{"_id":"6188305746aea7288b1fe349","slug":"by-may-the-breed-of-50-thousand-animals-will-improve-jhansi-news-jhs208294029","type":"story","status":"publish","title_hn":"मई तक सुधर जाएगी 50 हजार पशुओं की नस्ल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मई तक सुधर जाएगी 50 हजार पशुओं की नस्ल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। छुट्टा जानवरों से निजात दिलाने और बुंदेलखंड में गायों की नस्ल सुधारने के लिए जिले में गायों और भैंसों का नस्ल सुधार अभियान चल रहा है। जानवरों की नई नस्ल तैयार होने के बाद दूध के उत्पादन में बढ़ोत्तरी होगी। माना जा रहा है कि इसके बाद छुट्टा जानवरों की समस्या का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। पचास हजार भैंसों और गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराने का लक्ष्य है, जिसे मई तक पूरा कर लिया जाएगा।
बुंदेलखंड में देशी गायें और भैंसें हैं, लेकिन अधिक दूध नहीं देती हैं। भैंसों में दो लीटर और गायों में एक से डेढ़ लीटर दूध निकलता है। बुंदेलखंड में खेती भी मानसून पर निर्भर है। इस कारण किसान के पास इतना भूसा भी नहीं बचता है कि वह अपने जानवरों का पेट भर सके। इस कारण गायों को छुट्टा छोड़ देता है। दूध का उत्पादन बढ़ाने व गायों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
इसमें भैंस में मुर्रा प्रजाति का बीज और गायों में थारपरकर और साहीवाल प्रजाति के बीज से कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है। अभियान 31 मई तक चलेगा। इसके अंतर्गत जिले की पचास हजार गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कर उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा।
विज्ञापन
दस से पंद्रह लीटर दूध निकलता है
थारपरकर नस्ल की गाय में दस से पंद्रह लीटर दूध निकलता है। राजस्थान में पाई जाने वाली इस गाय को बुंदेलखंड का वातावरण रास आता है।
जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इससे गायों और भैंसों की नस्ल में सुधार होगा, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा। इससे उम्मीद है कि जब गायों में ज्यादा दूध निकलने लगेगा तो लोग छुट्टा नहीं छोड़ेंगे।
- डा. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
विज्ञापन
बुंदेलखंड में देशी गायें और भैंसें हैं, लेकिन अधिक दूध नहीं देती हैं। भैंसों में दो लीटर और गायों में एक से डेढ़ लीटर दूध निकलता है। बुंदेलखंड में खेती भी मानसून पर निर्भर है। इस कारण किसान के पास इतना भूसा भी नहीं बचता है कि वह अपने जानवरों का पेट भर सके। इस कारण गायों को छुट्टा छोड़ देता है। दूध का उत्पादन बढ़ाने व गायों को छुट्टा छोड़ने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है।
विज्ञापन
इसमें भैंस में मुर्रा प्रजाति का बीज और गायों में थारपरकर और साहीवाल प्रजाति के बीज से कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा है। अभियान 31 मई तक चलेगा। इसके अंतर्गत जिले की पचास हजार गायों और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कर उनकी नस्ल में सुधार किया जाएगा।
विज्ञापन
दस से पंद्रह लीटर दूध निकलता है
थारपरकर नस्ल की गाय में दस से पंद्रह लीटर दूध निकलता है। राजस्थान में पाई जाने वाली इस गाय को बुंदेलखंड का वातावरण रास आता है।
जानवरों का कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इससे गायों और भैंसों की नस्ल में सुधार होगा, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा। इससे उम्मीद है कि जब गायों में ज्यादा दूध निकलने लगेगा तो लोग छुट्टा नहीं छोड़ेंगे।
- डा. योगेंद्र सिंह तोमर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी