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डाक विभाग को 40 लाख की चपत
jhansi
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:55 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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झांसी। टेली शॉपिंग नेटवर्क चलाने वाले एक व्यक्ति ने डाक विभाग को चालीस लाख रुपये की चपत लगा दी है। डाक विभाग से मिलीं 22 चेकों में ओवरराइटिंग कर उसने फ्राड किया है। उसने बड़ी ही सफाई से चेक में दर्ज हजारों की रकम को लाखों में बदल कर पैसे निकाल लिए है। मामले का खुलासा होने पर डाक विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। आरोपी टेलीशॉपिंग नेटवर्क संचालक नदारद है।
रॉयल टेली शॉपिंग नेटवर्क द्वारा अपने उत्पाद डाक विभाग के वीपीपी (वैल्यू पेअबल पार्सल) के माध्यम से ग्राहकों को तक पहुंचाए जाते हैं। ग्राहकों से मिलने वाली रकम टेली शॉपिंग नेटवर्क संचालक को हेड पोस्ट आफिस से चेक के माध्यम से मिलती है। रॉयल टेली शॉपिंग नेटवर्क फर्म का अकाउंट रानी लक्ष्मीबाई अरबन कोआपरेटिव बैंक में है, जिसमें प्रोपराइटर के रूप में नाम ग्वालियर फ्रेंड्स कालोनी निवासी उमाकांत मिश्रा की पत्नी रक्षा मिश्रा का है। डाक विभाग से मिलने वाली चेक बैंक खाते में जमा कर दी जाती थीं। यहां से चेक एसबीआई के क्लियरिंग हाउस जाती थीं। चेक क्लियर होने के बाद खाते में रकम पहुंच जाती थी। लेकिन, चेक बैंक में जमा करने से पहले उनमें ओवरराइटिंग कर दी जाती थी। हजारों की रकम को लाखों में बदल कर चेक जमा होती थी। चेक पर ओवरराइटिंग इतनी सफाई से की जाती थी कि बैंक व क्लियरिंग हाउस के कर्मचारी भी उसे नहीं पकड़ पाए। इस वर्ष फरवरी से अक्तूबर के बीच 22 चेकों पर ओवर राइटिंग कर 1,92,407 रुपये के स्थान पर 41,92,407 रुपये निकाले गए।
फ्राड का खुलासा दो हजार की चेक पर ओवरराइटिंग कर छह लाख दो हजार रुपये शब्दों व अंकों में लिखने पर हुआ। क्लियरिंग हाउस के कर्मचारियों को शक होने पर उन्होंने इसकी सूचना डाक विभाग को दी। इस पर डाक विभाग में उसका पूरा खाता चेक किया गया, तो एक के बाद एक पर्त खुलती गईं। फिलहाल डाक विभाग हाथ ही मल रहा है, जबकि आरोपी गायब हो गया है।
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रॉयल टेली शॉपिंग नेटवर्क द्वारा अपने उत्पाद डाक विभाग के वीपीपी (वैल्यू पेअबल पार्सल) के माध्यम से ग्राहकों को तक पहुंचाए जाते हैं। ग्राहकों से मिलने वाली रकम टेली शॉपिंग नेटवर्क संचालक को हेड पोस्ट आफिस से चेक के माध्यम से मिलती है। रॉयल टेली शॉपिंग नेटवर्क फर्म का अकाउंट रानी लक्ष्मीबाई अरबन कोआपरेटिव बैंक में है, जिसमें प्रोपराइटर के रूप में नाम ग्वालियर फ्रेंड्स कालोनी निवासी उमाकांत मिश्रा की पत्नी रक्षा मिश्रा का है। डाक विभाग से मिलने वाली चेक बैंक खाते में जमा कर दी जाती थीं। यहां से चेक एसबीआई के क्लियरिंग हाउस जाती थीं। चेक क्लियर होने के बाद खाते में रकम पहुंच जाती थी। लेकिन, चेक बैंक में जमा करने से पहले उनमें ओवरराइटिंग कर दी जाती थी। हजारों की रकम को लाखों में बदल कर चेक जमा होती थी। चेक पर ओवरराइटिंग इतनी सफाई से की जाती थी कि बैंक व क्लियरिंग हाउस के कर्मचारी भी उसे नहीं पकड़ पाए। इस वर्ष फरवरी से अक्तूबर के बीच 22 चेकों पर ओवर राइटिंग कर 1,92,407 रुपये के स्थान पर 41,92,407 रुपये निकाले गए।
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फ्राड का खुलासा दो हजार की चेक पर ओवरराइटिंग कर छह लाख दो हजार रुपये शब्दों व अंकों में लिखने पर हुआ। क्लियरिंग हाउस के कर्मचारियों को शक होने पर उन्होंने इसकी सूचना डाक विभाग को दी। इस पर डाक विभाग में उसका पूरा खाता चेक किया गया, तो एक के बाद एक पर्त खुलती गईं। फिलहाल डाक विभाग हाथ ही मल रहा है, जबकि आरोपी गायब हो गया है।
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