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बच्चे की एक से दूसरी आंख तक पहुंचा मोतियाबिंद, होगा फ्री इलाज
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झांसी। जन्म से ही मोतियाबिंद की समस्या से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 15 बच्चे जांच के लिए आए, इनमें से पांच को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया है। एक बालक में तो एक से दूसरी आंख में मोतियाबिंद पहुंच गया है।
आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि शिविर में सिर्फ पांच बच्चों की आंखों के इलाज की संभावना थी। इसमें से तीन बच्चों का ऑपरेशन जिला अस्पताल में ही हो जाएगा। दो बच्चों को जटिलता के कारण ऑपरेशन के लिए सीतापुर या चित्रकूट भेजा जाएगा। शिविर में नेत्र चिकित्सक डॉ. लक्ष्मी प्रसाद ने की। बच्चों में मोतियाबिंद के कारणों को दर्शाते हुए बताया कि बच्चों में मोतियाबिंद तीन कारणों से होता है। पहला आनुवांशिक, दूसरा यदि गर्भवती शुगर या ह्रदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो और तीसरा यदि गर्भावस्था के समय महिला संक्रमण से ग्रसित होती है। इन हालातों में बच्चों में जन्म से ही मोतियाबिंद होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐेसे में बच्चे के जन्म के बाद जल्द से जल्द ऑपरेशन करा लेना चाहिए। वरना आंख की रोशनी वापस नहीं आती है। उन्होंने बताया कि कई बार जरूरी नहीं कि जन्म पर ही मोतियाबिंद हो, बल्कि जन्म के दो से तीन साल में भी यह उभरकर आता है।
एक आंख का हो चुका ऑपरेशन
शिविर में हंसारी निवासी दिनेश पाल अपने 11 साल के भांजे प्रशांत को लेकर शिविर में आए। प्रशांत का डेढ़ महीने पहले ही एक आंख का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है। कुछ समय बाद पता चला कि संक्रमण दूसरी आंख में भी फैल गया है। दिनेश के मुताबिक बचपन से ही प्रशांत की आंखों में ऐसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा था। फिर एक दिन अचानक एहसास हुआ कि वह एक आंख बंद करके देखने की कोशिश करता है। जब डॉक्टर को दिखाया तो उसकी एक आंख में पूरी तरह से मोतियाबिंद फैल चुका था। ऑपरेशन के बाद अब दूसरी आंख में वही समस्या होने की वजह से जांच कराने के लिए लाए हैं।
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आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि शिविर में सिर्फ पांच बच्चों की आंखों के इलाज की संभावना थी। इसमें से तीन बच्चों का ऑपरेशन जिला अस्पताल में ही हो जाएगा। दो बच्चों को जटिलता के कारण ऑपरेशन के लिए सीतापुर या चित्रकूट भेजा जाएगा। शिविर में नेत्र चिकित्सक डॉ. लक्ष्मी प्रसाद ने की। बच्चों में मोतियाबिंद के कारणों को दर्शाते हुए बताया कि बच्चों में मोतियाबिंद तीन कारणों से होता है। पहला आनुवांशिक, दूसरा यदि गर्भवती शुगर या ह्रदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो और तीसरा यदि गर्भावस्था के समय महिला संक्रमण से ग्रसित होती है। इन हालातों में बच्चों में जन्म से ही मोतियाबिंद होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐेसे में बच्चे के जन्म के बाद जल्द से जल्द ऑपरेशन करा लेना चाहिए। वरना आंख की रोशनी वापस नहीं आती है। उन्होंने बताया कि कई बार जरूरी नहीं कि जन्म पर ही मोतियाबिंद हो, बल्कि जन्म के दो से तीन साल में भी यह उभरकर आता है।
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एक आंख का हो चुका ऑपरेशन
शिविर में हंसारी निवासी दिनेश पाल अपने 11 साल के भांजे प्रशांत को लेकर शिविर में आए। प्रशांत का डेढ़ महीने पहले ही एक आंख का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है। कुछ समय बाद पता चला कि संक्रमण दूसरी आंख में भी फैल गया है। दिनेश के मुताबिक बचपन से ही प्रशांत की आंखों में ऐसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा था। फिर एक दिन अचानक एहसास हुआ कि वह एक आंख बंद करके देखने की कोशिश करता है। जब डॉक्टर को दिखाया तो उसकी एक आंख में पूरी तरह से मोतियाबिंद फैल चुका था। ऑपरेशन के बाद अब दूसरी आंख में वही समस्या होने की वजह से जांच कराने के लिए लाए हैं।
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