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नर्सिंगहोम ने आयुष्मान रोगी से मांगे तीस हजार
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नर्सिंगहोम ने आयुष्मान रोगी से मांगे तीस हजार
झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के प्रति निजी नर्सिंगहोमों की बेरुखी अभी भी जारी है। शहर में एक और मामला सामने आया है, जिसमें निजी अस्पताल ने आयुष्मान योजना के पात्र रोगी से आंखों का ऑपरेशन करने के एवज में तीस हजार रुपये की मांग की। पीड़ित ने सीएमओ से मामले की शिकायत की है। सीएमओ ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
गरौठा के रामनगर निवासी प्रदीप कुमार अपनी मां शीला देवी की आंख दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज के पास स्थित एक नर्सिंगहोम लेकर गए थे। जांच के बाद डॉक्टर ने आंख का ऑपरेशन कराने को कहा। प्रदीप ने खुद को आयुष्मान भारत योजना का पात्र बताते हुए गोल्डन कार्ड दिखाया। प्रदीप का कहना है कि डॉक्टर ने गोल्डन कार्ड अपने पास रख लिया और कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद फोन करके बुलाएंगे। इस पर प्रदीप अपनी मां को लेकर वापस घर आ गए। प्रदीप के मुताबिक सोमवार को उनके पास डॉक्टर का फोन आया और मंगलवार को सुबह दस बजे तक नर्सिंगहोम आकर मिलने को कहा। मंगलवार को अस्पताल पहुंचकर अपनी मां को दिखाया तो उनसे 200 रुपये फीस ली गई। डॉक्टर ने जांच करवाने के बाद एक कक्ष में आने को कहा। कक्ष में पहुंचने पर डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन कराने पर तीस हजार रुपये लगेंगे। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं हो पाएगा। इसके बाद वह बिना इलाज कराए ही लौट गए।
पीड़ित का आज ही शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है। योजना के नोडल अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो सीधे नर्सिंगहोम का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। - डॉ. सुशील प्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के प्रति निजी नर्सिंगहोमों की बेरुखी अभी भी जारी है। शहर में एक और मामला सामने आया है, जिसमें निजी अस्पताल ने आयुष्मान योजना के पात्र रोगी से आंखों का ऑपरेशन करने के एवज में तीस हजार रुपये की मांग की। पीड़ित ने सीएमओ से मामले की शिकायत की है। सीएमओ ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
गरौठा के रामनगर निवासी प्रदीप कुमार अपनी मां शीला देवी की आंख दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज के पास स्थित एक नर्सिंगहोम लेकर गए थे। जांच के बाद डॉक्टर ने आंख का ऑपरेशन कराने को कहा। प्रदीप ने खुद को आयुष्मान भारत योजना का पात्र बताते हुए गोल्डन कार्ड दिखाया। प्रदीप का कहना है कि डॉक्टर ने गोल्डन कार्ड अपने पास रख लिया और कहा कि स्वीकृति मिलने के बाद फोन करके बुलाएंगे। इस पर प्रदीप अपनी मां को लेकर वापस घर आ गए। प्रदीप के मुताबिक सोमवार को उनके पास डॉक्टर का फोन आया और मंगलवार को सुबह दस बजे तक नर्सिंगहोम आकर मिलने को कहा। मंगलवार को अस्पताल पहुंचकर अपनी मां को दिखाया तो उनसे 200 रुपये फीस ली गई। डॉक्टर ने जांच करवाने के बाद एक कक्ष में आने को कहा। कक्ष में पहुंचने पर डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन कराने पर तीस हजार रुपये लगेंगे। आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं हो पाएगा। इसके बाद वह बिना इलाज कराए ही लौट गए।
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पीड़ित का आज ही शिकायती पत्र प्राप्त हुआ है। योजना के नोडल अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो सीधे नर्सिंगहोम का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। - डॉ. सुशील प्रकाश, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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