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सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टर की कमी, रेफर किए जा रहे मरीज
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डॉक्टरो की कमी से मरीजों को झांसी रेफर किया जा रहा है।
- फोटो : ???? ????
सीएचसी और पीएचसी में डॉक्टर की कमी, रेफर किए जा रहे मरीज
झांसी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की बड़ी कमी है। किसी जगह फिजीशियन नहीं है तो कहीं सर्जन। वहीं, कई पीएचसी में तो एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में जरा-जरा से मर्ज पर भी मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों से झांसी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। ऐसे में सामान्य बीमारियों और दुर्घटनाओं तक का उपचार लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
झांसी में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 88 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें से सीएचसी पर 45 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 43 चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वहीं, पीएचसी में 33 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें 17 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 16 पद रिक्त हैं। हाल ये है कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो एक भी चिकित्सक नहीं है। इन हालातों में खासकर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं। खासकर कोरोना के दौर में मरीजों को उपचार कराने के लिए काफी समस्या हो रही है।
यहां एक भी डॉक्टर नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धमना, पीएचसी मुडई, पीएचसी पूंछ, पीएचसी लोहागढ़, पीएचसी मारकुंआ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटैरा, पीएचसी अक्सेव में एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में यहां पीएचसी खोलने का कोई लाभ ही आमजन को नहीं मिल रहा है।
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यहां चिकित्सकों की काफी कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरुआसागर छह में से पांच, सीएचसी मोंठ में आठ में से तीन, समथर में छह में चार, सीएचसी बामौर में आठ में पांच, सीएचसी गरौठा में छह में पांच, सीएचसी बंगरा में आठ में से चार, सीएचसी रानीपुर में छह में पांच, सीएचसी मऊरानीपुर में आठ में चार डॉक्टर नहीं हैं।
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झांसी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की बड़ी कमी है। किसी जगह फिजीशियन नहीं है तो कहीं सर्जन। वहीं, कई पीएचसी में तो एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में जरा-जरा से मर्ज पर भी मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों से झांसी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। ऐसे में सामान्य बीमारियों और दुर्घटनाओं तक का उपचार लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
झांसी में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 88 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें से सीएचसी पर 45 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 43 चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। वहीं, पीएचसी में 33 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें 17 डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि, 16 पद रिक्त हैं। हाल ये है कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो एक भी चिकित्सक नहीं है। इन हालातों में खासकर ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं। खासकर कोरोना के दौर में मरीजों को उपचार कराने के लिए काफी समस्या हो रही है।
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यहां एक भी डॉक्टर नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धमना, पीएचसी मुडई, पीएचसी पूंछ, पीएचसी लोहागढ़, पीएचसी मारकुंआ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटैरा, पीएचसी अक्सेव में एक भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे में यहां पीएचसी खोलने का कोई लाभ ही आमजन को नहीं मिल रहा है।
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यहां चिकित्सकों की काफी कमी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरुआसागर छह में से पांच, सीएचसी मोंठ में आठ में से तीन, समथर में छह में चार, सीएचसी बामौर में आठ में पांच, सीएचसी गरौठा में छह में पांच, सीएचसी बंगरा में आठ में से चार, सीएचसी रानीपुर में छह में पांच, सीएचसी मऊरानीपुर में आठ में चार डॉक्टर नहीं हैं।