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कोरोना से अपनों को खोने वाले लोग गहरे सदमे में, तमाम हुए डिप्रेशन का शिकार

Thu, 27 May 2021 12:55 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 12:55 AM IST
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corona me apne ko khone bale log gehre sadme me, tamam huye depratin ke sikar
कोरोना में अपनों को खोने वाले लोग गहरे सदमे में, तमाम हुए डिप्रेशन का शिकार
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झांसी। कोरोना से हुई असमय मौतों से परिजन महीनों बाद भी नहीं उबर पा रहे हैं। किसी ने कम उम्र में ही माता-पिता को खो दिया है तो किसी का बच्चे चला गया है। अचानक हुई मौतों से परिजन उबर नहीं पा रहे हैं। इस कारण किसी ने खाना-पीना छोड़ दिया है तो कोई बार-बार बेहोश हो जा रहा है। हाल ये है कि इन दिनों पोस्ट क्रॉमिटिस स्ट्रेस डिस्ऑर्डर के 25 फीसदी मरीज बढ़ गए हैं तो हर तीसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो गया है।
कोरोना संक्रमण के नए स्ट्रेन में कम उम्र के व्यक्ति भी चपेट में आ रहे हैं। इस कारण कइयों की असमय मौत भी हो गई है। इसमें कई ऐसे लोगों ने भी जान गंवाई है, जिन्हें कोई बीमारी ही नहीं थी। ऐसी मौतों से परिजनों को भी काफी आघात पहुंचा। हाल ये रहा कि छोटे-छोटे बच्चों ने मां-बाप को खो दिया तो कई लोग अपने छोटे बच्चों से जुदा हो गए। ऐसी मौतों को परिजन भूल नहीं पाए हैं। महीनों बीत जाने के बावजूद वह इस सदमे से नहीं उबर पाए हैं। कई लोग तो बेड या फिर ऑक्सीजन की व्यवस्था न हो पाने पर खुद को भी परिजनों की मौत का जिम्मेदार मान रहे हैं। ऐसे में कोई डिप्रेशन का शिकार हो गया है तो कोई पोस्ट क्रॉमिटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर का। इस बीमारी का शिकार कई लोगों ने खाना-पीना छोड़ दिया है तो कोई बार-बार बेहोश हो जाता है। ऐसे में परिजन मनोचिकित्सकों का सहारा ले रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि संक्रमण के चलते लोगों में इस तरह के मामले में सामने आ रहे हैं, लेकिन खाना-पीना छोड़ देना कोई इलाज नहीं है। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य का ण्ध्
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ये रखें ध्यान
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- खुद की केयर करना न भूलें।
- नियमित समय पर खाना-पीना करें।
- जिसमें रुचि को वो चीजों में समय बिताएं।
- किसी भी चीज पर खुद को दोष न दें।
- अपनी समस्याओं को दूसरों से शेयर करें।
केस-1
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सीपरी बाजार निवासी एक महिला की दो साल पहले मौत हो गई थी। कोरोना संक्रमित होने की वजह से उसके पति की भी जान चली गई। ऐसे में 15 साल की बेटी साइकोसिस का शिकार हो गई। वह गुमसुम बैठी रहने लगी। खाना-पीना छोड़ दिया। चिंतित परिजनों ने उसका इलाज मनोचिकित्सक के पास शुरू करा दिया है। उसे दवाएं दी गई हैं।
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केस-2
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शहर निवासी एक व्यक्ति की कोरोना से मौत हो गई। इसके बाद उसकी पत्नी ने भी सुसाइड कर ली। अब छह साल की बच्ची बची हुई है, जो कि दादी के साथ रह रही है। अब दादी को बच्ची के भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है। उन्हें घबराहट रहती है कि बच्ची का क्या होगा। इस कारण उन्हें पैनिक अटैक आने लगे हैं। मनोचिकित्सक के पास इलाज चल रहा है।
केस-3
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कोरोना के चलते एक ही परिवार में तीन मौतें हो गईं। एक महिला के दोनों बेटे और पति की जान संक्रमण की वजह से चली गई। इससे पत्नी डिप्रेशन का शिकार हो गई। वह बार-बार पति और बेटों का नाम लेती और बेहोश हो जाती। उसने खाना पीना भी छोड़ दिया। थक-हारकर परिजनों ने मनोचिकित्सक से परामर्श लिया। महिला की दवाएं चल रही हैं।
केस-4
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शहर के रहने वाले एक परिवार में दंपति और उनके तीन बच्चे कोरोना की चपेट में आ गए। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद पति-पत्नी की जान नहीं बच सकी। अब तीन, चार और 12 साल के बच्चे बचे हुए हैं। अब 12 वर्ष की बेटी को पैनिक अटैक आने शुरू हो गए हैं। उसे छोटे भाइयों की चिंता सताने लगी है। दिन-भर घबराहट में वह कुछ खाती-पीती नहीं है।
केस-5
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नंदनपुरा की एक महिला के 15 साल से बच्चे नहीं हो रहे थे। हाल में ही महिला प्रेगनेंट हो गई। मगर उसका पति कोरोना की चपेट में आ गया। इसके बाद कोविड के चलते निधन भी हो गया। अब पत्नी डिप्रेशन में आ गई है। मनोचिकित्सक के पास उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टर ने भी एंटी डिप्रेशन की दवा शुरू करा दी है। पत्नी का कहना है कि उसे भविष्य को लेकर चिंता है।

वर्जन..
कोरोना के चलते कई लोगों की असमय मौत हो गई है। इस कारण परिजन उन्हें भूल नहीं पा रहे हैं। मौजूदा हालातों में पोस्ट क्रॉमिटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर के 25 प्रतिशत मामले बढ़े हैं। जबकि, हर तीसरा व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो गया है। ऐसे में लोगों को महामारी का शिकार लोगों के साथ ह्यूमन टच रखना चाहिए। उन्हें अकेला महसूस न होने दें। यदि व्यक्ति की समस्या लंबी चले तो मनोचिकित्सक को दिखाएं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।
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