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बीयू : जांच पर जांच, नहीं आई किसी पर आंच

Tue, 07 Jan 2025 01:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2025 01:04 AM IST
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BU: Investigation after investigation, no one was affected
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में गड़बड़ियों, अनियमितताओं और अनुशासनहीनता पर जांच कमेटी तो तत्काल गठित हो जाती है मगर जांच की आंच किसी पर नहीं आती। जांच प्रक्रिया महीनों चलती रहती है और फिर ठंडे बस्ते में पहुंच जाती है। चूंकि जांचें काफी चल रही हैं, इसलिए अधिकारी भी संज्ञान नहीं लेते हैं।
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टेक्नीकल एजुकेशन क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम ऑफ गवर्मेंट ऑफ इंडिया (टीक्यूप) के तहत इंजीनियरिंग विभाग में कई कार्य हुए और उपकरणों की खरीद हुई। इसमें गड़बड़ी की शिकायत हुई तो कुलपति ने जांच के आदेश दिए। कुलसचिव ने 22 मई 2024 को प्रो. पदमकांत लखनऊ विवि, प्रो. जितेंद्र तिवारी बीयू व नारायण प्रसाद सेवानिवृत्त कुलसचिव बीयू की सदस्यता में कमेटी गठित की मगर आज तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है।
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हिंदी विभाग के प्रो. पुनीत बिसारिया ने न शिक्षक दिवस और न ही दीक्षांत समारोह में हिस्सा किया। विभाग में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, उपस्थिति पंजिका में अनधिकृत तरह से अवकाश अंकन करने, सीसीटीवी कैमरे तोड़ने आदि के आरोप पर 16 अगस्त 2024 को जांच कमेटी गठित हुई। इसमें पूर्व कुलसचिव सीपी तिवारी, नंद किशोर पांडेय राजस्थान विवि तथा दिनेश कुमार कुलसचिव को शामिल किया मगर रिपोर्ट नहीं आई है।
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सहायक लेखाकार दिनेश कुमार पर मनमानी से पत्रावलियां को अपने पास रखने, अधिकारियों के प्रशासनिक अधिकारों का अतिक्रमण करने, शासकीय आदेशों, सत्यनिष्ठा एवं कर्तव्य परायणता का पालन न करने पर कुलसचिव ने 13 सितंबर 2023 को जांच कमेटी गठित की। इसकी जांच प्रो. एमएस सिंह संकायाध्यक्ष अभियांत्रिकी, प्रो. डीके भट्ट सहायक कुलसचिव प्रशासन को सौंपी गई मगर रिपोर्ट नहीं आई है।
डॉ. मु. नईम ने 30 अप्रैल 2024 को हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी के खिलाफ शिकायत की। कुलसचिव ने 16 मई को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की, जिसकी अंतिम रिपोर्ट नहीं आई है। जांच टीम में प्रो. आरके सैनी चीफ प्रॉक्टर, प्रो. टीके शर्मा प्राचार्य बिपिन बिहारी कॉलेज, उच्च शिक्षाधिकारी, प्रो. विनीत कुमार, सुनील कुमार सेन उप कुलसचिव वित्त शामिल हैं।
वहीं, शोधार्थी पवन कुमार व शोध छात्रा मीरा देवी ने शोध निदेशक डॉ. मु. नईम पर गंभीर आरोप लगाए। इनकी जांच के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित की गई मगर परिणाम ढाक के तीन पात हैं। जांच टीम में प्रो. एमएम सिंह, प्रो. आरके सैनी, प्रो. पूनम पुरी, दिनेश कुमार उप कुलसचिव (परीक्षा) और क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी शामिल हैं।





0-वर्जन
जांच कमेटी गठित हुए काफी समय हो गया है। चूंकि जांच को स्वतंत्र रखा जाता है, इसलिए जांच अधिकारी पर जल्द रिपोर्ट देने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता। - विनय कुमार सिंह, कुलसचिव बीयू
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