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सिर्फ 18 हजार कमाता ‘सफेद हाथी’

Mon, 04 Apr 2016 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 04 Apr 2016 12:23 AM IST
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Earns only 18 thousand "white elephant"
bu, jhansi hindi news - फोटो : demopic
झांसी। पुरानी कहावत है हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और। कुछ यही हाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इनोवेशन सेंटर का है। शोध कार्य के लिए बनाए गए सेंटर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उपकरण भले ही शोभा बढ़ा रहे हों, लेकिन इसे बनाने का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हुए सेंटर की कमाई चंद हजार रुपये है। अधिकारियों की सुस्ती व ठोस योजना न बनने से सेंटर बोझ बनकर रह गया है।
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शोध कार्य को बढ़ावा देने और उससे होने वाली आय को विश्वविद्यालय के लिए इस्तेमाल करने के उद्देश्य से पांच करोड़ से अधिक रुपये की लागत से इनोवेशन सेंटर का निर्माण हुआ था। इसकी नींव तो कुछ अच्छा करने को पड़ी थी लेकिन ठोस योजना न बनने के कारण यह अपने उद्देश्य से भटक गया है। विश्वविद्यालय में ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गए इनोवेशन सेंटर के ऊपर सालाना 20 से 20 लाख रुपये खर्च होते हैं। जबकि, इसकी सालाना कमाई महज 18 हजार रुपये ही है। इसका खुलासा वित्त विभाग द्वारा सेंटर प्रभारी से आय व्यय का ब्योरा मांगने पर हुआ है। वित्त विभाग ने प्रभारी को सेंटर में उपलब्ध उपकरणों के आधार पर उनसे होने वाली जांचों का विवरण प्रस्तावित शुल्क सहित तीन दिवस में देने को कहा था। इसके साथ ही अब तक उक्त इनोवेशन सेंटर से कितनी धनराशि विश्वविद्यालय में जमा कराई गई, इसका भी विवरण मांगा था। इसके जवाब में जो हकीकत सामने आई उसे न तो निगलते बना, न उगलते।
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अभी तक नहीं लिया एनएबीएल सर्टिफिकेट
इनोवेशन सेंटर को बने करीब दो साल होने वाले हैं, लेकिन इसके कर्ताधर्ताओं ने अभी तक एनएबीएस सर्टिफिकेट नहीं लिया है। इस कारण बाहर से कोई आकर शोध कार्य नहीं कर पा रहा है। इसी कारण सेंटर से आय अर्जित नहीं हो रही है।
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- वरिष्ठ अधिकारियोें के साथ बैठक कर सेंटर के लिए जल्द ही ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी। कोशिश रहेगी कि बाहर से क्लाइंट लाकर आय अर्जित की जाए।
- धर्मपाल, वित्त अधिकारी
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