा। इसके देरी करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। बता दें, धान खरीद के भुगतान में विलंब करने की वजह से गेहूं खरीद से कल्याण निगम, मल्टी स्टेट समिति, एफपीओ को दूर रखा गया है।
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