{"_id":"61afbb2a296103053c67dede","slug":"children-s-safety-cycle-broken-decline-in-vaccines-from-polio-to-measles-jhansi-news-jhs2104527162","type":"story","status":"publish","title_hn":"टूटा बच्चों का सुरक्षा चक्र, पोलियो से लेकर मीजल्स के टीके में गिरावट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टूटा बच्चों का सुरक्षा चक्र, पोलियो से लेकर मीजल्स के टीके में गिरावट
विज्ञापन
झांसी। बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए पूर्ण टीकाकरण बहुत अहम है। मगर नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएफएचएस) की रिपोर्ट में झांसी में चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लगभग सत्रह फीसदी बच्चों का सुरक्षा चक्र टूट गया है। इसके अलावा पोलियो से लेकर मीजल्स के टीके लगवाने में भी गिरावट दर्ज हुई है।
बच्चे के जन्म लेने के साथ ही उसका टीकाकरण शुरू हो जाता है। बच्चे का टीकाकरण कार्ड भी बन जाता है। दो साल तक बच्चों को समय-समय पर लगातार टीके लगते रहते हैं। सरकारी अस्पतालों में भी ज्यादातर टीके नि:शुल्क अथवा रियायती दरों पर लगाए जाते हैं। मगर एनएफएचएस-4 से एनएफएचएस-5 सर्वे की रिपोर्ट की तुलना में पता चला है कि 12 से 23 महीने के बच्चों के टीकाकरण के मामले में काफी गिरावट दर्ज हुई है। वैक्सीनेशन कार्ड के आधार पर 12 से 23 महीने तक पूर्ण टीकाकरण कराने के मामलों में 16.9 फीसदी की कमी आई है। जबकि, साढ़े चार फीसदी 12 से 23 महीने के बच्चों को बीसीजी का टीका कम लगा है। मीजल्स का पहला टीका लगवाने के मामले में भी इसी उम्र के 6.4 फीसदी बच्चों की गिरावट दर्ज हुई है। खास बात ये है कि पिछली रिपोर्ट की तुलना में इस बार 16.4 प्रतिशत कम बच्चों ने पोलियों की तीन खुराक ली है। निजी चिकित्सा इकाइयों में 12-23 महीने बच्चों के टीकाकरण के ग्राफ में 4.3 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, सरकारी इकाइयों में इसका ग्राफ 6.4 प्रतिशत बढ़ा है।
ये आया अंतर
टीका एनएफएचएस-4 एनएफएचएस-5
पूर्ण टीकाकरण 62.7 फीसदी 44.5 फीसदी
बीसीजी 98.5 फीसदी 94.0 फीसदी
पेंटा/डीपीटी 77.7 फीसदी 69.2 फीसदी
मीजल्स 80.0 फीसदी 73.6 फीसदी
पोलियो 81.4 फीसदी 55.0 फीसदी
कोरोना काल में सारे काम प्रभावित हुए। इसमें टीकाकरण भी शामिल है। हालांकि, अब ग्राफ लगातार सुधर रहा है। अगले सर्वे की रिपोर्ट में काफी बेहतर परिणाम सामने आएंगे। - डॉ. रविशंकर, जिला टीकाकरण अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बच्चे के जन्म लेने के साथ ही उसका टीकाकरण शुरू हो जाता है। बच्चे का टीकाकरण कार्ड भी बन जाता है। दो साल तक बच्चों को समय-समय पर लगातार टीके लगते रहते हैं। सरकारी अस्पतालों में भी ज्यादातर टीके नि:शुल्क अथवा रियायती दरों पर लगाए जाते हैं। मगर एनएफएचएस-4 से एनएफएचएस-5 सर्वे की रिपोर्ट की तुलना में पता चला है कि 12 से 23 महीने के बच्चों के टीकाकरण के मामले में काफी गिरावट दर्ज हुई है। वैक्सीनेशन कार्ड के आधार पर 12 से 23 महीने तक पूर्ण टीकाकरण कराने के मामलों में 16.9 फीसदी की कमी आई है। जबकि, साढ़े चार फीसदी 12 से 23 महीने के बच्चों को बीसीजी का टीका कम लगा है। मीजल्स का पहला टीका लगवाने के मामले में भी इसी उम्र के 6.4 फीसदी बच्चों की गिरावट दर्ज हुई है। खास बात ये है कि पिछली रिपोर्ट की तुलना में इस बार 16.4 प्रतिशत कम बच्चों ने पोलियों की तीन खुराक ली है। निजी चिकित्सा इकाइयों में 12-23 महीने बच्चों के टीकाकरण के ग्राफ में 4.3 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, सरकारी इकाइयों में इसका ग्राफ 6.4 प्रतिशत बढ़ा है।
विज्ञापन
ये आया अंतर
टीका एनएफएचएस-4 एनएफएचएस-5
पूर्ण टीकाकरण 62.7 फीसदी 44.5 फीसदी
बीसीजी 98.5 फीसदी 94.0 फीसदी
पेंटा/डीपीटी 77.7 फीसदी 69.2 फीसदी
मीजल्स 80.0 फीसदी 73.6 फीसदी
पोलियो 81.4 फीसदी 55.0 फीसदी
कोरोना काल में सारे काम प्रभावित हुए। इसमें टीकाकरण भी शामिल है। हालांकि, अब ग्राफ लगातार सुधर रहा है। अगले सर्वे की रिपोर्ट में काफी बेहतर परिणाम सामने आएंगे। - डॉ. रविशंकर, जिला टीकाकरण अधिकारी।
विज्ञापन