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एल्युमिनाई मीट का ‘फ्लॉप शो’
ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2015 01:01 AM IST
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में स्थापना के बाद दूसरी बार आयोजित हुई एल्युमिनाई मीट फ्लॉप हो गई। कार्यक्रम में हाथों की उंगलियों पर गिनने लायक पुरातन छात्र पहुंचे। कई विभागों ने भी एल्युमिनाई मीट से दूरी बना ली है।
बीयूआईसी में हुए कार्यक्रम में काफी संख्या में खासकर विदेशों से पुरातन छात्र आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में पुरातन छात्रों से ज्यादा तो विश्वविद्यालय के शिक्षक नजर आए।
हाल यह रहा कि कार्यक्रम में कई कुर्सियां और सोफे खाली पड़े रहे। इसके अलावा एल्युमिनाई मीट में कुछ ही विभागों के शिक्षकों ने शिरकत की। कई विभागों की अनुपस्थिति से एक बार फिर गुटबाजी को हवा मिल गई। भीड़ न जुटा पाने को लेकर जब कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों से बात की गई तो पता चला कि नैक टीम के निरीक्षण से पूर्व एल्युमिनाई मीट का आयोजन होना जरूरी था।
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इसलिए आनन-फानन बीते पांच नवंबर को हुई कार्य परिषद की बैठक में इसका अनुमोदन किया गया। अब आगे से दीक्षांत समारोह की तरह ही एल्युमिनाई मीट की तिथि घोषित की जाएगी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष तय तारीक पर ही यह मीट आयोजित होगी।
छेड़े फिल्मी तराने, याद किए गुजरे जमाने
पुरातन छात्रों ने पसंदीदा फिल्मी तराने छेड़े और विश्वविद्यालय में गुजारे गए दिनों को याद किया। इस दौरान प्रो. वीपी खरे ने ‘ये शाम मस्तानी’, डॉ. एमएम सिंह ने ‘चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था’ गीत गाकर वाहवाही बटोरी। प्रो. वीके सहगल ने ‘रोते हुए आते हैं सब’ और डॉ. प्रतीक अग्रवाल ने ‘ओ मेरे दिल के चैन’ गीत पेश किया।
फिरोज खान ने भी कई गीत गाए। समागम में आए पुरातन छात्रों ने आगे होने वाले समागम की तिथि भी आज ही घोषित करने पर बल दिया। बाद में प्रति कुलपति प्रो. पंकज अत्री ने सभी को स्मृति चिह्न भेंट किए।
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बीयूआईसी में हुए कार्यक्रम में काफी संख्या में खासकर विदेशों से पुरातन छात्र आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे से शुरू हुए कार्यक्रम में पुरातन छात्रों से ज्यादा तो विश्वविद्यालय के शिक्षक नजर आए।
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हाल यह रहा कि कार्यक्रम में कई कुर्सियां और सोफे खाली पड़े रहे। इसके अलावा एल्युमिनाई मीट में कुछ ही विभागों के शिक्षकों ने शिरकत की। कई विभागों की अनुपस्थिति से एक बार फिर गुटबाजी को हवा मिल गई। भीड़ न जुटा पाने को लेकर जब कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों से बात की गई तो पता चला कि नैक टीम के निरीक्षण से पूर्व एल्युमिनाई मीट का आयोजन होना जरूरी था।
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इसलिए आनन-फानन बीते पांच नवंबर को हुई कार्य परिषद की बैठक में इसका अनुमोदन किया गया। अब आगे से दीक्षांत समारोह की तरह ही एल्युमिनाई मीट की तिथि घोषित की जाएगी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष तय तारीक पर ही यह मीट आयोजित होगी।
छेड़े फिल्मी तराने, याद किए गुजरे जमाने
पुरातन छात्रों ने पसंदीदा फिल्मी तराने छेड़े और विश्वविद्यालय में गुजारे गए दिनों को याद किया। इस दौरान प्रो. वीपी खरे ने ‘ये शाम मस्तानी’, डॉ. एमएम सिंह ने ‘चांद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था’ गीत गाकर वाहवाही बटोरी। प्रो. वीके सहगल ने ‘रोते हुए आते हैं सब’ और डॉ. प्रतीक अग्रवाल ने ‘ओ मेरे दिल के चैन’ गीत पेश किया।
फिरोज खान ने भी कई गीत गाए। समागम में आए पुरातन छात्रों ने आगे होने वाले समागम की तिथि भी आज ही घोषित करने पर बल दिया। बाद में प्रति कुलपति प्रो. पंकज अत्री ने सभी को स्मृति चिह्न भेंट किए।