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गायों की गुहार: चीतों को दे दिया जंगल, हमें भी घर दे दो 'सरकार'...गो-सेवक उठा रहे ये सवाल

Tue, 20 Sep 2022 12:33 AM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: झांसी ब्यूरो Updated Tue, 20 Sep 2022 12:33 AM IST
सार

जिले में जो हादसे हो रहे हैं उनमें से अधिकांश की वजह सड़क पर घूम रहे अन्ना पशु ही बन रहे हैं। गोशालाओं में कहीं जगह नहीं तो कहीं चारा गायब है। ग्राम पंचायतों से गोवंश का बोझ नहीं संभल रहा है।

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The request of the cows: the forest was given to the cheetahs, the government should give us a house too
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

ग्वालियर रोड हो या फिर कानपुर हाईवे। सड़कों पर भटक रहा गोवंश तेज रफ्तार गाड़ियों से टकराकर जान गंवा रहा है। जिले में जो हादसे हो रहे हैं उनमें से अधिकांश की वजह सड़क पर घूम रहे अन्ना पशु ही बन रहे हैं। गोशालाओं में कहीं जगह नहीं तो कहीं चारा गायब है। ग्राम पंचायतों से गोवंश का बोझ नहीं संभल रहा है। झांसी से महज 200 किलोमीटर दूर कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाकर चीते बसाए गए तो गो-सेवक यह सवाल उठा रहे हैं कि गायों को भी घर दिया जाए।

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अगर बुंदेलखंड की सबसे बड़ी समस्या को जाना जाए तो वह अन्ना पशु हैं हालांकि इससे निपटने के लिए सरकार ने गो-आश्रय स्थल बनवाए लेकिन, इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां इंतजाम मुक्कमल नहीं हुए। यहां पशु की सुरक्षा को शेड, पीने का पानी, प्रकाश, पशु चिकित्सा, हरा चारा आदि रखने को कहा गया लेकिन, अधिकांश जगहों में यह इंतजाम अधूरे हैं।
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आवारा जानवरों के अंतिम सर्वे के मुताबिक झांसी में करीब 52 हजार, ललितपुर में 40 हजार, जालौन में 29 हजार, हमीरपुर में 23 हजार गोवंश चिन्हित हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार झांसी में 172 गो आश्रय स्थल जबकि जालौन, ललितपुर, बांदा समेत चित्रकूट आदि में 320 गो आश्रय स्थल बनवाए गए। इनके रखरखाव पर सलाना करीब 20 करोड़ खर्च होते हैं इनके बावजूद बुंदेलखंड में करीब 35286 गोवंश सड़कों पर भटक रहे हैं। वहीं, गो-आश्रय स्थलों में पर्याप्त इंतजाम न होने से यहां के जानवर भी अक्सर बाहर खदेड़ दिए जाते हैं।

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तीन सौ से अधिक आवारा जानवर गवां चुके जान
बारिश के समय गोवंश सड़क का किनारा छोड़कर बीच सड़क पर आकर बैठ जाते हैं। इस वजह से रोजाना राजमार्र्र्गो पर गंभीर हादसे होते हैं। झांसी-खजुराहो राजमार्ग, झांसी-ललितपुर, झांसी-कानपुर हाइवे पर अन्ना पशुओं की वजह से गंभीर हादसे हो रहे हैं। इनमें राहगीरों की जान जाने के साथ ही गोवंश की भी मौत हो जाती है। इन राजमार्र्गो पर पिछले आठ माह के दौरान तीन सौ से अधिक गोवंश अपनी जान गवां चुके हैं। वहीं, इन हादसों को देखकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राजमार्ग के आसपास के ग्राम प्रधानों को पत्र लिखकर अन्ना जानवरों को गो आश्रय स्थलों में रखनाने की बात कही थी।

करोड़ों रुपये खर्च करके गो आश्रय स्थल बनवाए गए लेकिन, इनका फायदा नहीं हो रहा है। बड़ी संख्या में अन्ना जानवर सड़कों पर घूम रहे हैं। इनसे किसान परेशान हैं। किसानों को रात भर खेत की रखवाली करनी पड़ती है। -शिव नारायण सिंह परिहार, किसान नेता

गोशालाओं की हालात खराब है। गोवंशों के बीच खुरपका जैसी बीमारियां फैली हुई है। इसकी शिकायत कई बार की लेकिन, इनकी व्यवस्थाएं दुरूस्त नहीं हुईं। -वीरेंद्र कुशवाहा, नई बस्ती
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