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Jhansi News: स्टैंड न होने से सड़क पर खड़ी होती हैं बसें
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ओमकार सिंह
एरच। नगर में बस स्टैंड न होने से बसें सड़क पर खड़ी होती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है। यात्री प्रतीक्षालय में समुचित व्यवस्था न होने के कारण यात्री इधर-उधर भटकने को मजबूर रहते हैं।
एरच से लगभग दो दर्जन गांवों का संपर्क है। यहां से पूंछ, गुरसराय, गरौठा, रानीपुर, मऊरानीपुर, टीकमगढ़ और छतरपुर के लिए लोग यात्रा करते हैं। इन रूटों पर जाने वाली इन बसों का यह ठहराव होता है। नगर में अभी तक बस स्टैंड के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं हुआ है और न ही इसका निर्माण हो सका है। जागरूक लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से मांग की, लेकिन यह मांग हमेशा दबा दी गई। बढ़ती आबादी के बावजूद स्थायी बस स्टैंड नहीं बन पाया है। एरच और कई निकटवर्ती गांवों के लोगों को एरच बाईपास पर घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है। बसों को सड़क पर खड़ा करके यात्रियों को बैठाना पड़ता है, जिससे कई घटनाएं हो चुकी हैं।
हाल ही में नगर पंचायत ने एरच बाईपास पर यात्रियों को गर्मी से राहत देने के लिए टिन शेड की व्यवस्था की है। लेकिन, इसमें बैठने की सुविधा नहीं है। इससे यात्रियों को बसों के इंतजार में परेशानी का सामना करना पड़ता है। (संवाद)
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बस स्टैंड के लिए नगर पंचायत बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। सहमति के बाद जमीन का चयन कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - लालधर सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत-एरच
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बंगरा में नहीं रुकतीं रोडवेज बसें
बंगरा। झांसी-खजुराहो हाईवे पर स्थित बंगरा में रोडवेज बसें निर्धारित स्थानों पर नहीं रुकतीं हैं। यात्रियों के बसों का इंतजार करने के बीच चालक तेजी से फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। मऊरानीपुर और महोबा से झांसी जाने वाली बसें बंगरा में विशेष रूप से नहीं रोकी जातीं। स्थानीय विनय कुमार, रामजी, अरविंद, कुलदीप आदि ने इस मनमानी पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ड्राइवरों की लापरवाही से परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। लोगों ने उच्च अधिकारियों से लापरवाह ड्राइवरों पर सख्ती और बंगरा में सभी बसों को रोकने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश लिटोरिया ने चेतावनी दी कि मनमानी न रुकने पर यूनियन प्रदर्शन करेगी। संवाद
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चिरगांव में स्थायी बस स्टैंड नहीं, यातायात प्रभावित
चिरगांव। नगर में स्थायी बस स्टैंड न होने से रोडवेज और अन्य यात्री बसें सड़कों पर रुकती हैं। इससे प्रमुख तिराहों और बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। झांसी से आने-जाने वाली बसें भांडेर तिराहा, पुराना बस स्टैंड और रामनगर तिराहे पर रुकती हैं। गुरसराय-गरौठा की बसें भी रामनगर तिराहे पर खड़ी होकर सवारियां बैठाती हैं। नगर निगम द्वारा संचालित एसी बसें और मैजिक-आपे भी तिराहे पर आसपास खड़े रहते हैं। नगरपालिका रामलीला मैदान को अपना बस स्टैंड बताती है, लेकिन वहां निजी वाहन खड़े रहते हैं। लोगों ने नगर में स्थायी और व्यवस्थित बस स्टैंड बनाए जाने की मांग की है। संवाद
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खजुराहो हाईवे पर यात्री प्रतीक्षालय न होने से परेशानी
खिलारा। झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसरिया, धायपुरा और बरुआमाफ गांवों के बस स्टैंडों पर यात्री प्रतीक्षालय नहीं हैं। यात्रियों को खुले में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे उन्हें गर्मी, बारिश और सर्दी में परेशानी होती है। राजमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों से यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। जबकि, ग्रामीण, विद्यार्थी, महिलाएं, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग प्रतिदिन इन स्टैंडों से आवागमन करते हैं। बस में देरी होने पर उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय शिवदयाल कुशवाहा और रामकिशोर कुशवाहा सहित ग्रामीणों ने प्रतीक्षालय बनवाने की मांग की है। संवाद
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एरच। नगर में बस स्टैंड न होने से बसें सड़क पर खड़ी होती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है। यात्री प्रतीक्षालय में समुचित व्यवस्था न होने के कारण यात्री इधर-उधर भटकने को मजबूर रहते हैं।
एरच से लगभग दो दर्जन गांवों का संपर्क है। यहां से पूंछ, गुरसराय, गरौठा, रानीपुर, मऊरानीपुर, टीकमगढ़ और छतरपुर के लिए लोग यात्रा करते हैं। इन रूटों पर जाने वाली इन बसों का यह ठहराव होता है। नगर में अभी तक बस स्टैंड के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं हुआ है और न ही इसका निर्माण हो सका है। जागरूक लोगों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से मांग की, लेकिन यह मांग हमेशा दबा दी गई। बढ़ती आबादी के बावजूद स्थायी बस स्टैंड नहीं बन पाया है। एरच और कई निकटवर्ती गांवों के लोगों को एरच बाईपास पर घंटों बस का इंतजार करना पड़ता है। बसों को सड़क पर खड़ा करके यात्रियों को बैठाना पड़ता है, जिससे कई घटनाएं हो चुकी हैं।
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हाल ही में नगर पंचायत ने एरच बाईपास पर यात्रियों को गर्मी से राहत देने के लिए टिन शेड की व्यवस्था की है। लेकिन, इसमें बैठने की सुविधा नहीं है। इससे यात्रियों को बसों के इंतजार में परेशानी का सामना करना पड़ता है। (संवाद)
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बस स्टैंड के लिए नगर पंचायत बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा। सहमति के बाद जमीन का चयन कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - लालधर सिंह यादव, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत-एरच
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बंगरा में नहीं रुकतीं रोडवेज बसें
बंगरा। झांसी-खजुराहो हाईवे पर स्थित बंगरा में रोडवेज बसें निर्धारित स्थानों पर नहीं रुकतीं हैं। यात्रियों के बसों का इंतजार करने के बीच चालक तेजी से फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। मऊरानीपुर और महोबा से झांसी जाने वाली बसें बंगरा में विशेष रूप से नहीं रोकी जातीं। स्थानीय विनय कुमार, रामजी, अरविंद, कुलदीप आदि ने इस मनमानी पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ड्राइवरों की लापरवाही से परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। लोगों ने उच्च अधिकारियों से लापरवाह ड्राइवरों पर सख्ती और बंगरा में सभी बसों को रोकने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष अखिलेश लिटोरिया ने चेतावनी दी कि मनमानी न रुकने पर यूनियन प्रदर्शन करेगी। संवाद
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चिरगांव में स्थायी बस स्टैंड नहीं, यातायात प्रभावित
चिरगांव। नगर में स्थायी बस स्टैंड न होने से रोडवेज और अन्य यात्री बसें सड़कों पर रुकती हैं। इससे प्रमुख तिराहों और बाजार क्षेत्र में यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। झांसी से आने-जाने वाली बसें भांडेर तिराहा, पुराना बस स्टैंड और रामनगर तिराहे पर रुकती हैं। गुरसराय-गरौठा की बसें भी रामनगर तिराहे पर खड़ी होकर सवारियां बैठाती हैं। नगर निगम द्वारा संचालित एसी बसें और मैजिक-आपे भी तिराहे पर आसपास खड़े रहते हैं। नगरपालिका रामलीला मैदान को अपना बस स्टैंड बताती है, लेकिन वहां निजी वाहन खड़े रहते हैं। लोगों ने नगर में स्थायी और व्यवस्थित बस स्टैंड बनाए जाने की मांग की है। संवाद
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खजुराहो हाईवे पर यात्री प्रतीक्षालय न होने से परेशानी
खिलारा। झांसी-खजुराहो राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसरिया, धायपुरा और बरुआमाफ गांवों के बस स्टैंडों पर यात्री प्रतीक्षालय नहीं हैं। यात्रियों को खुले में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे उन्हें गर्मी, बारिश और सर्दी में परेशानी होती है। राजमार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों से यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। जबकि, ग्रामीण, विद्यार्थी, महिलाएं, बुजुर्ग और नौकरीपेशा लोग प्रतिदिन इन स्टैंडों से आवागमन करते हैं। बस में देरी होने पर उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय शिवदयाल कुशवाहा और रामकिशोर कुशवाहा सहित ग्रामीणों ने प्रतीक्षालय बनवाने की मांग की है। संवाद