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वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आए बच्चे और युवा, दूसरों का डर भी भगाया
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झांसी। कोरोना काल में लोगों को मरते देख हर किसी के मन में महामारी का डर बैठा था। असल शोर तो तब हुआ जब बच्चों को वैक्सीन लगवाने की बारी आई। इसमें कई माता-पिता संशय में थे तो कई बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे। इस स्थिति में स्कूल-कॉलेजों में टीकाकरण शिविर लगे तो बच्चे और युवा आगे आए। उन्होंने न सिर्फ वैक्सीन लगवाकर आस पड़ोस में जागरूकता फैलाकर दूसरों का डर दूर भगाया। अपने साथियों को भी प्रेरित किया।
अभी झांसी जनपद में 12 से 14 साल के 84660 बच्चों में 93 फीसदी को पहली और 64.2 प्रतिशत को दूसरी डोज लग चुकी है। वहीं, 15 से 17 साल के 140274 किशोरों में 102.3 फीसदी को पहली और 93.7 प्रतिशत को दूसरी डोज लगी है। जबकि, 18 से अधिक आयु के 14.82 लाख लोगों में 104.2 फीसदी को पहली और 93 प्रतिशत को दूसरी डोज लग चुकी है।
कोरोना वैक्सीन को लेकर बच्चों का कहना है कि जब तक उन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी, वह लोग घर से बाहर खेल नहीं पाते थे। वहीं युवाओं का मानना है कि वैक्सीन लगवाने में कोई खतरा नहीं है। जो इसे नहीं लगवा रहे हैं वह युवा, जिम, क्लब, कॉलेज और फ्रेंड सर्किल में नहीं जा पा रहे हैं। युवा निखिल और शुभि का कहना है कि कोरोना के डर से बाहर निकलने के लिए फ्रेंड सर्किल बहुत जरूरी है।
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केस-1
झांसी। वैक्सीन लगने से पहले मन में कई भ्रांतिया थीं, लगता था कि कहीं कुछ हो न जाए लेकिन डब पहली डोज लगी तो कोई साइड इफैक्टल भी नहीं हुआ। इससे कुछ हिम्मत बंधी। इसके बाद मैंने अपने बाकी दोस्तों को भी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया। अब हमारे ग्रुप में सभी को वैक्सीन लग चुकी है। अब मैं जिम, स्कूल और कोचिंग आराम से जाता हूं। हां अभी भी मास्क लगाना नहीं भूलता हूं।
कुंवर युवराज, लोहार कॉलोनी, सीपरी
केस-2
जिस तरह से कोरोना के कारण इतने लोगों की मौत हुई। वैक्सीन आई तो मुझे बहुत डर लग रहा था। वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही थीं। फिर मम्मी ने हिम्मत बंधाई। मैंने पहली डोज अपने स्कूल में लगवाई तो कोई दिक्कत नहीं हुई।हां दूसरी डोज में मुझे हल्का बुखार आ गया था। तब तो मैं डर गई थी, पर कुछ ही दिन में सब ठीक हो गया। अब मैं दूसरों को वैक्सीन के लिए प्रेरित करती हूं।
अन्वेषा पांडेय, बैंकर्स कॉलोनी, शिवपुरी
केस-3
कोरोना काल में मैंने मास्क बनवाकर लोगों को बांटे थे। जब वैक्सीन आई तब भी लोगों को लगातार जागरूक किया। मैंने खुद वैक्सीन लगवाई तो कई लोगों ने पूछा कि क्या कोई साइड इफैक्ट हुआ, मैंने कई लोगों को बताया कि वैक्सीन से कोई साइड इफैक्ट नहीं हुआ। सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है।
वैशाली माहेश्वरी, झोकनबाग
--
केस-4
कोरोना से जब लोग मर रहे थे, तब टीवी और मोबाइल पर जो स्थिति देखी, उसे देखकर बहुत डर लग रहा था। जब वैक्सीन आई तब भी लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी, खुद वैक्सीन लगवाई और मोहल्ले के लोगों को भी बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन बहुत कारगर है। जो लोग बाकी बचे हैं वह वैक्सीन लगाने में कोताही न बरतें।
कशिश वर्मा, खुशीपुरा
वैक्सीन का असर कितने दिन तक रहता है, इस पर चल रहा शोध
झांसी। पिछले कुछ समय से जिले में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। हालांकि, लोगों की स्थिति गंभीर नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से चार जुलाई तक झांसी में 453 कोविड पॉजिटिव हुए हैं। हालांकि, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमाशंकर सोनी का कहना है कि वैक्सीन बहुत कारगर साबित हुई है। आठ से नौ महीने बाद भी असर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। तभी 453 संक्रमितों में से एक भी रोगी गंभीर नहीं हुआ है। न ही किसी को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई है। मेडिकल कॉलेज में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अंशुल जैन के अनुसार वैक्सीन का असर कितने दिन तक रहता है, इस पर शोध चल रहा है। अब झांसी में लगभग सभी लोगों को पहली और अधिकतर को दूसरी डोज लग चुकी है।
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अभी झांसी जनपद में 12 से 14 साल के 84660 बच्चों में 93 फीसदी को पहली और 64.2 प्रतिशत को दूसरी डोज लग चुकी है। वहीं, 15 से 17 साल के 140274 किशोरों में 102.3 फीसदी को पहली और 93.7 प्रतिशत को दूसरी डोज लगी है। जबकि, 18 से अधिक आयु के 14.82 लाख लोगों में 104.2 फीसदी को पहली और 93 प्रतिशत को दूसरी डोज लग चुकी है।
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कोरोना वैक्सीन को लेकर बच्चों का कहना है कि जब तक उन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी, वह लोग घर से बाहर खेल नहीं पाते थे। वहीं युवाओं का मानना है कि वैक्सीन लगवाने में कोई खतरा नहीं है। जो इसे नहीं लगवा रहे हैं वह युवा, जिम, क्लब, कॉलेज और फ्रेंड सर्किल में नहीं जा पा रहे हैं। युवा निखिल और शुभि का कहना है कि कोरोना के डर से बाहर निकलने के लिए फ्रेंड सर्किल बहुत जरूरी है।
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केस-1
झांसी। वैक्सीन लगने से पहले मन में कई भ्रांतिया थीं, लगता था कि कहीं कुछ हो न जाए लेकिन डब पहली डोज लगी तो कोई साइड इफैक्टल भी नहीं हुआ। इससे कुछ हिम्मत बंधी। इसके बाद मैंने अपने बाकी दोस्तों को भी वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया। अब हमारे ग्रुप में सभी को वैक्सीन लग चुकी है। अब मैं जिम, स्कूल और कोचिंग आराम से जाता हूं। हां अभी भी मास्क लगाना नहीं भूलता हूं।
कुंवर युवराज, लोहार कॉलोनी, सीपरी
केस-2
जिस तरह से कोरोना के कारण इतने लोगों की मौत हुई। वैक्सीन आई तो मुझे बहुत डर लग रहा था। वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही थीं। फिर मम्मी ने हिम्मत बंधाई। मैंने पहली डोज अपने स्कूल में लगवाई तो कोई दिक्कत नहीं हुई।हां दूसरी डोज में मुझे हल्का बुखार आ गया था। तब तो मैं डर गई थी, पर कुछ ही दिन में सब ठीक हो गया। अब मैं दूसरों को वैक्सीन के लिए प्रेरित करती हूं।
अन्वेषा पांडेय, बैंकर्स कॉलोनी, शिवपुरी
केस-3
कोरोना काल में मैंने मास्क बनवाकर लोगों को बांटे थे। जब वैक्सीन आई तब भी लोगों को लगातार जागरूक किया। मैंने खुद वैक्सीन लगवाई तो कई लोगों ने पूछा कि क्या कोई साइड इफैक्ट हुआ, मैंने कई लोगों को बताया कि वैक्सीन से कोई साइड इफैक्ट नहीं हुआ। सुरक्षित रहने के लिए वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी है।
वैशाली माहेश्वरी, झोकनबाग
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केस-4
कोरोना से जब लोग मर रहे थे, तब टीवी और मोबाइल पर जो स्थिति देखी, उसे देखकर बहुत डर लग रहा था। जब वैक्सीन आई तब भी लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी, खुद वैक्सीन लगवाई और मोहल्ले के लोगों को भी बताया कि कोरोना से लड़ने के लिए वैक्सीन बहुत कारगर है। जो लोग बाकी बचे हैं वह वैक्सीन लगाने में कोताही न बरतें।
कशिश वर्मा, खुशीपुरा
वैक्सीन का असर कितने दिन तक रहता है, इस पर चल रहा शोध
झांसी। पिछले कुछ समय से जिले में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। हालांकि, लोगों की स्थिति गंभीर नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से चार जुलाई तक झांसी में 453 कोविड पॉजिटिव हुए हैं। हालांकि, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रमाशंकर सोनी का कहना है कि वैक्सीन बहुत कारगर साबित हुई है। आठ से नौ महीने बाद भी असर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। तभी 453 संक्रमितों में से एक भी रोगी गंभीर नहीं हुआ है। न ही किसी को अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आई है। मेडिकल कॉलेज में कोविड के नोडल अधिकारी डॉ. अंशुल जैन के अनुसार वैक्सीन का असर कितने दिन तक रहता है, इस पर शोध चल रहा है। अब झांसी में लगभग सभी लोगों को पहली और अधिकतर को दूसरी डोज लग चुकी है।