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बृज की राधा के लिए मयूर बन नाचे श्रीकृष्ण
Wed, 02 Jan 2019 01:51 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 02 Jan 2019 01:51 AM IST
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Krishna
‘झांसी शिल्प महोत्सव’ में मंगलवार की शाम बृज के नाम रही। कलाकारों ने मयूर नृत्य, चरकुला नृत्य समेत अंगुली पर थाली घुमाने की कला की प्रस्तुति की। कलाकारों ने ‘छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलायके ...’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया, जिस पर खूब तालियां बजीं।
मुक्ताकाशी मंच पर कार्यक्रम की शुरूआत अंशिका भदौरिया ने कथक नृत्य से की। कथक केंद्र नई दिल्ली द्वारा प्रस्तुत किए गए नृत्य पर पायलों की झंकार गूंज उठी। नई दिल्ली से आए देवेंद्र शर्मा ने भी कथक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद कलाकारों ने ‘जय हो बृज भूमि की...’ पर नृत्य किया और माहौल को बृज के रंग में रंग दिया। ‘जय कन्हैया लाल की, जय कन्हैया लाल की...’, ‘मुरली वाले ने घेर लई अकेले पनिया को गई...’ इसके बाद चरकुला नृत्य किया, जिसमें कलाकार ने अपने सिर पर मटके रखकर और उसके ऊपर दीपक जलाकर संतुलन साधकर नृत्य किया।
‘श्याम तेरी वंशी पागल कर जाती है....’ और मयूर नृत्य पर कलाकारों ने मोरपंख के साथ नृत्य किया। नृत्य में भगवान श्री कृष्ण और राधा के स्वरूपों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। ‘बरसाने के मोर मुकुट में मोर बन आयो रसिया...’ , कलाकारों ने अंगुली पर थाली घुमाने का गजब का संतुलन दिखाया। ‘छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलायके...’ ‘रंग बरसे...’ गीत पर खूब तालियां बजीं।
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मुक्ताकाशी मंच पर कार्यक्रम की शुरूआत अंशिका भदौरिया ने कथक नृत्य से की। कथक केंद्र नई दिल्ली द्वारा प्रस्तुत किए गए नृत्य पर पायलों की झंकार गूंज उठी। नई दिल्ली से आए देवेंद्र शर्मा ने भी कथक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद कलाकारों ने ‘जय हो बृज भूमि की...’ पर नृत्य किया और माहौल को बृज के रंग में रंग दिया। ‘जय कन्हैया लाल की, जय कन्हैया लाल की...’, ‘मुरली वाले ने घेर लई अकेले पनिया को गई...’ इसके बाद चरकुला नृत्य किया, जिसमें कलाकार ने अपने सिर पर मटके रखकर और उसके ऊपर दीपक जलाकर संतुलन साधकर नृत्य किया।
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‘श्याम तेरी वंशी पागल कर जाती है....’ और मयूर नृत्य पर कलाकारों ने मोरपंख के साथ नृत्य किया। नृत्य में भगवान श्री कृष्ण और राधा के स्वरूपों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। ‘बरसाने के मोर मुकुट में मोर बन आयो रसिया...’ , कलाकारों ने अंगुली पर थाली घुमाने का गजब का संतुलन दिखाया। ‘छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलायके...’ ‘रंग बरसे...’ गीत पर खूब तालियां बजीं।
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