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प्राकृतिक खेती का हब बनेगा बुंदेलखंड, सातों जिलों में हो रहा उत्पादन

Wed, 29 Jun 2022 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jun 2022 01:18 AM IST
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Bundelkhand will become the hub of natural farming, production is happening in all the seven districts
झांसी। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा लगातार जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के गंगा किनारे वाले जिलों के साथ बुंदेलखंड के साताें जिलों को भी इसमें शामिल किया गया है। ऐसे में बुंदेलखंड अब प्राकृतिक खेती का हब बनेगा।
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बुंदेलखंड के सात जिले झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा में डेढ़ हजार किसान पांच हजार एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती कर कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वह सिर्फ गो आधारित खेती करते हैं जिसमें गोमूत्र बने पदार्थ शामिल हैं।
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जनपद के किसान श्याम बिहारी गुप्ता बताते हैं कि वह तीन एकड़ में प्राकृतिक खेती वर्षों से करते आ रहे हैं, उन्होंने एफपीओ बनवाकर लोगों को इससे जोड़ा है। वहीं, चिरगांव के किसान धर्मेँद्र नामदेव बताते हैं कि दो एकड़ भूमि में दलहनी, तिलहनी, बेल, सब्जी उगाकर देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी अशोक बताते हैं कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है, इसके साथ ही इस खेती के माध्यम से किसान कम समय में दोहरा लाभ भी कमा रहे हैं। इससे फसलों की उत्पादकता क्षमता बढ़ती है। इसमें किसी भी तरह का रसायन का प्रयोग नहीं होता है जिससे इनकी मांग भी ज्यादा होती है। आने वाले समय में प्राकृतिक खेती का हब बुंदेलखंड बनेगा।
ये फसलें उगाई जा रहीं
गेहूं, मक्का, मूंगफली, उड़द, तिल, सरसो, चना, मटर, मसूर, दलहनी, तिलहनी, सब्जी, बेलदार पौधे का उत्पादन किया जा रहा है।
ऐसे की जाती है खेती
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गो आधारित प्राकृ तिक खेती के लिए केवल गोमूत्र, गोबर, गुड़, बेसन, पानी, बीज का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मुख्यत: जीवा अमृत, धनजीवा अमृत, बीज शोधन, फसल सुरक्षा आदि प्रक्रिया होती है। एक एकड़ जमीन में 10 किलो गोबर, पांच लीटर गोमूत्र, एक किलो गुड़, एक किलो बेसन, 200 ग्राम मिट्टी, 200 लीटर पानी का प्रयोग होता है। इन सबका प्रयोग कर इन्हें चार प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है तब जाकर फसल तैयार होती है।

बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। अभी कुछ किसान प्राकृतिक खेती का काम रहे हैं। अब सरकार ने घोषणा की है तो किसानों का दायरा और रकबा बढ़ाया जाएगा। - राजित राम, संयुक्त कृषि निदेशक
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