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‘क्यू’ में लगने की जगह ई टिकट को तरजीह

Fri, 29 Oct 2021 12:54 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Oct 2021 12:54 AM IST
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E-ticket is preferred over 'Q'
झांसी। कोरोना काल में यात्री ई- टिकट बुकिंग को अधिक तरजीह दे रहे हैं। इस कारण रेलवे स्टेशनों पर स्थित आरक्षण काउंटर से रिजर्वेशन कराने वालों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है।
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कोरोना काल में यात्रियों को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम द्वारा ट्रेन में आरक्षण के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध कराई जा रही ई- टिकट प्रणाली को अधिक रास आ रही है। यही कारण है कि खिड़कियों पर आरक्षण कराने वालों की संख्या बढ़ने की जगह घट रही है। कम से कम रेलवे के आंकड़े तो यही बता रहे हैं। झांसी स्टेशन के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों की तुलना में खिड़की से आरक्षण कराने वाले यात्रियों की संख्या में हर माह औसतन पांच हजार की कमी दर्ज की जा रही है।
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रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह के मुताबिक इस दौर में यात्री बुकिंग काउंटर पर ‘क्यू’ में लगने की जगह ई- टिकट बुकिंग को अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे यात्रियों का न केवल समय बच रहा है, बल्कि घर या कार्यालय से दूर स्थित रेलवे के काउंटरों तक पहुंचने की जहमत भी नहीं उठानी पड़ती है।
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ई टिकट में नहीं मिलतीं ये सुविधाएं
- ई टिकट पर कन्फर्म या आरएसी टिकट पर ही यात्रा की जा सकती है। वेटिंग टिकट पर यात्रा करने पर यात्री को बिना टिकट माना जाता है, जबकि रेलवे काउंटर से टिकट बनवाने पर इस समस्या से बचा जा सकता है।
- ई टिकट में लिंक टिकट का प्रावधान नहीं है। ब्रेक जर्नी के लिए भी अलग- अलग टिकट बनवाने पड़ते हैं।
- ई टिकट को प्रिंटर से टिकट निकालने की जरूरत नहीं है, बल्कि टीटीई के पूछने पर मोबाइल, लैपटाप अथवा पॉमटॉप पर बुक्ड टिकट दिखाने पर इसे प्रिंटेड टिकट की तरह स्वीकार किया जाता है। हालांकि, इसमें एक परेशानी सामने आती है कि अगर यात्रा के दौरान यात्री का मोबाइल या लैपटॉप डिस्चार्ज हो जाए और टिकट स्क्रीन पर नहीं दिखा सके तो यात्री को बिना टिकट मान लिया जाता है।

- यात्रा से पहले टिकट कन्फर्म नहीं होने पर धनराशि की वापसी रेलवे ईडीआर (एक्सेप्सनल डाटा रिपोर्ट) सिस्टम से करता है। धनराशि वापसी में अधिकतम तीस दिन का समय लग सकता है।
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