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जिला कार्यकारिणी भंग होने से सपा में खलबली
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 27 Jul 2016 12:48 AM IST
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sapa, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद समाजवादी पार्टी में खलबली मची हुई है। जिलाध्यक्ष पद के लिए गोटें फिट की जाने लगी हैं। इसके लिए लखनऊ में बैठे नेताओं से भी संपर्क शुरू कर दिया गया है। हालांकि, इस मसले पर पार्टी ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। लेकिन, यह तय है कि जिलाध्यक्ष के मनोनयन में विधानसभा प्रत्याशियों की राय को प्राथमिकता से लिया जाएगा।
विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी पार्टी तैयारियों में जुटी हुई हैं। लेकिन, समाजवादी पार्टी अभी अपनों के बीच ही उलझी हुई है। बबीना व झांसी विधानसभा के टिकट घोषित होेने के बाद से समाजवादी पार्टी में शुरू हुई रार थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रत्याशियों के खिलाफ पार्टी के लोगों का पहले सड़क पर प्रदर्शन, सर्किट हाउस में पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में मारपीट और फिर नेताओं पर मुकदमे। पिछले एक माह में पार्टी की केवल यही गतिविधियां रहीं हैं।
इसी का नतीजा रहा कि बीते रोज प्रदेश अध्यक्ष ने न केवल सपा की जिले की मेन बॉडी, बल्कि अन्य सभी चौदह प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी भी भंग कर दी। इससे पार्टी की स्थानीय राजनीति में खलबली मची हुई है। इसके साथ ही जिले में पार्टी का मुखिया बनने के लिए गोटें फिट की जाने लगी हैं। नेता अपने खेमे के आदमी को इस पद पर बैठाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने लखनऊ में भी हलचल तेज कर दी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बार जिलाध्यक्ष पद पर के लिए सबसे पहले जिले की चारों विधानसभाओं के प्रत्याशियों का पक्ष जाना जाएगा। इसके बाद स्थानीय नेताओं की सहमति से नाम तय किया जाएगा। इसी सप्ताह रिक्त पद पर तैनाती कर दी जाएगी।
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तीसरी बार संत को सौंपी जा सकती है कमान
सपा के सबसे पहले जिलाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा रहे। उन्होंने 1992 में सपा की स्थापना से 1998 तक जिले की कमान संभाली। हालांकि, अब वह बसपा में हैं। उनके बाद सपा ने दीपनारायण सिंह यादव को जिलाध्यक्ष बनाया। वह लगभग तीन साल तक पद पर रहे। इसके बाद 2006 तक जिले में पार्टी की कमान संत सिंह के हाथ रही। उनके बाद सुदेश पटेल को अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन, 2011 में एक बार फिर संत सिंह को कमान सौंपी गई।
पार्टी ने फरवरी 2014 में एक बार फिर सुदेश को मौका दिया। वह बीते रोज तक पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे। अब एक बार फिर संत सिंह के नाम की चर्चाएं जोरों पर हैं। उन्होंने भी इससे इंकार नहीं किया। वह भी पार्टी की जिम्मेदारी लेने का तैयार हैं। इसके अलावा काबीना मंत्री शिवपाल सिंह के करीबी माने जाने वाले जिला महासचिव अर्जुन सिंह का नाम भी चर्चाओं में है। वहीं, पार्टी के पूर्व महासचिव अलाउद्दीन कुरैशी ने प्रदेश अध्यक्ष से अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाने की मांग की है। उन्होंने अपना नाम प्रस्तावित किया है।
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विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। सभी पार्टी तैयारियों में जुटी हुई हैं। लेकिन, समाजवादी पार्टी अभी अपनों के बीच ही उलझी हुई है। बबीना व झांसी विधानसभा के टिकट घोषित होेने के बाद से समाजवादी पार्टी में शुरू हुई रार थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रत्याशियों के खिलाफ पार्टी के लोगों का पहले सड़क पर प्रदर्शन, सर्किट हाउस में पार्टी पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में मारपीट और फिर नेताओं पर मुकदमे। पिछले एक माह में पार्टी की केवल यही गतिविधियां रहीं हैं।
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इसी का नतीजा रहा कि बीते रोज प्रदेश अध्यक्ष ने न केवल सपा की जिले की मेन बॉडी, बल्कि अन्य सभी चौदह प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी भी भंग कर दी। इससे पार्टी की स्थानीय राजनीति में खलबली मची हुई है। इसके साथ ही जिले में पार्टी का मुखिया बनने के लिए गोटें फिट की जाने लगी हैं। नेता अपने खेमे के आदमी को इस पद पर बैठाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने लखनऊ में भी हलचल तेज कर दी हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार इस बार जिलाध्यक्ष पद पर के लिए सबसे पहले जिले की चारों विधानसभाओं के प्रत्याशियों का पक्ष जाना जाएगा। इसके बाद स्थानीय नेताओं की सहमति से नाम तय किया जाएगा। इसी सप्ताह रिक्त पद पर तैनाती कर दी जाएगी।
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तीसरी बार संत को सौंपी जा सकती है कमान
सपा के सबसे पहले जिलाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा रहे। उन्होंने 1992 में सपा की स्थापना से 1998 तक जिले की कमान संभाली। हालांकि, अब वह बसपा में हैं। उनके बाद सपा ने दीपनारायण सिंह यादव को जिलाध्यक्ष बनाया। वह लगभग तीन साल तक पद पर रहे। इसके बाद 2006 तक जिले में पार्टी की कमान संत सिंह के हाथ रही। उनके बाद सुदेश पटेल को अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन, 2011 में एक बार फिर संत सिंह को कमान सौंपी गई।
पार्टी ने फरवरी 2014 में एक बार फिर सुदेश को मौका दिया। वह बीते रोज तक पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे। अब एक बार फिर संत सिंह के नाम की चर्चाएं जोरों पर हैं। उन्होंने भी इससे इंकार नहीं किया। वह भी पार्टी की जिम्मेदारी लेने का तैयार हैं। इसके अलावा काबीना मंत्री शिवपाल सिंह के करीबी माने जाने वाले जिला महासचिव अर्जुन सिंह का नाम भी चर्चाओं में है। वहीं, पार्टी के पूर्व महासचिव अलाउद्दीन कुरैशी ने प्रदेश अध्यक्ष से अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाने की मांग की है। उन्होंने अपना नाम प्रस्तावित किया है।