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सरकार का उत्पादन निगम में बढ़ा विश्वास
ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2015 01:19 AM IST
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झांसी। प्रदेश सरकार ने पांच वर्ष पूर्व उत्पादन निगम को दो हजार मेगावाट की नई इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य दिया था, जिसके सापेक्ष पंद्रह सौ मेगावाट की इकाइयां स्थापित कर उनसे बिजली बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इससे सरकार का उत्पादन निगम पर विश्वास बढ़ा है। यह जानकारी अखिल भारतीय बिजली इंजीनियर महासंघ के उपाध्यक्ष व विद्युत अभियंता संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष इंजी. आरके सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि सरकार ने निजी कंपनियों से दिसंबर 2010 में चौदह हजार मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का करार किया था, जिसके सापेक्ष केवल ललितपुर बजाज पावर प्लांट में 660 मेगावाट की एक इकाई से उत्पादन शुरू हो सका है। इस कारण सरकार का उत्पादन निगम पर विश्वास बढ़ा है, और पांच हजार मेगावाट की नई इकाइयां स्थापित करने का नया लक्ष्य दिया गया है।
यह इकाइयां अगले चार वर्ष में स्थापित कर ली जाएंगी। इस समय प्रदेश में 12 से 13 हजार मेगावाट बिजली की मांग है। हर साल दस प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ जाती है। जबकि, प्रदेश में सिर्फ पांच हजार मेगावाट बिजली बनाने की उत्पादन इकाइयां स्थापित हैं। उसमें भी आम दिनों में साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली ही बन पा रही है। सरकार को बाकी बिजली का इंतजाम दूसरे राज्यों व अन्य स्रोतों से करना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग में कर्मचारियों की कमी से प्रदेश में बिजली की स्थिति बदहाल है। प्रदेश में वर्ष 2000 में 40 लाख उपभोक्ता व एक लाख अधिकारी व कर्मचारी थे, जबकि वर्तमान में एक करोड़ 66 लाख उपभोक्ता व 34 हजार अफसर व कर्मी है। विभाग में 66 हजार पद खाली हैं, जिन्हें सरकार को शीघ्र भरना चाहिए।
वर्तमान में जो भर्तियां हो रही हैं, उनसे संघ असंतुष्ट है। उन्होंने कहा कि विद्युत चेकिंग के दौरान जिस तरह से अधिकारी व कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं। इन्हें देखते हुए सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। चिकित्सकों की तरह इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट बनना चाहिए। इस मौके पर क्षेत्रीय सचिव वाईएस राघव भी उपस्थित रहे।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने निजी कंपनियों से दिसंबर 2010 में चौदह हजार मेगावाट बिजली उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का करार किया था, जिसके सापेक्ष केवल ललितपुर बजाज पावर प्लांट में 660 मेगावाट की एक इकाई से उत्पादन शुरू हो सका है। इस कारण सरकार का उत्पादन निगम पर विश्वास बढ़ा है, और पांच हजार मेगावाट की नई इकाइयां स्थापित करने का नया लक्ष्य दिया गया है।
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यह इकाइयां अगले चार वर्ष में स्थापित कर ली जाएंगी। इस समय प्रदेश में 12 से 13 हजार मेगावाट बिजली की मांग है। हर साल दस प्रतिशत बिजली की मांग बढ़ जाती है। जबकि, प्रदेश में सिर्फ पांच हजार मेगावाट बिजली बनाने की उत्पादन इकाइयां स्थापित हैं। उसमें भी आम दिनों में साढ़े तीन हजार मेगावाट बिजली ही बन पा रही है। सरकार को बाकी बिजली का इंतजाम दूसरे राज्यों व अन्य स्रोतों से करना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि विद्युत विभाग में कर्मचारियों की कमी से प्रदेश में बिजली की स्थिति बदहाल है। प्रदेश में वर्ष 2000 में 40 लाख उपभोक्ता व एक लाख अधिकारी व कर्मचारी थे, जबकि वर्तमान में एक करोड़ 66 लाख उपभोक्ता व 34 हजार अफसर व कर्मी है। विभाग में 66 हजार पद खाली हैं, जिन्हें सरकार को शीघ्र भरना चाहिए।
वर्तमान में जो भर्तियां हो रही हैं, उनसे संघ असंतुष्ट है। उन्होंने कहा कि विद्युत चेकिंग के दौरान जिस तरह से अधिकारी व कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं। इन्हें देखते हुए सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। चिकित्सकों की तरह इंजीनियर प्रोटेक्शन एक्ट बनना चाहिए। इस मौके पर क्षेत्रीय सचिव वाईएस राघव भी उपस्थित रहे।