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Jhansi News: बुंदेलखंड विवि को मिला कैटेगरी-1 का दर्जा

Tue, 15 Jul 2025 02:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 15 Jul 2025 02:03 AM IST
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Bundelkhand University got category-1 status

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से कैटेगरी-1 का दर्जा मिल गया है। यह उपलब्धि हासिल करने वाला बीयू प्रदेश का चौथा विश्वविद्यालय बन गया है। वहीं, देश में 24वां विश्वविद्यालय होगा। यह दर्जा मिलने के बाद विश्वविद्यालय बिना यूजीसी की अनुमति के नए पाठ्यक्रम शुरू कर सकेगा। विदेशी शिक्षकों की नियुक्ति और विदेशी छात्रों को दाखिले भी देगा। ऑनलाइन डिस्टेंसिंग (ओडीएल) पाठ्यक्रम और ऑनलाइन कोर्स भी शुरू कर सकेगा। इस उपलब्धि का विश्वविद्यालय परिसर में जश्न मनाया गया।



बीयू को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से कैटेगरी-एक विवि का दर्जा मिला है। यह सम्मान संस्थागत योग्यता, अकादमिक उत्कृष्टता के साथ प्रशासनिक पारदर्शिता, अनुसंधान क्षमता और नवाचारशील सोच का सशक्त प्रदर्शन है। इस उपलब्धि से बीयू देश के चुनिंदा 24 विवि की सूची में शामिल हो गया है, जबकि प्रदेश में लखनऊ विवि, कानपुर विवि, मेरठ विवि के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय चौथा विवि है, जिसे यह उपलब्धि हासिल हुई है।
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बीयू के प्रशासनिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा यूजीसी कैटेगरी-1 का दर्जा न केवल विवि की अकादमिक व शोध क्षमताओं की पुष्टि है बल्कि सामूहिक परिश्रम, दूरदृष्टि व संस्थागत संस्कृति का प्रमाण है। इससे बीयू को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिली है। यूजीसी से ग्रेड मिलने के बाद अब बीयू प्रदेश के चुनिंदा विवि में शामिल हो गया है।
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कुलसचिव राजबहादुर सिंह ने कहा यह उपलब्धि आत्मनिर्भर संस्थान के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी है। विवि को कई विशिष्ट अधिकार प्राप्त हुए हैं। इस दर्जे से न केवल विवि की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि होगी बल्कि शोध, प्लेसमेंट और वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार संभव है। संचालन करते हुए आईक्यूएसी निदेशक प्रो. सुनील कुमार कबिया कहा यह उपलब्धि महज एक दर्जा नहीं बल्कि दीर्घकालिक योजना, डेटा-प्रबंधन, नवाचार व गुणवत्ता के एकीकृत प्रयास का परिणाम है। इस दौरान प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. देवेश निगम, प्रो. आलोक वर्मा, डॉ. ऋषि सक्सेना, ई. साबिर अली, डॉ. अनुपम व्यास, डॉ. लवकुश द्विवेदी, प्रो. अपर्णा राज, अनिल बोहरे, डॉ. अतुल खरे, डॉ. विजय यादव आदि मौजूद रहे।


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