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घूमने की जगह घरों और मस्जिदों में करे अल्लाह की इबादत
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झांसी। 28 मार्च को महानगर में शब-ए-बरात का पर्व मनाया जाएगा। इसी रात को होलिका दहन भी होगा। दोनों ही पर्व में किसी भी तरह का खलल नहीं पड़े, इसको लेकर शहर के आलिमों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों से घरों और मस्जिदों में ही इबादत करने की अपील की है।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14 तारीख को सूरज डूबने के बाद से ही शब-ए-बरात का समय शुरू होता है। इस रात को मुस्लिम अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं। इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस रात को अल्लाह की इबादत करने और तौबा करने से गुनाहों की भी माफी होती है। जिसके चलते लोग घरों, मस्जिदों और शहर के कब्रिस्तानों में दुआ करते हैं। वहीं, कुछ युवा सड़कों पर तेज रफ्तार में बाइक चलाते फिरते हैं। ऐसे में होली पर्व पर खलल न पडे़, इसको लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुस्लिम समाज के लोगों से घरों व मस्जिदों में ही इबादत करने की अपील की है।
शब-ए-बरात की रात इबादत करना अफजल है। सड़कों पर घूमने फिरने से इस रात का मकसद ही खत्म हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अल्लाह को राजी करें। मुफ्ती साबिर कासमी, धर्मगुरु।
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साल भर के लंबे इंतजार के बाद यह रात नसीब होती है। इस रात को घरों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों में इबादत कर ही गुजारे। नौजवान सड़कों पर घूमने से परहेज करें। मौलाना हाशिम, धर्मगुरु।
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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने की 14 तारीख को सूरज डूबने के बाद से ही शब-ए-बरात का समय शुरू होता है। इस रात को मुस्लिम अपने बुजुर्गों की मगफिरत की दुआ करते हैं। इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस रात को अल्लाह की इबादत करने और तौबा करने से गुनाहों की भी माफी होती है। जिसके चलते लोग घरों, मस्जिदों और शहर के कब्रिस्तानों में दुआ करते हैं। वहीं, कुछ युवा सड़कों पर तेज रफ्तार में बाइक चलाते फिरते हैं। ऐसे में होली पर्व पर खलल न पडे़, इसको लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुस्लिम समाज के लोगों से घरों व मस्जिदों में ही इबादत करने की अपील की है।
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शब-ए-बरात की रात इबादत करना अफजल है। सड़कों पर घूमने फिरने से इस रात का मकसद ही खत्म हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अल्लाह को राजी करें। मुफ्ती साबिर कासमी, धर्मगुरु।
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साल भर के लंबे इंतजार के बाद यह रात नसीब होती है। इस रात को घरों, मस्जिदों और कब्रिस्तानों में इबादत कर ही गुजारे। नौजवान सड़कों पर घूमने से परहेज करें। मौलाना हाशिम, धर्मगुरु।