{"_id":"66aeb31f763c311a180d1e34","slug":"certificate-course-of-cpr-in-medical-college-from-16-jhansi-news-c-11-jhs1002-364249-2024-08-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में सीपीआर का सर्टिफिकेट कोर्स 16 से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में सीपीआर का सर्टिफिकेट कोर्स 16 से
विज्ञापन
- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने सीनियर डॉक्टर को बनाया इंस्ट्रक्टर
- तीन माह बाद पुलिस, दमकल कर्मी और शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज में सीपीआर (कार्डियक पल्मोनरी रिससिटेशन) का तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स 16 अगस्त से शुरू हो रहा है। इंटर्न, रेजिडेंट्स, पैरामेडिकल कर्मी इसमें प्रतिभाग करेंगे, जिन्हें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट देगा। ट्रेंड डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मी तीन माह बाद शहर में शिक्षक, पुलिस और दमकल कर्मियों आदि को सीपीआर सिखाएंगे ताकि जरूरत पर वे अपनी सेवाएं दे सकें।
मेडिकल कॉलेज के डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और एसजीपीजीआई लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से सीपीआर बेसिक लाइफ सपोर्ट व सीपीआर एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देकर टिप्स बताए गए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने उन्हें और डॉ. अंशुल जैन, डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. छवि सेठी को मेडिकल कॉलेज में तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के लिए इंस्ट्रक्टर बनाया है। पहली ट्रेनिंग 16 से 18 अगस्त तक पैरा मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी, जिसमें 30 रेजिडेंट्स व इंटर्न शामिल होंगे। यह क्रम आगे भी चलता रहेगा।
सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले डॉक्टर व पैरामेडिकल कर्मियों को भी इंस्ट्रक्टर बनाया जाएगा, जो तीन माह बाद पुलिस कर्मियों, दमकल कर्मियों, शिक्षकों आदि को सीपीआर देना सिखाएंगे। इन लोगों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की तरफ से सीपीआर की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट दिया जाएगा ताकि ये आपात स्थिति में लोगों की जान बचा सकें। डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि ट्रेन, हवाई जहाज, सार्वजनिक स्थान, कार्यालय आदि जगह कुछ को हार्ट अटैक पड़ता है और लोग चाहकर भी उसे बचाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर पाते।
विज्ञापन
0- क्या होता है सीपीआर
सीपीआर की जरूरत तब होती है जब किसी की सांस रुक जाती है या दिल रुक जाता है। पीड़ित के सीने के बीचोबीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए दबाया जाता है। खास बात यह है कि यह कोई भी सीखकर दे सकता है, इसमें छाती को दबाना और मुंह से सांस देना (माउथ टू माउथ रेस्पिरेशन) शामिल होता है।
विज्ञापन
- तीन माह बाद पुलिस, दमकल कर्मी और शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मेडिकल कॉलेज में सीपीआर (कार्डियक पल्मोनरी रिससिटेशन) का तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स 16 अगस्त से शुरू हो रहा है। इंटर्न, रेजिडेंट्स, पैरामेडिकल कर्मी इसमें प्रतिभाग करेंगे, जिन्हें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ट्रेनिंग सर्टिफिकेट देगा। ट्रेंड डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मी तीन माह बाद शहर में शिक्षक, पुलिस और दमकल कर्मियों आदि को सीपीआर सिखाएंगे ताकि जरूरत पर वे अपनी सेवाएं दे सकें।
मेडिकल कॉलेज के डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और एसजीपीजीआई लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से सीपीआर बेसिक लाइफ सपोर्ट व सीपीआर एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देकर टिप्स बताए गए। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने उन्हें और डॉ. अंशुल जैन, डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. छवि सेठी को मेडिकल कॉलेज में तीन दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के लिए इंस्ट्रक्टर बनाया है। पहली ट्रेनिंग 16 से 18 अगस्त तक पैरा मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी, जिसमें 30 रेजिडेंट्स व इंटर्न शामिल होंगे। यह क्रम आगे भी चलता रहेगा।
विज्ञापन
सर्टिफिकेट कोर्स करने वाले डॉक्टर व पैरामेडिकल कर्मियों को भी इंस्ट्रक्टर बनाया जाएगा, जो तीन माह बाद पुलिस कर्मियों, दमकल कर्मियों, शिक्षकों आदि को सीपीआर देना सिखाएंगे। इन लोगों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज की तरफ से सीपीआर की ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट दिया जाएगा ताकि ये आपात स्थिति में लोगों की जान बचा सकें। डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि ट्रेन, हवाई जहाज, सार्वजनिक स्थान, कार्यालय आदि जगह कुछ को हार्ट अटैक पड़ता है और लोग चाहकर भी उसे बचाने की दिशा में कोई प्रयास नहीं कर पाते।
विज्ञापन
0- क्या होता है सीपीआर
सीपीआर की जरूरत तब होती है जब किसी की सांस रुक जाती है या दिल रुक जाता है। पीड़ित के सीने के बीचोबीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए दबाया जाता है। खास बात यह है कि यह कोई भी सीखकर दे सकता है, इसमें छाती को दबाना और मुंह से सांस देना (माउथ टू माउथ रेस्पिरेशन) शामिल होता है।