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बीयू की आर्थिक सुरक्षा योजना का 20 शिक्षक, कर्मियों ने किया विरोध
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बीयू की आर्थिक सुरक्षा योजना का 20 शिक्षक, कर्मियों ने किया विरोध
झांसी। कोरोना काल में मृत शिक्षक, कर्मचारियों को आर्थिक मदद देने के लिए तैयार की गई आर्थिक सुरक्षा योजना का 20 लोगों ने विरोध दर्ज कराया है। प्रशासन विभाग में लिखित में आपत्ति पत्र दिया गया है। वहीं, कइयों ने मौखिक रूप से असहमति दर्ज करा दी है।
बीयू में कई शिक्षक और कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इस महामारी में सभी ने एकसुर में जान गंवाने वाले स्टाफ के परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए मांग उठाई। बीयू प्रशासन ने फैसला लिया कि कर्मचारी की मौत पर कर्मी और शिक्षक की मृत्यु पर टीचर आर्थिक सहयोग करेंगे। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन अथवा मानदेय से प्रत्येक मृतक के लिए एक-एक हजार और शिक्षकों के वेतन से दो-दो हजार रुपये काटा जाएगा। इस पर कई शिक्षक और कर्मचारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि 20 हजार रुपये पाने वाला कर्मचारी भी एक हजार रुपये दे और एक लाख पाने वाला भी एक हजार दे, ये कैसा नियम है। इसी तरह, 40 हजार पाने वाला शिक्षक दो हजार दे और ढाई लाख पाने वाला भी दो हजार दे, ये तो असमानता है। कई शिक्षक, कर्मियों ने कहा कि एक या दो हजार रुपये नहीं बल्कि दिन या प्रतिशत के हिसाब से वेतन काटा जाए। सोशल मीडिया पर भी खूब विरोध हुआ। अपनी बात से पलटने पर एक शिक्षिका ने तो शिक्षक को फटकार तक लगा दी। बीयू ने 25 मई तक आपत्तियां मांगी थी। बताया गया कि 20 शिक्षक, कर्मचारियों ने लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है। कइयों ने मौखिक विरोध किया है।
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झांसी। कोरोना काल में मृत शिक्षक, कर्मचारियों को आर्थिक मदद देने के लिए तैयार की गई आर्थिक सुरक्षा योजना का 20 लोगों ने विरोध दर्ज कराया है। प्रशासन विभाग में लिखित में आपत्ति पत्र दिया गया है। वहीं, कइयों ने मौखिक रूप से असहमति दर्ज करा दी है।
बीयू में कई शिक्षक और कर्मचारियों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इस महामारी में सभी ने एकसुर में जान गंवाने वाले स्टाफ के परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए मांग उठाई। बीयू प्रशासन ने फैसला लिया कि कर्मचारी की मौत पर कर्मी और शिक्षक की मृत्यु पर टीचर आर्थिक सहयोग करेंगे। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन अथवा मानदेय से प्रत्येक मृतक के लिए एक-एक हजार और शिक्षकों के वेतन से दो-दो हजार रुपये काटा जाएगा। इस पर कई शिक्षक और कर्मचारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कर्मचारियों का कहना है कि 20 हजार रुपये पाने वाला कर्मचारी भी एक हजार रुपये दे और एक लाख पाने वाला भी एक हजार दे, ये कैसा नियम है। इसी तरह, 40 हजार पाने वाला शिक्षक दो हजार दे और ढाई लाख पाने वाला भी दो हजार दे, ये तो असमानता है। कई शिक्षक, कर्मियों ने कहा कि एक या दो हजार रुपये नहीं बल्कि दिन या प्रतिशत के हिसाब से वेतन काटा जाए। सोशल मीडिया पर भी खूब विरोध हुआ। अपनी बात से पलटने पर एक शिक्षिका ने तो शिक्षक को फटकार तक लगा दी। बीयू ने 25 मई तक आपत्तियां मांगी थी। बताया गया कि 20 शिक्षक, कर्मचारियों ने लिखित में आपत्ति दर्ज कराई है। कइयों ने मौखिक विरोध किया है।
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