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सावन में साफ-सुथरी हुई झांसी की आबोहवा
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झांसी। बरसात के सीजन में झांसी की आबोहवा साफ-सुथरी हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 38 पर पहुंच गया है। ये स्थिति बहुत अच्छी मानी जाती है। पिछले दो दिनों में एक्यूआई में 30 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय पर वायु गुणवत्ता सूचकांक मापने के लिए कुछ महीने पहले ही सिस्टम स्थापित किया गया है। ये लगातार महानगर में हवा की गुणवत्ता का पता लगाता है। इसके आंकड़ों को देखें तो झांसी में एक अगस्त को एक्यूआई 85 था। जबकि, सात अगस्त को 78 पर पहुंच गया। 50 से 100 के बीच में एक्यूआई होने पर संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं, मंगलवार को एक्यूआई 38 पहुंच गया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. विनीत कुमार ने बताया कि बारिश के पानी के साथ वातावरण में मौजूद धूल के कण और धुआं जमीन की सतह पर आ जाते हैं और मिट्टी में घुल या मिल जाते हैं। हरियाली भी बढ़ जाती है। ये भी प्रदूषण को कम करती है। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत कम हो गया है। अब दूर दराज की चीजें साफ दिखने लगी हैं।
एक्यूआई स्थिति प्रदूषण का असर
0 से 50 अच्छी सबसे कम।
51 से 100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ।
101 से 200 मध्यम फेफड़ों, अस्थमा और ह्रदय रोगियों को सांस लेने में मध्यम परेशानी।
201 से 300 खराब लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकतर लोगों को सांस लेने में दिक्कत।
301 से 400 बहुत खराब अत्यधिक समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से गंभीर श्वांस रोग हो सकता।
401 से 500 गंभीर स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता। बीमारियों के रोगी को गंभीर रूप से प्रभावित करता।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्यालय पर वायु गुणवत्ता सूचकांक मापने के लिए कुछ महीने पहले ही सिस्टम स्थापित किया गया है। ये लगातार महानगर में हवा की गुणवत्ता का पता लगाता है। इसके आंकड़ों को देखें तो झांसी में एक अगस्त को एक्यूआई 85 था। जबकि, सात अगस्त को 78 पर पहुंच गया। 50 से 100 के बीच में एक्यूआई होने पर संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं, मंगलवार को एक्यूआई 38 पहुंच गया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के डॉ. विनीत कुमार ने बताया कि बारिश के पानी के साथ वातावरण में मौजूद धूल के कण और धुआं जमीन की सतह पर आ जाते हैं और मिट्टी में घुल या मिल जाते हैं। हरियाली भी बढ़ जाती है। ये भी प्रदूषण को कम करती है। इस कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत कम हो गया है। अब दूर दराज की चीजें साफ दिखने लगी हैं।
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एक्यूआई स्थिति प्रदूषण का असर
0 से 50 अच्छी सबसे कम।
51 से 100 संतोषजनक संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ।
101 से 200 मध्यम फेफड़ों, अस्थमा और ह्रदय रोगियों को सांस लेने में मध्यम परेशानी।
201 से 300 खराब लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकतर लोगों को सांस लेने में दिक्कत।
301 से 400 बहुत खराब अत्यधिक समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से गंभीर श्वांस रोग हो सकता।
401 से 500 गंभीर स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता। बीमारियों के रोगी को गंभीर रूप से प्रभावित करता।