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फर्म ने की देरी, ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2016 01:27 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी। टेंडर निकलने के बावजूद अभी तक वाटर कूलर का ऑर्डर सप्लाई न करने के मामले में अब जेई ने फर्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जेई ने फर्म को लापरवाह करार देते हुए ब्लैक लिस्ट करने की सिफारिश कर दी है।
वाटर कूलर खरीदने के लिए दिसंबर 2015 में टेंडर निकाला गया था। टेंडर निकलने के चार माह बीतने के बावजूद इनकी फिटिंग नहीं की जा सकी। इससे विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राएं ठंडे पानी को तरस गए। विभागीय लापरवाही के इस मामले को अमर उजाला द्वारा उठाने के बाद अधिकारी हरकत में आए और आनन-फानन में जेई (विद्युत) को नोटिस जारी कर खराब पड़े वाटर कूलरों को ठीक कराने और नए की खरीद के निर्देश दिए। अपने जवाब में जेई ने वर्क ऑर्डर जारी होने वाली फर्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
फर्म पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए वाटर कूलर न लग पाने का दोष उसी पर मढ़ दिया है। जेई ने जवाब दिया कि उनके बार-बार कहने के बावजूद फर्म ने वाटर कूलर नहीं लगाए। अब कार्रवाई की गेंद विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ में है, सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि जेई की सिफारिश पर फर्म को ब्लैक लिस्ट किया जाता है अथवा नहीं।
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मुनाफे के चक्कर में देर से होती सप्लाई
मुनाफे के चक्कर में फर्म द्वारा तब तक प्रोडक्ट की सप्लाई नहीं की जाती है, जब तक पानी सिर के ऊपर न निकल जाए। जेई द्वारा दिए गए जवाब से लब्बो-लुआब यही निकल कर आया है। जवाब में स्पष्ट है कि फर्म इसलिए देर करती हैं, ताकि आनन-फानन में जरूरत पड़ने पर घटिया और सस्ते प्रोडक्ट की सप्लाई कर दी जाए। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा होता है।
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वाटर कूलर खरीदने के लिए दिसंबर 2015 में टेंडर निकाला गया था। टेंडर निकलने के चार माह बीतने के बावजूद इनकी फिटिंग नहीं की जा सकी। इससे विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राएं ठंडे पानी को तरस गए। विभागीय लापरवाही के इस मामले को अमर उजाला द्वारा उठाने के बाद अधिकारी हरकत में आए और आनन-फानन में जेई (विद्युत) को नोटिस जारी कर खराब पड़े वाटर कूलरों को ठीक कराने और नए की खरीद के निर्देश दिए। अपने जवाब में जेई ने वर्क ऑर्डर जारी होने वाली फर्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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फर्म पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए वाटर कूलर न लग पाने का दोष उसी पर मढ़ दिया है। जेई ने जवाब दिया कि उनके बार-बार कहने के बावजूद फर्म ने वाटर कूलर नहीं लगाए। अब कार्रवाई की गेंद विश्वविद्यालय प्रशासन के हाथ में है, सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि जेई की सिफारिश पर फर्म को ब्लैक लिस्ट किया जाता है अथवा नहीं।
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मुनाफे के चक्कर में देर से होती सप्लाई
मुनाफे के चक्कर में फर्म द्वारा तब तक प्रोडक्ट की सप्लाई नहीं की जाती है, जब तक पानी सिर के ऊपर न निकल जाए। जेई द्वारा दिए गए जवाब से लब्बो-लुआब यही निकल कर आया है। जवाब में स्पष्ट है कि फर्म इसलिए देर करती हैं, ताकि आनन-फानन में जरूरत पड़ने पर घटिया और सस्ते प्रोडक्ट की सप्लाई कर दी जाए। इससे उन्हें अच्छा मुनाफा होता है।