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दहशत ने छीन ली हजारों की नींद, रातों को जाग-जागकर चेक करते ऑक्सीजन लेवल
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corona ho jaye to dr ko dikhao
झांसी। कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के दिलों-दिमाग पर बहुत असर किया है। हाल ये है कि कोरोना संक्रमित तो घबरा ही रहे हैं, वहीं जो लोग पॉजिटिव नहीं हैं, उनमें भी जबरदस्त खौफ है। उन्हें लग रहा है कि यदि कोरोना हो गया तो क्या होगा। दहशत के मारे रात को नींद भी नहीं आ रही। यही वजह है कि मनोचिकित्सकों के पास भी मरीजों की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है। आनलाइन भी ट्रीटमेंट ले रहे हैं। मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक से इलाज लेने वालों की संख्या भी 1500 से ज्यादा है।
कोरोना की दूसरी लहर ने एक महीने में ही एंजाइटी (घबराहट) के मरीजों की तादाद 40 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। इस बार लोगों में पिछले साल से भी ज्यादा घबराहट है। मनोचिकित्सकों के पास कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिसमें कोरोना पॉजिटिव होने के बाद व्यक्ति ये सोचने लगा है कि वह बचेगा नहीं। ऐसे मरीजों की मनोचिकित्सक काउंसिलिंग कर रहे हैं। दूसरी तरफ, कोरोना फोबिया इस कदर लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है कि जो संक्रमित नहीं भी हैं, उन्हें पॉजिटिव होने का डर सता रहा है। ऐसे मरीज ये कह रहे हैं कि यदि उन्हें कोरोना हुआ तो इलाज कैसे होगा। अस्पतालों में बेड भरे चल रहे हैं। ऑक्सीजन से लेकर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी चल रही है। कई लोग तो अपने परिवार के बारे में सोच-सोचकर घबरा रहे हैं। मनोचिकित्सक उन्हें समझा रहे हैं कि महामारी में घबराने की नहीं, मजबूत रहने की जरूरत है। ज्यादातर मरीज बीमारी से ठीक हो जा रहे हैं। यदि कोई भी लक्षण आए तो समय से जांच कराकर उपचार शुरू कर दें। फिर वो स्वस्थ हो जाएंगे।
केस-1
मुझे लगता रहता है कि सांस नहीं आ रही
नंदनपुरा की महिला कई डॉक्टरों के पास सांस न आने की समस्या लेकर पहुंची। सभी जगह ऑक्सीजन लेवल व अन्य चीजें ठीक मिलीं। इसके बाद परिजनों ने मनोचिकित्सक से संपर्क किया। डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोई परेशानी नहीं है। कोरोना को लेकर मन का खौफ निकाल दें। घबराहट के कारण उन्हें ऐसा लग रहा है। बाकी कोई परेशानी नहीं है।
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केस-2
मैं और पति पॉजिटिव हैं, बच्चे का क्या होगा
सीपरी बाजार निवासी दंपति कोरोना संक्रमित हो गए। उन्होंने मनोचिकित्सक को फोन करके इसकी जानकारी दी। वह अपने तीन साल के बच्चे को लेकर घबराए हुए थे। कह रहे थे कि उन्हें कुछ हो गया तो बच्चे का क्या होगा। बाद में उनकी काउंसलिंग कर सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया। दो-तीन दिन डॉक्टर ने लगातार बात की। इसके बाद दंपति का डर दूर हुआ।
केस-3
मुझे कोरोना होने का डर लगा रहता
शहर की महिला ने मनोचिकित्सक को फोन करके कहा कि उनके आसपास और जान-पहचान वाले पॉजिटिव हो रहे हैं। ऐसे में डर सताता रहता है कि कहीं मैं भी संक्रमित हो गई तो क्या होगा। अस्पतालों में बेड भरे हुए हैं। ऑक्सीजन की भी कमी चल रही है। डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि डर को मन से निकाल दें। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। कोरोना हुआ तो भी वह ठीक हो जाएंगी।
केस-4
मेरे ही घर वालों को क्यों हो रहा कोरोना
बड़ाबाजार के एक व्यक्ति ने डॉक्टर को फोन करके कहा कि पिछले साल मेरा छोटा बेटा पॉजिटिव हो गया था। इस बार दूसरा संक्रमित हो गया है। मैं भी पॉजिटिव हो गया हूं। समझ नहीं आ रहा कि मेरे घर वाले ही क्यों संक्रमित हो रहे हैं। फिर डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोई घर देखकर नहीं आता है। इसलिए बेवजह परेशान न हों। पूरा ध्यान ठीक होने पर लगाएं। जरूरी दवाएं खाएं।
कोविड की दूसरी लहर में पिछले एक महीने में ही एंजाइटी यानी घबराहट के मामलों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। जो पॉजिटिव नहीं भी हैं, वो ये सोचकर डरे हुए हैं कि उन्हें कोरोना हुआ तो इलाज कैसे होगा। लगातार मरीजों की काउंसिलिंग कर सकारात्मक रहने की प्रेरित किया जा रहा है। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।
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कोरोना की दूसरी लहर ने एक महीने में ही एंजाइटी (घबराहट) के मरीजों की तादाद 40 प्रतिशत तक बढ़ा दी है। इस बार लोगों में पिछले साल से भी ज्यादा घबराहट है। मनोचिकित्सकों के पास कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिसमें कोरोना पॉजिटिव होने के बाद व्यक्ति ये सोचने लगा है कि वह बचेगा नहीं। ऐसे मरीजों की मनोचिकित्सक काउंसिलिंग कर रहे हैं। दूसरी तरफ, कोरोना फोबिया इस कदर लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है कि जो संक्रमित नहीं भी हैं, उन्हें पॉजिटिव होने का डर सता रहा है। ऐसे मरीज ये कह रहे हैं कि यदि उन्हें कोरोना हुआ तो इलाज कैसे होगा। अस्पतालों में बेड भरे चल रहे हैं। ऑक्सीजन से लेकर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी चल रही है। कई लोग तो अपने परिवार के बारे में सोच-सोचकर घबरा रहे हैं। मनोचिकित्सक उन्हें समझा रहे हैं कि महामारी में घबराने की नहीं, मजबूत रहने की जरूरत है। ज्यादातर मरीज बीमारी से ठीक हो जा रहे हैं। यदि कोई भी लक्षण आए तो समय से जांच कराकर उपचार शुरू कर दें। फिर वो स्वस्थ हो जाएंगे।
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केस-1
मुझे लगता रहता है कि सांस नहीं आ रही
नंदनपुरा की महिला कई डॉक्टरों के पास सांस न आने की समस्या लेकर पहुंची। सभी जगह ऑक्सीजन लेवल व अन्य चीजें ठीक मिलीं। इसके बाद परिजनों ने मनोचिकित्सक से संपर्क किया। डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोई परेशानी नहीं है। कोरोना को लेकर मन का खौफ निकाल दें। घबराहट के कारण उन्हें ऐसा लग रहा है। बाकी कोई परेशानी नहीं है।
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केस-2
मैं और पति पॉजिटिव हैं, बच्चे का क्या होगा
सीपरी बाजार निवासी दंपति कोरोना संक्रमित हो गए। उन्होंने मनोचिकित्सक को फोन करके इसकी जानकारी दी। वह अपने तीन साल के बच्चे को लेकर घबराए हुए थे। कह रहे थे कि उन्हें कुछ हो गया तो बच्चे का क्या होगा। बाद में उनकी काउंसलिंग कर सकारात्मक सोच रखने के लिए प्रेरित किया। दो-तीन दिन डॉक्टर ने लगातार बात की। इसके बाद दंपति का डर दूर हुआ।
केस-3
मुझे कोरोना होने का डर लगा रहता
शहर की महिला ने मनोचिकित्सक को फोन करके कहा कि उनके आसपास और जान-पहचान वाले पॉजिटिव हो रहे हैं। ऐसे में डर सताता रहता है कि कहीं मैं भी संक्रमित हो गई तो क्या होगा। अस्पतालों में बेड भरे हुए हैं। ऑक्सीजन की भी कमी चल रही है। डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि डर को मन से निकाल दें। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें। कोरोना हुआ तो भी वह ठीक हो जाएंगी।
केस-4
मेरे ही घर वालों को क्यों हो रहा कोरोना
बड़ाबाजार के एक व्यक्ति ने डॉक्टर को फोन करके कहा कि पिछले साल मेरा छोटा बेटा पॉजिटिव हो गया था। इस बार दूसरा संक्रमित हो गया है। मैं भी पॉजिटिव हो गया हूं। समझ नहीं आ रहा कि मेरे घर वाले ही क्यों संक्रमित हो रहे हैं। फिर डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कोई घर देखकर नहीं आता है। इसलिए बेवजह परेशान न हों। पूरा ध्यान ठीक होने पर लगाएं। जरूरी दवाएं खाएं।
कोविड की दूसरी लहर में पिछले एक महीने में ही एंजाइटी यानी घबराहट के मामलों में 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। जो पॉजिटिव नहीं भी हैं, वो ये सोचकर डरे हुए हैं कि उन्हें कोरोना हुआ तो इलाज कैसे होगा। लगातार मरीजों की काउंसिलिंग कर सकारात्मक रहने की प्रेरित किया जा रहा है। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।