{"_id":"62d46777d986ed242f4a5952","slug":"business-done-leaving-government-job-now-giving-employment-to-300-jhansi-news-jhs224991940","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी नौकरी छोड़ किया कारोबार, अब 300 को दे रहे हैं रोजगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी नौकरी छोड़ किया कारोबार, अब 300 को दे रहे हैं रोजगार
विज्ञापन
झांसी। पढ़ाई पूरी कर अच्छी सरकारी नौकरी हासिल करना ज्यादातर लोगों की हसरत होती है। महानगर में रहने वाले संतोष सूरी ने भी विद्यार्थी जीवन में यह सपना देखा था, जो पूरा भी हो गया था। लेकिन, बीएचईएल में 15 साल नौकरी करने के बाद छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने स्वयं का कारोबार शुरू किया। मेहनत और काबिलियत के बल पर आज वे तीन फैक्टरियों के मालिक हैं, जिनमें सीधे तौर पर वे 300 लोगों को रोजगार दिए हुए हैं। नौकरी में रहते हुए जहां उन्हें महीने की महज सात हजार रुपये तनख्वाह मिलती थी तो वहीं अब उनका सालाना टर्नओवर करोड़ों में है।
कैलाश रेजीडेंसी निवासी संतोष सूरी ने झांसी पॉलिटेक्निक से मेकेनिकल डिप्लोमा हासिल किया था। इसके तुरंत बाद उन्हें 1980 में बीएचईएल में डिजाइनर के पद पर नौकरी मिल गई थी। शुरुआत में नौकरी में उन्हें बहुत अच्छा लगा, परंतु कुछ समय बाद महसूस होने लगा कि नौकरी में रहकर वे केवल अपने व परिवार की बेहतरी के बारे में ही सोच सकते हैं। जबकि, समाज में ऐसे तमाम लोग हैं, जिनके पास पर्याप्त योग्यता है, बावजूद बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पाया कि देश में ऐसे कई आइटम विदेशों से आ रहे हैं, जिनका उत्पादन आसानी से देश में कहीं भी किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात इससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इसी इरादे के साथ उन्होंने 1995 में बीएचईएल की नौकरी छोड़ दी और अपना खुद का कारोबार शुरू किया। उन्होंने विद्युत ट्रांसफार्मर के उपकरण बनाने की फैक्टरी शुरू की। जो अच्छी कारोबारी समझ और उत्पाद की उच्च गुणवत्ता की वजह से चल पड़ी। इसके बाद उन्होंने दो और फैक्टरी स्थापित कीं। इनमें से एक हाल ही में शुरू की है। वे एलईडी बल्ब और ट्यूबलाइट के कवर भी बनाते हैं, जिनकी आपूर्ति रेलवे के साथ देश की नामचीन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में करते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, टर्की, इजिप्ट, दुबई व सिंगापुर में भी वे अपने उत्पाद निर्यात करते हैं।
परिवार को रास नहीं आया था फैसला
झांसी। संतोष सूरी ने बताया कि बीएचईएल की नौकरी छोड़ने का उनका फैसला परिवार के लोगों को कतई रास नहीं आया था। लेकिन, उन्होंने पक्का इरादा कर लिया था। उन्हें भरोसा था कि जो उन्होंने सोचा है, उसे करने में कामयाब हो जाएंगे। संतोष बताते हैं कि जितना सोचा था, उससे कहीं अधिक हासिल कर चुके हैं। अपने कारखानों में लोगों को काम करते देखकर दिल को खुशी हासिल होती है।
विज्ञापन
नौकरी के पीछे न भागें, खुद का कारोबार करें
झांसी। संतोष सूरी कहते हैं कि जब उन्होंने कारोबार शुरू किया था तब कारोबारियों को ज्यादा सहूलियतें नहीं मिलती थी। आज हालात एकदम इतर है। सरकार का जोर स्टार्टअप पर है। इसके लिए तमाम सहूलियतें भी दी जा रही हैं। आज स्वयं का रोजगार स्थापित करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इसके जरिये आप दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।
विज्ञापन
कैलाश रेजीडेंसी निवासी संतोष सूरी ने झांसी पॉलिटेक्निक से मेकेनिकल डिप्लोमा हासिल किया था। इसके तुरंत बाद उन्हें 1980 में बीएचईएल में डिजाइनर के पद पर नौकरी मिल गई थी। शुरुआत में नौकरी में उन्हें बहुत अच्छा लगा, परंतु कुछ समय बाद महसूस होने लगा कि नौकरी में रहकर वे केवल अपने व परिवार की बेहतरी के बारे में ही सोच सकते हैं। जबकि, समाज में ऐसे तमाम लोग हैं, जिनके पास पर्याप्त योग्यता है, बावजूद बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने पाया कि देश में ऐसे कई आइटम विदेशों से आ रहे हैं, जिनका उत्पादन आसानी से देश में कहीं भी किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात इससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इसी इरादे के साथ उन्होंने 1995 में बीएचईएल की नौकरी छोड़ दी और अपना खुद का कारोबार शुरू किया। उन्होंने विद्युत ट्रांसफार्मर के उपकरण बनाने की फैक्टरी शुरू की। जो अच्छी कारोबारी समझ और उत्पाद की उच्च गुणवत्ता की वजह से चल पड़ी। इसके बाद उन्होंने दो और फैक्टरी स्थापित कीं। इनमें से एक हाल ही में शुरू की है। वे एलईडी बल्ब और ट्यूबलाइट के कवर भी बनाते हैं, जिनकी आपूर्ति रेलवे के साथ देश की नामचीन इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में करते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, टर्की, इजिप्ट, दुबई व सिंगापुर में भी वे अपने उत्पाद निर्यात करते हैं।
विज्ञापन
परिवार को रास नहीं आया था फैसला
झांसी। संतोष सूरी ने बताया कि बीएचईएल की नौकरी छोड़ने का उनका फैसला परिवार के लोगों को कतई रास नहीं आया था। लेकिन, उन्होंने पक्का इरादा कर लिया था। उन्हें भरोसा था कि जो उन्होंने सोचा है, उसे करने में कामयाब हो जाएंगे। संतोष बताते हैं कि जितना सोचा था, उससे कहीं अधिक हासिल कर चुके हैं। अपने कारखानों में लोगों को काम करते देखकर दिल को खुशी हासिल होती है।
विज्ञापन
नौकरी के पीछे न भागें, खुद का कारोबार करें
झांसी। संतोष सूरी कहते हैं कि जब उन्होंने कारोबार शुरू किया था तब कारोबारियों को ज्यादा सहूलियतें नहीं मिलती थी। आज हालात एकदम इतर है। सरकार का जोर स्टार्टअप पर है। इसके लिए तमाम सहूलियतें भी दी जा रही हैं। आज स्वयं का रोजगार स्थापित करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इसके जरिये आप दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।