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स्पेशल स्क्वॉड खत्म, अब अकेले करनी होगी चेकिंग

Tue, 09 May 2017 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 09 May 2017 01:22 AM IST
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Especial sobre elenco, seria verificando agora sozinho
railway station, jhansi news - फोटो : demo
रेलवे ने आय बढ़ाने के लिए स्पेशल चेकिंग में तैनात चार स्क्वॉड टीमों को खत्म कर सभी सदस्यों को अपने हिसाब से अकेले चेकिंग करने में लगा दिया है। स्क्वॉड में लक्ष्य 1.10 लाख प्रतिमाह था, इसे बढ़ाकर अब 2.10 लाख कर दिया गया है। रेलवे ने अपनी आय बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया है।
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रेल मंडल प्रशासन ने प्रतिदिन नब्बे ट्रेनों में चलने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए एम्युनिटी डिटेल लिंक बना रखा है। शताब्दी एक्सप्रेस व वीकली ट्रेनों के लिए अलग-अलग टीमें हैं। इसके अलावा चार स्पेशल स्क्वॉड में 24 कर्मचारी और ओपेन डिटेल में 22 कर्मचार तैनात हैं। स्पेशल स्क्वॉड रेल प्रशासन के आदेश पर काम करता है। रेल प्रशासन स्पेशल स्क्वॉड की मदद से किसी भी स्टेशन पर या ट्रेनों को रोककर चेकिंग करा सकता है। प्रशासन ने स्क्वॉड में तैनात कर्मचारी को 1.10 लाख और ओपेन डिटेल कर्मचारियों को 2.10 लाख कम से कम मासिक राजस्व एकत्रित करने का लक्ष्य दे रखा है। गर्मियों के महीनों में ओपेन डिटेल का लक्ष्य बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दिया जाता है।
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सोमवार को रेल प्रशासन ने राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से स्पेशल स्क्वॉड की व्यवस्था को खत्म कर इनमें तैनात कर्मचारियों को ओपेन डिटेल में लगा दिया है। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बेहतर कार्य करने के लिए यह प्रशासनिक निर्णय है।
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जरूरत 1385 की, काम कर रहे 490
मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों की संख्या के हिसाब से 1385 टिकट चेकिंग कर्मियाें की आवश्यकता है, जबकि कार्य सिर्फ 490 कर्मी कर रहे हैं। लंबे समय से मंडल में टिकट चेकिंग कर्मचारियों के 957 स्वीकृत पद चल रहे हैं। स्वीकृत पदों के हिसाब से भी 467 कर्मचारी कम हैं।


ट्रेनों में नहीं पर्याप्त स्टाफ
ट्रेनों में स्टाफ की कमी के कारण यात्रियों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है, क्योंकि चौबीस डिब्बों की ट्रेन में दो या तीन टीटीई ही चलते हैं। नतीजतन, अधिकांश ट्रेनों में वन प्लस टू या थ्री का स्टाफ चल रहा है। नियम के हिसाब से एक टीटीई को तीन स्लीपर या पांच एसी कोच एक साथ देखने पड़ते हैं। जबकि, तीन स्लीपर कोच एक टीटीई के पास होने के हिसाब से टीम में कम से कम वन प्लस फाइव या सिक्स का स्टाफ होना चाहिए। इससे बेटिकट यात्रियों को पकड़ने का अभियान प्रभावित होने से राजस्व की क्षति तो हो ही रही है, यात्रियों को भी परेशानी होती है। मंडल प्रशासन किसी तरह काम चला रहा है।

यात्रियों को ये होती हैं दिक्कतें
- कोई समस्या आने पर ट्रेेन में टीटीई को तलाशना मुश्किल होता है।
- खासकर रात के समय बर्थ को लेकर विवाद होने पर सुलझाने वाला कोई नहीं होता है।
- चलती ट्रेन में यात्रियों को मदद नहीं मिल पाती है।
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