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एलकेजी छात्रा के साथ अश्लील हरकत का मामला
ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2015 12:52 AM IST
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मऊरानीपुर। नगर के एक विद्यालय की एलकेजी कक्षा की छात्रा के साथ स्कूल के ही चपरासी द्वारा लगातार कई दिनों से की जारही अश्लील हरकत के मामले में आज पीड़ित छात्रा को कलम बंद बयान के लिए झांसी न्यायालय ले जाया गया लेकिन उसके बयान दर्ज नहीं हो सके। अब पीड़िता के बयान बुधवार को होंगे।
पीड़िता के परिजनों द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया है कि स्कूल का चपरासी श्याम लाल पिछले कई दिनों से पांच वर्षीय बालिका के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था। इस बारे में स्कूल प्रबंधक अरुण गुप्ता से शिकायत की गई और उनसे विद्यालय में सीसी कैमरे लगवाने को कहा गया तो उन्होंने उल्टे उन्हें ही धमकाया। इस कांड की नगर में आज तीखी प्रतिक्रिया रही। मंगलवार को जैसे ही इस घटना की जानकारी नगरवासियों को हुई तो दर्जनों की संख्या में लोग विद्यालय पहुंच गए।
स्कूल में तैनात स्टाफ में से महिला कर्मचारी तो तत्काल बालिका की पहचान के लिए उपस्थित हो गईं, पर आरोपी चपरासी श्यामलाल निवासी अल्याई मोहल्ला को बालिका व उसके अभिभावकों के सामने लाने में एक घंटे का समय लग गया। इस बीच सूचना मिलने पर कोतवाली प्रभारी विक्रम सिंह भी स्कूल पहुंच गए। जैसे ही आरोपी श्यामलाल को पीड़िता के सामने लाया गया, बालिका फू ट- फू ट कर रोने लगी। उसने बताया कि यही अंकल उससे रोजाना बदतमीजी करते थे।
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पुलिस द्वारा जब आरोपी को विद्यालय से कोतवाली लाया गया तो भीड़ वहां भी पहुंच गई और तब तक मौजूद रही, जब तक कि श्यामलाल के खिलाफ पास्को एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं कर लिया गया। यह पहला मौका था कि किसी मामले में आरोपी या विद्यालय प्रबंधक के पक्ष में सिफ ारिश करने के लिए कोई भी व्यक्ति कोतवाली नहीं पहुंचा।
आक्रोशित भीड़ के साथ कोतवाली पहुंचने वालों में समाजवादी पार्टी के नेता, अधिवक्ता भी शामिल रहे। नगरवासियों का कहना है कि विद्यालय में जब सारा स्टाफ महिला रखा गया है, तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुरुष क्यों रखा गया, साथ ही उक्त कर्मचारी के चरित्र के बारे मे जानकारी क्यों नहीं की गई। अभिभावक अब अपने बच्चों को उक्त स्कूल भेजने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
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पीड़िता के परिजनों द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया है कि स्कूल का चपरासी श्याम लाल पिछले कई दिनों से पांच वर्षीय बालिका के साथ अभद्र व्यवहार कर रहा था। इस बारे में स्कूल प्रबंधक अरुण गुप्ता से शिकायत की गई और उनसे विद्यालय में सीसी कैमरे लगवाने को कहा गया तो उन्होंने उल्टे उन्हें ही धमकाया। इस कांड की नगर में आज तीखी प्रतिक्रिया रही। मंगलवार को जैसे ही इस घटना की जानकारी नगरवासियों को हुई तो दर्जनों की संख्या में लोग विद्यालय पहुंच गए।
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स्कूल में तैनात स्टाफ में से महिला कर्मचारी तो तत्काल बालिका की पहचान के लिए उपस्थित हो गईं, पर आरोपी चपरासी श्यामलाल निवासी अल्याई मोहल्ला को बालिका व उसके अभिभावकों के सामने लाने में एक घंटे का समय लग गया। इस बीच सूचना मिलने पर कोतवाली प्रभारी विक्रम सिंह भी स्कूल पहुंच गए। जैसे ही आरोपी श्यामलाल को पीड़िता के सामने लाया गया, बालिका फू ट- फू ट कर रोने लगी। उसने बताया कि यही अंकल उससे रोजाना बदतमीजी करते थे।
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पुलिस द्वारा जब आरोपी को विद्यालय से कोतवाली लाया गया तो भीड़ वहां भी पहुंच गई और तब तक मौजूद रही, जब तक कि श्यामलाल के खिलाफ पास्को एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं कर लिया गया। यह पहला मौका था कि किसी मामले में आरोपी या विद्यालय प्रबंधक के पक्ष में सिफ ारिश करने के लिए कोई भी व्यक्ति कोतवाली नहीं पहुंचा।
आक्रोशित भीड़ के साथ कोतवाली पहुंचने वालों में समाजवादी पार्टी के नेता, अधिवक्ता भी शामिल रहे। नगरवासियों का कहना है कि विद्यालय में जब सारा स्टाफ महिला रखा गया है, तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पुरुष क्यों रखा गया, साथ ही उक्त कर्मचारी के चरित्र के बारे मे जानकारी क्यों नहीं की गई। अभिभावक अब अपने बच्चों को उक्त स्कूल भेजने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।