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कोरोना काल ने दिया बड़ा मानसिक आघात, कई गुना बढ़ीं आत्महत्याएं, डिप्रेशन, घरेलू हिंसाएं

Sat, 10 Oct 2020 01:57 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 01:57 AM IST
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corona time period growth depressen case
corona time period growth depressen case
झांसी। कोरोना के दौर में डिप्रेशन से लेकर आत्महत्याओं का ग्राफ कई गुना बढ़ गया है। कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या और मृत्युदर से लोगों में बीमार होने के खौफ के साथ ही नौकरी जाने का डर और कारोबार चौपट होने की चिंता बढ़ गई। इस कारण झांसी, ललितपुर में 50 हजार से अधिक लोग डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं। यह संख्या तो उनकी है जो इलाज के लिए चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों को पता ही नहीं है कि वे अवसाद का शिकार हैं। यही नहीं, तनाव में आकर झांसी में 150 और ललितपुर में 120 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। खास बात यह है कि आत्महत्या करने वालों में युवाओं से लेकर 70 वर्ष तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं। दोनों ही जिलों में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या में 40 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन, घबराहट के मरीज के साथ-साथ घरेलू हिंसा के मामलों में भी इजाफा हुआ है। यही नहीं, आमजन से लेकर बच्चों तक के स्वभाव बदल गए हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों का अनुमान है कि हर तीसरे घर में एक व्यक्ति मानसिक रोग की चपेट में आ चुका है।
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केस-1
मानिक चौक निवासी एक महिला को लगातार सिरदर्द बना हुआ था और वह मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खाती रही। जबकि, वह डिप्रेशन के शुरुआती दौर में थी। धीरे-धीरे डिप्रेशन बढ़ा और महिला को पैनिक अटैक आने शुरू हो गए। तब वह जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने पहुंची। डॉक्टर ने मरीज का उपचार शुरू किया, अब उसकी हालत पहले से काफी सुधर गई है।
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केस-2
व्यापार में नुकसान होने पर सुभाषगंज निवासी व्यापारी डिप्रेशन का शिकार हो गया। उनके मन में आत्महत्या करने का विचार आने लगा। झिझक की वजह से वह डॉक्टर को दिखाने नहीं जा रहा था। एक दिन उसने टेलीमेडिसिन पर डॉक्टर को फोन कर समस्या बताई। डॉक्टर ने काउंसलिंग कर उसे अस्पताल बुला लिया। इलाज शुरू होने के बाद अब व्यापारी की हालत ठीक है।
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केस-3
सीपरी बाजार निवासी इंटर का छात्र कोरोना के कारण इस कदर भयभीत हो गया कि वह बाहर से आने वाले हर शख्स से डरने लगा। कोई भी व्यक्ति उसके परिवार में आता, उससे मिलना तो दूर छात्र खुद को ही तीन-चार दिनों तक कमरे में कैद कर लेता। घर का खाना खाना भी बंद कर देता। अभी डॉक्टर से उसका इलाज चल रहा है। पहले से सेहत में कुछ सुधार आया है।
केस-4
कोरोना की वजह से एक परिवार के दो भाइयों की जान चली गई। इससे तीसरा भाई इस कदर भयभीत हो गया कि उसे लगने लगा कि कभी भी उसकी मौत हो सकती है। डर के खौफ में उसका हर पल गुजरने लगा। उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया। किसी से बात करना भी बंद कर दिया। तब परिजनों को चिंता हुई और मनोरोग विशेषज्ञ से उपचार शुरू कराया।

किस बीमारी में कितना इजाफा
- आत्महत्या की प्रवृत्ति 15 फीसदी बढ़ी है।
- गंभीर डिप्रेशन 15 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
- नशे की लत के ग्राफ में भी 20 प्रतिशत इजाफा।
- घरेलू हिंसा 30-40 प्रतिशत तक बढ़ा गई है।
- इन दिनों घबराहट के मरीज डेढ़ गुने हो गए हैं।
- शुरूआती डिप्रेशन के मरीज भी 40 फीसदी बढ़े।
ऐसे करें मानसिक रोग की पहचान
- जो काम पहले अच्छा लगता था अब उससे मन उचटना।
- शरीर में हर समय थकावट महसूस होना।
- पहले से भूख कम या ज्यादा लगना।
- पहले से नींद कम या ज्यादा आना।
- आत्महत्या का विचार आने लगना।
रोग छुपाएं नहीं बताएं, जल्द ठीक हो जाएंगे
कोरोना के दौर में पहले से डिप्रेशन के शिकार रहे कई मरीज अब गंभीर अवसाद की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। इसके अलावा 40 फीसदी नए डिप्रेशन के मरीज बढ़ गए हैं। वहीं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, घबराहट तो आम बात हो गई है। घरेलू हिंसाओं के मामले भी बढ़े हैं। मानसिक रोग के बारे में लोग ज्यादा जागरूक नहीं है। इस कारण उन्हें पता ही नहीं होता कि वह मानसिक रोगी बन चुके हैं। ऐसे में मरीज व्यक्ति या फिर परिजनों को गौर करना चाहिए कि पहले से स्वभाव में क्या और कितना परिवर्तन आया है। मानसिक रोग का शुरूआती दौर में ही उपचार शुरू कर दिया जाए, तो मरीज जल्द स्वस्थ हो सकता है। बीमारी छुपाने से और बढ़ती है। वहीं, घर पर रहते-रहते बच्चों के स्वभाव में भी बदलाव आया है। ऐसे में परिजनों को उन्हें डांटकर नहीं उनकी बात सुनकर प्यार से समझाना चाहिए। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।
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