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स्टेशन से चोरी गए बच्चे का अभी तक पता नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:14 AM IST
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child
- फोटो : demo
झांसी।
चार दिन पहले रेलवे स्टेशन से चोरी गए बच्चे प्रिंस का अभी तक पता नहीं चल सका। सूचना मिली कि वह दतिया बस स्टैंड पर है, परिजन वहां पहुंचे, लेकिन निराशा हाथ लगी। जीआरपी की दोनों टीमों को भी कोई सफलता हाथ नहीं लग सकी।
रेलवे स्टेशन से 13 जून की रात चोरी गए भोपाल के गांधीनगर निवासी रामकुमार धाकड़ के तीन साल के बेटे प्रिंस चौथे दिन बाद भी पता नहीं चल सका।
प्लेटफार्म पर पत्नी रीना, सास मीना, साला सूरज, भाई परशुराम और चाचा पहलवान बैठे रहे। इस बीच उनको एक उम्मीद की किरण दिखाई दी, जब किसी ने बताया कि दतिया के बसस्टैंड पर एक बच्चा वहां के दुकानदारों को मिला है,
जो देखने में प्रिंस जैसा लग रहा है। इस खबर पर परिजन दतिया पहुंच गए, लेकिन वह बच्चा प्रिंस नहीं निकला। बाद में परिजन मायूस होकर झांसी लौट आए। व्हाट्सऐप पर खबर पढ़कर एक व्यक्ति का आगरा से भी फोन आया, जिसने बताया कि उनके यहां भी एक बच्चा मिला है। वे प्रिंस की तस्वीर भेजे। परिजनों ने व्हाट्सऐप पर प्रिंस की तस्वीर भेजी, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी। इसके बाद भी जिसने जहां कुछ संभावना बताई रामकुमार अपनी पत्नी और अन्य परिजनों के
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साथ इधर- उधर भागते रहे। इधर, प्रिंस की तलाश में जबलपुर और दुर्ग गई जीआरपी की टीमों को भी कोई सफलता हाथ नहीं लग सकी।
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चार दिन पहले रेलवे स्टेशन से चोरी गए बच्चे प्रिंस का अभी तक पता नहीं चल सका। सूचना मिली कि वह दतिया बस स्टैंड पर है, परिजन वहां पहुंचे, लेकिन निराशा हाथ लगी। जीआरपी की दोनों टीमों को भी कोई सफलता हाथ नहीं लग सकी।
रेलवे स्टेशन से 13 जून की रात चोरी गए भोपाल के गांधीनगर निवासी रामकुमार धाकड़ के तीन साल के बेटे प्रिंस चौथे दिन बाद भी पता नहीं चल सका।
प्लेटफार्म पर पत्नी रीना, सास मीना, साला सूरज, भाई परशुराम और चाचा पहलवान बैठे रहे। इस बीच उनको एक उम्मीद की किरण दिखाई दी, जब किसी ने बताया कि दतिया के बसस्टैंड पर एक बच्चा वहां के दुकानदारों को मिला है,
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जो देखने में प्रिंस जैसा लग रहा है। इस खबर पर परिजन दतिया पहुंच गए, लेकिन वह बच्चा प्रिंस नहीं निकला। बाद में परिजन मायूस होकर झांसी लौट आए। व्हाट्सऐप पर खबर पढ़कर एक व्यक्ति का आगरा से भी फोन आया, जिसने बताया कि उनके यहां भी एक बच्चा मिला है। वे प्रिंस की तस्वीर भेजे। परिजनों ने व्हाट्सऐप पर प्रिंस की तस्वीर भेजी, लेकिन वहां से भी निराशा हाथ लगी। इसके बाद भी जिसने जहां कुछ संभावना बताई रामकुमार अपनी पत्नी और अन्य परिजनों के
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साथ इधर- उधर भागते रहे। इधर, प्रिंस की तलाश में जबलपुर और दुर्ग गई जीआरपी की टीमों को भी कोई सफलता हाथ नहीं लग सकी।