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अंधेरगर्दी... तय समय पर काम पूरा नहीं, खरीद भी महंगी
अमर उजाला ब्यूरो/झांसी
Updated Sun, 04 Sep 2016 01:17 AM IST
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तय समय पर काम पूरा नहीं, खरीद भी महंगी
- फोटो : demo pic
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झांसी। निजी कंपनी के बेहद धीमे कामकाज से नाराज बिजली विभाग अब उससे ने हाथ जोड़ लिए हैं। इसी साथ ही कंपनी से कहा है कि वह पैकअप कर ले। बिजली विभाग ने यह भी पता किया है कि यह कंपनी बाजार भाव से अधिक में उपकरण खरीद रही है। अब बाकी का काम बिजली विभाग अपनी देखरेख में किसी दूसरी कंपनी से करवाएगा।
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने आरएपीडीआरपी और स्केडा (सुपरवीजन कंट्रोल एंड डाटा एक्यूसन प्रोग्राम) के तहत महानगर के विद्युत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए 237 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह धनराशि बिजली बोर्ड से बतौर कर्ज ली गई थी। काम का ठेका गाजियाबाद की कंपनी कैपिटल को दिया। मार्च 2014 से काम शुरू हो गया। अनुबंध के मुताबिक कंपनी को दिसंबर 2015 तक काम पूरा करना था लेकिन अभी तक 60 फीसदी भी काम नहीं हो सका।
बिजली विभाग को यह भी जानकारी हुई कि कंपनी बेवजह महंगे उपकरण खरीद रही है। कई बार चेतावनी के बाद भी कंपनी की चाल नहीं सुधरी और काम लेट होता गया। अब विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक ने कंपनी को निर्देश दिया है कि अब वह यहां काम के लिए कोई भी उपकरण नहीं खरीदे। जो खरीद लिए हैं, उन्हें दिसंबर तक खपा दे और काम बंद कर दे। आगे का काम किसी और कंपनी से करवाया जाएगा।
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बड़ा सवाल यह भी है कि निर्धारित दर से अधिक पर खरीद होती रही और इसके लिए भुगतान भी होता रहा तो बिजली विभाग के अधिकारियों ने ऐसा क्यों होने दिया? बढ़ी दर पर भुगतान क्यों किया गया? इन सवालों पर विभागीय अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
‘समय से काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इस कारण दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का निर्देश है कि अब इस कैपिटल कंपनी से आगे काम नहीं करवाया जाएगा। कैपिटल कंपनी को पैकअप के लिए दिसंबर तक का समय दिया गया है ताकि उसने जो उपकरण खरीदे हैं, उनका इस्तेमाल हो जाए।
राकेश कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता (नगर)।
मनमानी
विद्युत विभाग ने सामग्री खरीद के लिए एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने उन उपकरणों के रेट तय कर दिए थे, जो इस्तेमाल किए जाने हैं। लेकिन कैपिटल कंपनी ने मनमानी की। कमेटी की ओर से तय किए गए रेट और जिन दामों में कंपनी ने उपकरण खरीदे, उनमें भारी अंतर है। देखें उदाहरण-13 मीटर लंबे एसटी खंभे के लिए 17,500 रुपये रेट तय थे पर कंपनी ने खरीद दिखाई 36,803 रुपये की। इसी तरह कंपनी ने 11 मीटर लंबे एसटी खंभे 14,500 की जगह 23,678 रुपये , दस एमवीए ट्रांसफार्मर 57.24 लाख की जगह 90 लाख, पांच एमवीए ट्रांसफार्मर 31.20 लाख की जगह करीब 50 लाख, चार सौ केवी ट्रांसफार्मर आठ लाख की जगह 13.48 लाख, एक्स आर्म चैनल1050 रुपये की जगह 2086 रुपये, 11 केवी के एंड सपोर्टर1472 रुपये की जगह 3608 रुपये में खरीद दिखाई और भुगतान लिया।
ये रही योजना
इस योजना के अंतर्गत हंसारी पावर हाउस की क्षमता वृद्धि, साठ किलोमीटर 33 केवी लाइन बिछाना, शहर में तीन नए सब स्टेशनों पर दस एमवीए के चार ट्रांसफार्मरों, पांच एमवीए के तीन व नगर के अलग- अलग स्थानों पर 395 केवी के 39 ट्रांसफार्मर, 250 केवी के 69 ट्रांसफार्मर, 100 केवी के 127 ट्रांसफार्मर की व्यवस्था, घर के बाहर मीटर व सात हजार नए विद्युत खंभे लगाने जैसे कार्य होने हैं।
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उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने आरएपीडीआरपी और स्केडा (सुपरवीजन कंट्रोल एंड डाटा एक्यूसन प्रोग्राम) के तहत महानगर के विद्युत ढांचे को मजबूत बनाने के लिए 237 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। यह धनराशि बिजली बोर्ड से बतौर कर्ज ली गई थी। काम का ठेका गाजियाबाद की कंपनी कैपिटल को दिया। मार्च 2014 से काम शुरू हो गया। अनुबंध के मुताबिक कंपनी को दिसंबर 2015 तक काम पूरा करना था लेकिन अभी तक 60 फीसदी भी काम नहीं हो सका।
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बिजली विभाग को यह भी जानकारी हुई कि कंपनी बेवजह महंगे उपकरण खरीद रही है। कई बार चेतावनी के बाद भी कंपनी की चाल नहीं सुधरी और काम लेट होता गया। अब विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक ने कंपनी को निर्देश दिया है कि अब वह यहां काम के लिए कोई भी उपकरण नहीं खरीदे। जो खरीद लिए हैं, उन्हें दिसंबर तक खपा दे और काम बंद कर दे। आगे का काम किसी और कंपनी से करवाया जाएगा।
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बड़ा सवाल यह भी है कि निर्धारित दर से अधिक पर खरीद होती रही और इसके लिए भुगतान भी होता रहा तो बिजली विभाग के अधिकारियों ने ऐसा क्यों होने दिया? बढ़ी दर पर भुगतान क्यों किया गया? इन सवालों पर विभागीय अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
‘समय से काम पूरा नहीं हो पा रहा है। इस कारण दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक का निर्देश है कि अब इस कैपिटल कंपनी से आगे काम नहीं करवाया जाएगा। कैपिटल कंपनी को पैकअप के लिए दिसंबर तक का समय दिया गया है ताकि उसने जो उपकरण खरीदे हैं, उनका इस्तेमाल हो जाए।
राकेश कुमार गुप्ता, अधीक्षण अभियंता (नगर)।
मनमानी
विद्युत विभाग ने सामग्री खरीद के लिए एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने उन उपकरणों के रेट तय कर दिए थे, जो इस्तेमाल किए जाने हैं। लेकिन कैपिटल कंपनी ने मनमानी की। कमेटी की ओर से तय किए गए रेट और जिन दामों में कंपनी ने उपकरण खरीदे, उनमें भारी अंतर है। देखें उदाहरण-13 मीटर लंबे एसटी खंभे के लिए 17,500 रुपये रेट तय थे पर कंपनी ने खरीद दिखाई 36,803 रुपये की। इसी तरह कंपनी ने 11 मीटर लंबे एसटी खंभे 14,500 की जगह 23,678 रुपये , दस एमवीए ट्रांसफार्मर 57.24 लाख की जगह 90 लाख, पांच एमवीए ट्रांसफार्मर 31.20 लाख की जगह करीब 50 लाख, चार सौ केवी ट्रांसफार्मर आठ लाख की जगह 13.48 लाख, एक्स आर्म चैनल1050 रुपये की जगह 2086 रुपये, 11 केवी के एंड सपोर्टर1472 रुपये की जगह 3608 रुपये में खरीद दिखाई और भुगतान लिया।
ये रही योजना
इस योजना के अंतर्गत हंसारी पावर हाउस की क्षमता वृद्धि, साठ किलोमीटर 33 केवी लाइन बिछाना, शहर में तीन नए सब स्टेशनों पर दस एमवीए के चार ट्रांसफार्मरों, पांच एमवीए के तीन व नगर के अलग- अलग स्थानों पर 395 केवी के 39 ट्रांसफार्मर, 250 केवी के 69 ट्रांसफार्मर, 100 केवी के 127 ट्रांसफार्मर की व्यवस्था, घर के बाहर मीटर व सात हजार नए विद्युत खंभे लगाने जैसे कार्य होने हैं।