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कमिश्नर पहुंचे रिपोर्ट दर्ज कराने, टरकाया
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Tue, 26 May 2015 02:44 AM IST
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झांसी। नवाबाद थाने में टेस्ट रिपोर्ट लिखने में बरती गई शिथिलता एवं अभद्र व्यवहार पर मंडलायुक्त ने एसएसपी को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस के बर्ताव को आपत्तिजनक बताया है। नसीहत दी, ऐसा आचरण कदापि नहीं होना चाहिए।
मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने बताया कि तीन दिन पूर्व दोपहर करीब डेढ़ बजे वह नवाबाद थाने के पास रुके। पुलिस की सजगता जानने के लिए उन्होंने पुत्र को रानी लक्ष्मीबाई पार्क से बाइक संख्या यूपी93बी- 0786 चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराने भेजा। कुछ देर बाद मंडलायुक्त पैदल थाने पहुंचे और बेटे के पास खड़े रहे। उन्होंने बताया कि जब बेटे ने पार्क से बाइक चोरी होने की शिकायत की तो मौजूद पुलिस कर्मी बदतमीजी से चिल्लाने लगे। फिर 100 नंबर पर सूचना देकर आने को कहा।
इसके साथ ही मंडलायुक्त बेटे के साथ थाने के मुंशियाना में चले गए, जहां शिकायती पत्र लिखने को कागज मांगा तो टरका दिया गया। मंडलायुक्त ने तहरीर लिखकर जब थाने पर दी, तो मुंशी ने तीन घंटे बाद आने को कहा। पीड़ितों की सुनवाई का दावा करने वाली पुलिस के इस रवैये को देख मंडलायुक्त सन्न रह गए। वह आवास पहुंचे और थानाध्यक्ष को फोन पर थाने के मुंशियाना पहुंचने का निर्देश दिया। थानाध्यक्ष मुंशियाना पहुंचे तब मंडलायुक्त ने पूरा मामला बताया। जिससे थाने में हड़कंप मच गया। बमुश्किल दस मिनट के अंदर थानाध्यक्ष एफआईआर की प्रति लेकर आवास पर पहुंच गए। इसकी जानकारी होने पर कुछ देर में एसएसपी किरन एस भी मंडलायुक्त से मिलने पहुंचे।
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इस मामले पर एसएसपी किरन एस ने बताया कि उन्होंने मंडलायुक्त से बात की थी, वह पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट थे। करीब डेढ़ घंटे के बाद उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। वहीं, मंडलायुक्त का कहना है कि थाना पुलिस का रवैया आपत्तिजनक मिला। जैसा आचरण देखा वैसा कदापि नहीं होना चाहिए। तीन घंटे बाद रिपोर्ट दर्ज हुई, वह भी थानाध्यक्ष को फोन करके मामले की जानकारी देने के बाद। जिसके चलते मंडलायुक्त ने एसएसपी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने बताया कि तीन दिन पूर्व दोपहर करीब डेढ़ बजे वह नवाबाद थाने के पास रुके। पुलिस की सजगता जानने के लिए उन्होंने पुत्र को रानी लक्ष्मीबाई पार्क से बाइक संख्या यूपी93बी- 0786 चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराने भेजा। कुछ देर बाद मंडलायुक्त पैदल थाने पहुंचे और बेटे के पास खड़े रहे। उन्होंने बताया कि जब बेटे ने पार्क से बाइक चोरी होने की शिकायत की तो मौजूद पुलिस कर्मी बदतमीजी से चिल्लाने लगे। फिर 100 नंबर पर सूचना देकर आने को कहा।
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इसके साथ ही मंडलायुक्त बेटे के साथ थाने के मुंशियाना में चले गए, जहां शिकायती पत्र लिखने को कागज मांगा तो टरका दिया गया। मंडलायुक्त ने तहरीर लिखकर जब थाने पर दी, तो मुंशी ने तीन घंटे बाद आने को कहा। पीड़ितों की सुनवाई का दावा करने वाली पुलिस के इस रवैये को देख मंडलायुक्त सन्न रह गए। वह आवास पहुंचे और थानाध्यक्ष को फोन पर थाने के मुंशियाना पहुंचने का निर्देश दिया। थानाध्यक्ष मुंशियाना पहुंचे तब मंडलायुक्त ने पूरा मामला बताया। जिससे थाने में हड़कंप मच गया। बमुश्किल दस मिनट के अंदर थानाध्यक्ष एफआईआर की प्रति लेकर आवास पर पहुंच गए। इसकी जानकारी होने पर कुछ देर में एसएसपी किरन एस भी मंडलायुक्त से मिलने पहुंचे।
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इस मामले पर एसएसपी किरन एस ने बताया कि उन्होंने मंडलायुक्त से बात की थी, वह पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट थे। करीब डेढ़ घंटे के बाद उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी। वहीं, मंडलायुक्त का कहना है कि थाना पुलिस का रवैया आपत्तिजनक मिला। जैसा आचरण देखा वैसा कदापि नहीं होना चाहिए। तीन घंटे बाद रिपोर्ट दर्ज हुई, वह भी थानाध्यक्ष को फोन करके मामले की जानकारी देने के बाद। जिसके चलते मंडलायुक्त ने एसएसपी को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।