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तालाब व पोखरों का होगा संरक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 May 2016 12:29 AM IST
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ponds, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी। प्रदेश में लगातार गिरते भूमिगत जलस्तर एवं प्राकृतिक संतुलन को बचाने में जुटी सरकार ने सभी निकायों में स्थित तालाब, पोखर व झीलों के संरक्षण का निर्णय लिया है। नगर विकास मंत्रालय ने ‘नगरीय झील, तालाब, पोखर संरक्षण’ नाम की अभिनव योजना तैयार की है।
इस योजना के तहत शहरी क्षेत्र में स्थित उन तालाबों व पोखरों के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा, जो जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस संबंध में सभी निकायों से जानकारी मांगी गई है।
नगर क्षेत्र के लक्ष्मी तालाब, आंतिया तालाब व पानी वाली धर्मशाला का कायाकल्प किया जाएगा। प्रदेश की 22 प्रतिशत जनता शहरों में निवास करती है। इसलिए शहरी क्षेत्रों में भूजल का दोहन भी अधिक होता है। कुछ वर्षों से शहरी इलाकों में भूजल स्तर गिरने की तेजी से गिरने के संकेत मिले हैं। शहरों में पुराने पोखरों, तालाबों व झीलों को पाटकर आवासीय कालोनियां बनाई जा रही हैं। इससे वर्षा जल को रोकने व संचय करने के साधन समाप्त हो रहे हैं।
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इसी वजह से भूजल के स्तर में गिरावट आ रही है। सरकार का मानना है कि अगर शहरी क्षेत्रों में स्थित पोखरों, तालाबों व झीलों का संरक्षण कर दिया जाए तो भूजल के स्तर के गिरावट को नियंत्रित किया जा सकता है। इसको देखते हुए प्रदेश के नगर विकास मंत्रालय ने तालाबों, झीलों व पोखरों के संरक्षण की इस योजना को शुरू करने के निर्णय लिया है।
इस संबंध में नगरीय विकास मंत्रालय के निदेशक ने स्थानीय निकायों समेत सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों को योजना का प्रारूप भेजा गया है। साथ ही शहरी क्षेत्रों में स्थित सभी तालाबों, पोखरों व झीलों के संरक्षण से संबधित डीपीआर तैयार कराने को भी कहा है। इस योजना के लिए राज्य सरकार ने धन की व्यवस्था भी कर लिया है।
योजना में होंगे यह कार्य
- तालाब, पोखरों व झीलों के चारों ओर बनेंगे पाथवे
- इंटर लॉकिंग व प्रकाश की भी होगी समुचित व्यवस्था
- तालाबों के चारों ओर कराया जाएगा पौधारोपण
- रेन हार्वेस्ंिटग के भी किए जाएंगे उपाय
- तालाबों में गिरने वाले सीवर व नाले के पानी का होगा ट्रीटमेंट
- जलाशयों के किनारे बैठने की भी होगी व्यवस्था
‘नगरीय क्षेत्र में लक्ष्मी तालाब, आंतिया तालाब, पानी वाली धर्मशाला व बिजौली के पास स्थित एक तालाब हैं। इनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इन तालाबों को जल संचयन योजना के तहत विकसित किया जाएगा। नगरीय क्षेत्र में पोखर एवं झीलें नहीं हैं।’
अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त
नगर निगम झांसी
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इस योजना के तहत शहरी क्षेत्र में स्थित उन तालाबों व पोखरों के संरक्षण पर जोर दिया जाएगा, जो जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस संबंध में सभी निकायों से जानकारी मांगी गई है।
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नगर क्षेत्र के लक्ष्मी तालाब, आंतिया तालाब व पानी वाली धर्मशाला का कायाकल्प किया जाएगा। प्रदेश की 22 प्रतिशत जनता शहरों में निवास करती है। इसलिए शहरी क्षेत्रों में भूजल का दोहन भी अधिक होता है। कुछ वर्षों से शहरी इलाकों में भूजल स्तर गिरने की तेजी से गिरने के संकेत मिले हैं। शहरों में पुराने पोखरों, तालाबों व झीलों को पाटकर आवासीय कालोनियां बनाई जा रही हैं। इससे वर्षा जल को रोकने व संचय करने के साधन समाप्त हो रहे हैं।
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इसी वजह से भूजल के स्तर में गिरावट आ रही है। सरकार का मानना है कि अगर शहरी क्षेत्रों में स्थित पोखरों, तालाबों व झीलों का संरक्षण कर दिया जाए तो भूजल के स्तर के गिरावट को नियंत्रित किया जा सकता है। इसको देखते हुए प्रदेश के नगर विकास मंत्रालय ने तालाबों, झीलों व पोखरों के संरक्षण की इस योजना को शुरू करने के निर्णय लिया है।
इस संबंध में नगरीय विकास मंत्रालय के निदेशक ने स्थानीय निकायों समेत सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त व अधिशासी अधिकारियों को योजना का प्रारूप भेजा गया है। साथ ही शहरी क्षेत्रों में स्थित सभी तालाबों, पोखरों व झीलों के संरक्षण से संबधित डीपीआर तैयार कराने को भी कहा है। इस योजना के लिए राज्य सरकार ने धन की व्यवस्था भी कर लिया है।
योजना में होंगे यह कार्य
- तालाब, पोखरों व झीलों के चारों ओर बनेंगे पाथवे
- इंटर लॉकिंग व प्रकाश की भी होगी समुचित व्यवस्था
- तालाबों के चारों ओर कराया जाएगा पौधारोपण
- रेन हार्वेस्ंिटग के भी किए जाएंगे उपाय
- तालाबों में गिरने वाले सीवर व नाले के पानी का होगा ट्रीटमेंट
- जलाशयों के किनारे बैठने की भी होगी व्यवस्था
‘नगरीय क्षेत्र में लक्ष्मी तालाब, आंतिया तालाब, पानी वाली धर्मशाला व बिजौली के पास स्थित एक तालाब हैं। इनका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। इन तालाबों को जल संचयन योजना के तहत विकसित किया जाएगा। नगरीय क्षेत्र में पोखर एवं झीलें नहीं हैं।’
अरुण प्रकाश
नगर आयुक्त
नगर निगम झांसी