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वित्त अधिकारी और पुष्पा के खिलाफ मुकदमा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Mar 2017 12:36 AM IST
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police, jhansi news
- फोटो : demo
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को कुलपति के सामने हुए मारपीट प्रकरण में अब दूसरे पक्ष ने भी मुकदमा दर्ज करा दिया है। वित्त अधिकारी और महिला कर्मी पर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय चौकी में तहरीर दी गई है।
शनिवार को बीयू स्थित कांफ्रेंस हॉल में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलसचिव वीएन सिंह, वित्त अधिकारी धर्मपाल, चीफ प्रॉक्टर प्रो. एमएल मौर्या के सामने कर्मचारी पुष्पा गौतम और नीरेंद्र यादव में तकरार शुरू हो गई थी। पुष्पा का आरोप है कि नीरेंद्र ने उनकी पिटाई की। इस दौरान उनको कुर्सी भी मारी गई, जिससे वह जमीन पर गिर गईं। पुष्पा ने नवाबाद थाने में नीरेंद्र समेत छह नामजद के खिलाफ मारपीट, अवैध वसूली, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने समेत कई आरोप लगाते हुए तहरीर दी। इस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद नीरेंद्र ने भी धारदार हथियार से मारपीट, गाली-गलौज करने समेत कई आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय पुलिस चौकी में तहरीर दी। विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज अरविंद यादव ने बताया कि वित्त अधिकारी धर्मपाल और पुष्पा गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की तहकीकात की जा रही है।
पुष्पा के हाथ में फ्रैक्चर, ऑपरेशन आज
घटना के बाद पुलिस ने दोनों कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया था। पुष्पा के मुताबिक एक्सरे जांच के बाद दाएं हाथ में मेजर फ्रैक्चर निकला है। डॉक्टरों ने सोमवार को ऑपरेशन करने के लिए कहा है।
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पुलिस ने मांगी सीसीटीवी फुटेज
मारपीट प्रकरण की जांच के लिए पुलिस ने विश्वविद्यालय से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मांगी है। रविवार को नवाबाद थाना पुलिस ने इस संबंध में कुलपति को पत्र लिखा है। गौरतलब है कि मारपीट की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। जांच में फुटेज अहम साबित हो सकते हैं।
बीयू में पुलिस बल तैनात
यूनिवर्सिटी परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात हो गया है। बीयू प्रशासन ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कैंपस में पुलिस तैनात करने की मांग की थी। रविवार को विश्वविद्यालय खुलते ही छह से आठ पुलिस कर्मचारी परिसर में तैनात हो गए। आगे भी पुलिस परिसर में तैनात रहेगी।
पहले भी दागदार हो चुक ा है बीयू का दामन
- कर्मचारी, शिक्षक ही नहीं अधिकारी तक पिटे
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को हुआ मारपीट प्रकरण कोई पहली बार नहीं हुआ, इसके पहले भी कई बार बीयू का दामन दागदार हो चुका है। कर्मचारी, शिक्षक ही नहीं अधिकारियों तक को पीटा गया।
बीयू की स्थापना 1975 में हुई थी, इसके बाद से लेकर आज तक मारपीट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले एक दशक की बात करें तो वर्ष 2005-06 में अति गोपनीय विभाग के अनुभाग अधिकारी को बीएड के नंबर बढ़ाने को लेकर कर्मियों ने पीटा था। इसके बाद 2006 में शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच सैलरी के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी।
इसी वर्ष तत्कालीन वित्त अधिकारी के साथ कार्यालय में मारपीट की गई। सन 2010 में ट्रांसफर को लेकर कुछ कर्मियों और अनुभाग अधिकारी में मारपीट हुई थी। 2010 में एक शिक्षक ने महिला कर्मी को पीटा तो 2011 में एक कर्मी ने शिक्षक को। 2013 में इंजीनियरिंग विभाग के तीन शिक्षकों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। 2016 से अब तक तीन-चार मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार को हुई मारपीट की घटना बीयू पर बदनुमा दाग लगा गई है। कभी पीड़ित का पीछे हट जाना तो कभी अधिकारियों का लचीला रवैया घटनाओं की वृद्धि में सहायक रहा है।
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शनिवार को बीयू स्थित कांफ्रेंस हॉल में कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलसचिव वीएन सिंह, वित्त अधिकारी धर्मपाल, चीफ प्रॉक्टर प्रो. एमएल मौर्या के सामने कर्मचारी पुष्पा गौतम और नीरेंद्र यादव में तकरार शुरू हो गई थी। पुष्पा का आरोप है कि नीरेंद्र ने उनकी पिटाई की। इस दौरान उनको कुर्सी भी मारी गई, जिससे वह जमीन पर गिर गईं। पुष्पा ने नवाबाद थाने में नीरेंद्र समेत छह नामजद के खिलाफ मारपीट, अवैध वसूली, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करने समेत कई आरोप लगाते हुए तहरीर दी। इस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद नीरेंद्र ने भी धारदार हथियार से मारपीट, गाली-गलौज करने समेत कई आरोप लगाते हुए विश्वविद्यालय पुलिस चौकी में तहरीर दी। विश्वविद्यालय चौकी इंचार्ज अरविंद यादव ने बताया कि वित्त अधिकारी धर्मपाल और पुष्पा गौतम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की तहकीकात की जा रही है।
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पुष्पा के हाथ में फ्रैक्चर, ऑपरेशन आज
घटना के बाद पुलिस ने दोनों कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती कराया था। पुष्पा के मुताबिक एक्सरे जांच के बाद दाएं हाथ में मेजर फ्रैक्चर निकला है। डॉक्टरों ने सोमवार को ऑपरेशन करने के लिए कहा है।
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पुलिस ने मांगी सीसीटीवी फुटेज
मारपीट प्रकरण की जांच के लिए पुलिस ने विश्वविद्यालय से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मांगी है। रविवार को नवाबाद थाना पुलिस ने इस संबंध में कुलपति को पत्र लिखा है। गौरतलब है कि मारपीट की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। जांच में फुटेज अहम साबित हो सकते हैं।
बीयू में पुलिस बल तैनात
यूनिवर्सिटी परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात हो गया है। बीयू प्रशासन ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कैंपस में पुलिस तैनात करने की मांग की थी। रविवार को विश्वविद्यालय खुलते ही छह से आठ पुलिस कर्मचारी परिसर में तैनात हो गए। आगे भी पुलिस परिसर में तैनात रहेगी।
पहले भी दागदार हो चुक ा है बीयू का दामन
- कर्मचारी, शिक्षक ही नहीं अधिकारी तक पिटे
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को हुआ मारपीट प्रकरण कोई पहली बार नहीं हुआ, इसके पहले भी कई बार बीयू का दामन दागदार हो चुका है। कर्मचारी, शिक्षक ही नहीं अधिकारियों तक को पीटा गया।
बीयू की स्थापना 1975 में हुई थी, इसके बाद से लेकर आज तक मारपीट की कई घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले एक दशक की बात करें तो वर्ष 2005-06 में अति गोपनीय विभाग के अनुभाग अधिकारी को बीएड के नंबर बढ़ाने को लेकर कर्मियों ने पीटा था। इसके बाद 2006 में शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच सैलरी के विवाद को लेकर मारपीट हुई थी।
इसी वर्ष तत्कालीन वित्त अधिकारी के साथ कार्यालय में मारपीट की गई। सन 2010 में ट्रांसफर को लेकर कुछ कर्मियों और अनुभाग अधिकारी में मारपीट हुई थी। 2010 में एक शिक्षक ने महिला कर्मी को पीटा तो 2011 में एक कर्मी ने शिक्षक को। 2013 में इंजीनियरिंग विभाग के तीन शिक्षकों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। 2016 से अब तक तीन-चार मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। शनिवार को हुई मारपीट की घटना बीयू पर बदनुमा दाग लगा गई है। कभी पीड़ित का पीछे हट जाना तो कभी अधिकारियों का लचीला रवैया घटनाओं की वृद्धि में सहायक रहा है।